हिम न्यूज़ : करसोग,: प्रदेश की ‘सुक्खू सरकार’ की व्यवस्था परिवर्तन की सोच प्रशासनिक सुधारों से आगे बढ़कर आम नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित कर उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी ला रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में मंडी जिले का नागरिक चिकित्सालय करसोग इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़िकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके लिए आदर्श स्वास्थ्य संस्थान के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसी से प्रेरणा लेते हुए नागरिक अस्पताल करसोग में भी सुखद बदलाव नज़र आने लगे हैं।
करसोग क्षेत्र के 58 वर्षीय एक गंभीर मरीज लगभग एक वर्ष से शिमला स्थित इंदिरा गांधी राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (आईजीएमसी) के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर उपचाराधीन था। गत 23 मई, 2026 को विशेष वेंटिलेटर एंबुलेंस के माध्यम से उसे सफलतापूर्वक नागरिक चिकित्सालय करसोग के आईसीयू में स्थानांतरित किया गया। यह कदम न केवल चिकित्सा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि मरीज और उसके परिवार के लिए राहत भी लेकर आया। बड़े शहर में लंबे समय तक उपचार करवाना परिवार के लिए आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से अत्यंत कठिन होता जा रहा था।
प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में यह एक अनूठी पहल मानी जा रही है जब राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान से वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहे मरीज को उपमंडल स्तरीय अस्पताल में स्थानांतरित कर सफलतापूर्वक उपचार प्रदान किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर बनी हुई है। यह मरीज करसोग के समीप नोवा गांव से सम्बन्धित है। एक दुर्घटना के कारण इसके फेफड़ों की नसें नष्ट हो गई और जीवित रहने के लिए अब वेंटिलेटर ही एकमात्र सहारा है। परिजनों को लंबे समय तक शिमला में उपचार करवाना मुश्किल हो रहा था। लंबी बीमारी के मरीजों को वेंटिलेटर उपलब्ध करवाने की चुनौती भी सामने रही। ऐसे में मरीज और परिवार को राहत देने के लिए नागरिक चिकित्सालय करसोग में वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करवाई गई।
इसके लिए करसोग की टीम ने पिछले कुछ महीनों से सुनियोजित तरीके से तैयारी पूरी की। सबसे पहले चौबीसों घंटे निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित की गई। उसके बाद शिमला से इंजीनियर बुलाकर बंद पड़े वेंटिलेटर को ठीक करवाया और आपात अनुभाग में एक आईसीयू सेटअप किया गया। नागरिक चिकित्सालय गोहर से एनस्थीसिया विशेषज्ञ बुलाकर अस्पताल टीम को वेंटिलेटर का डेमो दिया गया। नागरिक चिकित्सालय करसोग से एक डॉक्टर, दो स्टाफ नर्स और ओटीए को बारी-बारी शिमला में आईसीयू ट्रेनिंग करवाई गई।
मरीज की देखभाल पीजीआई चंडीगढ़ से एमडी मेडिसिन डा. कृतिका की अगुवाई में गठित टीम द्वारा की जा रही है, जिसमें ओटीए उपासना, स्टाफ नर्स प्रियंका, वेदना, रोशनी और अर्चना सहित पूरी क्रिटिकल केयर टीम सेवा में जुटी है। मरीज की निगरानी, दवा प्रबंधन और वेंटिलेटर सपोर्ट सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। एनस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र ठाकुर चिकित्सकीय टीम के संपर्क में हैं। प्रतिदिन मरीज की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। टीम आईजीएमसी शिमला के आईसीयू विशेषज्ञों के साथ भी निरंतर समन्वय बनाए हुए है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्षों तक यह धारणा बनी रही कि गंभीर मरीजों का उपचार केवल मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में ही संभव है। करसोग अस्पताल ने इस सोच को बदलते हुए साबित किया है कि यदि संसाधनों का सही उपयोग, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत इच्छाशक्ति हो तो ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल भी उकृष्ट क्रिटिकल केयर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। अस्पताल का तीन बेड वाला आईसीयू और प्रशिक्षित स्टाफ अब क्षेत्र के गंभीर मरीजों के लिए जीवनरेखा बन चुका है। वास्तव में यह उपलब्धि प्रदेश सरकार की व्यवस्था परिवर्तन नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है जो अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोपाल चौहान का कहना है कि मरीज की स्थिति स्थिर है और पूरी टीम निष्ठा एवं समर्पण के साथ उसकी देखभाल कर रही है। इस सफलता ने अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया है।