हिम न्यूज़,किन्नौर-किन्नौर में सांगला और कड़छम को जोड़ने वाली सड़क के कुछ हिस्से इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे कि यह प्रतीत हो रहा था कि वहां कभी सड़क थी ही नहीं। इसके कारण 9 जुलाई को सांगला में लगभग 125 पर्यटक फंस गए। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था और भयानक बारिश के दौर की अभी शुरुआत ही थी।
सरकार ने भारतीय वायु सेना की मदद से बचाव अभियान आरम्भ किया। हवाई मार्ग से बचाव के लिए कई प्रयास किये गये लेकिन खराब मौसम के चलते सभी असफल रहे। इस बीच अधिकारियों ने सांगला में लोगों को एक सुरक्षित स्थान पर ठहराने की व्यवस्था की और सुनिश्चित किया कि उनके पास आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भण्डारण हो। चार दिन बाद यानी कि 12 जुलाई को जैसे ही मौसम थोड़ा अनुकूल हुआ प्रदेश सरकार ने वायुसेना की मदद से सभी लोगों को सुरक्षित आश्रयस्थल पहुंचाने के लिए एयरलिफ्ट किया।
एक अन्य घटना में, 10 जुलाई को सिरमौर के नाहन में गिरि नदी के तट पर पांच लोग फंस गए थे। 24 घंटों के लम्बे इंतजार के बाद 11 जुलाई को इन्हें भारतीय सेना के हेलीकाप्टर द्वारा सुरक्षित निकाला गया। इस दौरान इन लोगों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन चौबीस घंटे सतर्क और उनसे संपर्क साधे रहा। ड्रोन की मदद से उन्हें चिकित्सा, भोजन और अन्य राहत सामग्री भी प्रदान की गयी।
9 जुलाई से 12 जुलाई, 2023 तक राज्य में हेलीकॉप्टर के उपयोग से लगभग 150 लोगों को बचाया गया।अंतरराष्ट्रीय पटल पर असाधारण नेतृत्व क्षमता की आभा
हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता और आतिथ्य सत्कार न केवल देश बल्कि दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हर साल प्रदेश में करोड़ों की संख्या में पर्यटक आते हैं। दुर्भाग्यवश, जब राज्य में आपदा आई तो पूरे राज्य में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी मौजूद थे, जोकि विभिन्न स्थानों में फंस चुके थे। इन लोगों की सुरक्षा के दृष्टिगत भारत में स्थित सम्बन्धित देश के सर्वोच्च प्रतिनिधि चिंता व्यक्त कर सकते थे जिससे कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल व देश की छवि को नुकसान पहुंचता। इससे राज्य के पर्यटन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश सरकार ने सहायता प्रदान कर इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया। हिमाचल के इन प्रयासों को दुनिया भर में सराहा भी गया। विश्व बैंक ने आपदा में प्रभावी कदम उठाने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुकरणीय प्रयासों की सराहना की। विश्व बैंक ने मुख्यमंत्री द्वारा बचाव कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी का उदहारण देते हुए उनकी असाधारण नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा भी की।
मार्मिक अवधारणा कि कसौटी पर पारआपदा के बीच सरकार को केरल से सम्बन्ध रखने वाले चिकित्सा क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण कर रहे 27 छात्रों के बारे में लाहौल-स्पीति के कोकसर में फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई। इन छात्रों को मौसम की भीषण स्थिति से निपटने के अलावा पैसे की कमी का भी सामना करना पड़ रहा था। सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और सभी को मनाली लाया गया। उनके रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई। जैसे ही मौसम सामान्य हुआ, सड़क यातायात के लिए बहाल की गयी और प्रशासन द्वारा छात्रों को जिला मंडी भेजा गया। वहां से वॉल्वो बस के माध्यम से उन्हें दिल्ली पहुंचाया।
इस दौरान सरकार ने बच्चों का पूरा ख्याल रखा, उनके भोजन, आवास और यात्रा का खर्च वहन किया और यह सुनिश्चित किया कि वे सुरक्षित केरल पहुंचें।एक सप्ताह की अवधि में इसी तरह के कई साहसिक बचाव कार्य देखने को मिले, जिसमें चंबा जिले में मणिमहेश और कुल्लू के श्रीखंड महादेव की यात्रा पर गए श्रद्धालु, कुल्लू स्थित पिन पार्वती ट्रेक और अन्य ट्रैकिंग मार्गों पर गए साहसिक पर्यटन के शौकीन और किन्नौर जिले के कारा दर्रा और विभिन्न मार्गों पर गए ट्रैकर्स को बचाने के अभियान शामिल थे। इसके अलावा आलू ग्राउंड, चुरुडू, हनुमानीबाग, सरवरी खड्ड, चंडीगर बिहाल, पागल नाला, सिस्सू, पंडोह, नगवाईं और राज्य के विभिन्न जिलों के अन्य हिस्सों से हज़ारों लोगों को बचाया गया।
इस अवधि के दौरान ऐसे अनेक बचाव अभियान भी देखने को मिले, जिनमें बचाव दलों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सफलता हासिल की। इन बहादुर चेहरों में वायुसेना, थलसेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल, सीमा सड़क संगठन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, होम गार्ड, फायर ब्रिगेड, अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण और संबद्ध खेल संस्थान, स्थानीय लोग, जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के मंत्री एवं विधायक शामिल हैं। इस वर्ष जब हम 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे तो आइए इन बहादुर बचाव कर्मियों को भी उनकी निःस्वार्थ सेवा के लिए एक साथ सलामी देें।
