हिम न्यूज़ धर्मशाला। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने कुछ समय में काफी अच्छी प्रगति की है। यह एक कुशल मार्गदर्शक के नेतृत्व के कारण ही संभव हो पाता है।

विश्वविद्यालय को हाल ही में राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) के द्वारा ए प्लस ग्रेड मिलना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करना, नए कोर्स शुरू किया जाना और देहरा-जदरांगल में परिसरों का निर्माण कार्य शुरू होना यह सब कुछ ही समय में हुआ है। यह बात उन्होंने कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल जी को बधाई देते हुए कही।
अभी हाल में ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल जी ने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार जी के आवास स्थान यामिनी में उनसे मुलाकात की और 16 अगस्त को केंद्रीय विश्वविद्यालय में होने वाले कार्यक्रम “संविद्या समागम” में शामिल होने का आमंत्रण दिया। जिसे शांता जी ने स्वीकार कर लिया। इस मौके पर उनके साथ अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार रहे।
इस मौके पर शांता कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में केंद्रीय विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में विश्वविद्यालय पूरे भारत में अग्रणी है। आज तक इस प्रकार की शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार नहीं किया गया था जिसमें स्थानीयता और मातृभाषा को महत्ववता दी गई हो ।
यह ऐसी शिक्षा नीति है जिसमें भारत की आत्मा निवास करती है। इस शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थी विश्व स्तरीय आधार तो ग्रहण करेगा ही साथ में अपनी मातृभाषा में स्थानीयता की विशेषता को भी प्राप्त करेगा | इस शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह भी है कि अब शिक्षार्थियों को भाषा बाधा नहीं बनेगी | शिक्षार्थी अपनी मातृभाषा में शिक्षा को ग्रहण करने के विकल्प चुन सकते हैं | उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परम्परा और संस्कृति को पढ़ाया जायेगा।
विश्वविद्यालय ने इस शिक्षा नीति को सर्वप्रथम लागू करके गौरव हासिल किया है। उन्होंने इस मौके पर विश्वविद्यालय में शुरू किए गए नए कोर्स को लेकर भी चर्चा की। वहीं शांता कुमार ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) के द्वारा ए प्लस ग्रेड मिलने पर बधाई दी।
उन्होंने कहा कि यह हिमाचल के लिए गौरव की बात है कि किसी शिक्षण संस्थान को यह ग्रेड मिला है। विश्वविद्यालय को ए प्लस ग्रेड मिलने के पीछे एक अनुभवी नेतृत्त्व तथा शिक्षाविदों की दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
अपने स्थाई परिसर न होने के बावजूद, विपरीत परिस्थितियों में यह मुकाम हासिल करना प्रशंसनीय है। हालांकि अब शिक्षा को लेकर विश्वविद्यालय की जिम्मेवारियां अधिक बढ़ गई हैं। मुकाम हासिल करने से ज्यादा अब उसे बरकरार रखना और उससे आगे बढ़ने के लिए काफी मेहनत करनी होगी।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों के दोनों परिसरों का निर्माण कार्य शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देहरा और जदरांगल में परिसरों के निर्माण कार्य शुरू होने से अब इस पर होने वाली राजनीति पर विराम लग गया है।
बच्चों को पढ़ाई के लिए एक माहौल चाहिए होता है जो उनको अपने परिसरों में ही मिल पाएगा। उन्होंने इच्छा जताई कि वह स्वयं भी देहरा में चल रहे परिसर के निर्माण कार्य को देखना चाहते हैं।