हिम न्यूज़ शिमला। भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्षा वंदना योगी ने कहा कि 19 सितंबर, 2023 का दिन भारत के 75 साल के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाएगा, उस दिन के रूप में जब देश की आधी आबादी को देश की सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा।

भारत की संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करने के लिए 128वें संविधान संशोधन विधेयक, 2023 की शुरूआत, जिसे नारी शक्ति वंदन विधेयक के रूप में भी जाना जाता है, ‘नारी शक्ति’ जो ‘राष्ट्र शक्ति’ भी है, की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नारी शक्ति राष्ट्र की शक्ति है और अब 2047 तक अमृत काल में भारत को और भी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए महिलाओं और राष्ट्र दोनों को बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हम इसके प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी , उनके मंत्रिपरिषद और भाजपा को धन्यवाद करते है। प्रधान मंत्री मोदी की मंत्रिपरिषद ने भी 2021 में 11 महिलाओं को कैबिनेट रैंक व राज्य मंत्री के मंत्री बनाकर इतिहास रचा था। एक बार जब यह महिला आरक्षण विधेयक भारत की संसद द्वारा पारित हो जायेगा तो हम कह सकते हैं कि यह उपलब्धि देश के विधायी निकायों में महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए यह दिन इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
वंदना योगी ने कहा कि भारतीय जनता महिला मोर्चा प्रधानमंत्री का विशेष तौर पर और शीर्ष नेतृत्व का हृदय से धन्यवाद से कोटि कोटि धन्यवाद करता है। उन्होंने कहा नए संसद भवन में पहले ही कार्यदिवस पर नया इतिहास रचा गया। कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने मंगलवार को लोकसभा, राज्यों की विधानसभा व दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने वाला नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश किया।
उन्होंने कहा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के इस ऐतिहासिक फैसले से समस्त महिला वर्ग गौरवान्वित महसूस कर रहा है व सम्पूर्ण महिला वर्ग संग प्रदेश महिला मोर्चा अपने महिला हितैषी प्रधान मंत्री का आभार व वंदन करते हुए कोटि कोटि धन्यवाद करता है।
करीब 27 सालों से लंबित महिला आरक्षण विधेयक अब संसद के पटल पर लाया गया, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति को दर्शाता है। आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 15 फीसदी से कम है, जबकि राज्य विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है। इस मुद्दे पर आखिरी बार कदम 2010 में उठाया गया था, जब राज्यसभा ने हंगामे के बीच बिल पास कर दिया था और मार्शलों ने कुछ सांसदों को बाहर कर दिया था, जिन्होंने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का विरोध किया था।
हालांकि यह विधेयक रद्द हो गया, क्योंकि लोकसभा से पारित नहीं हो सका था। भाजपा ने हमेशा इसका समर्थन किया। वर्तमान स्थिति की बात करें तो लोकसभा में 78 महिला सदस्य चुनी गईं है।