हिम न्यूज़,कुल्लू,: खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को लेकर जिला स्तरीय मॉनिटरिंग एवं एडवाइजरी कमेटी की बैठक अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुरजीत सिंह राठौर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में खाद्य सुरक्षा से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा की गई तथा खाद्य कारोबारियों द्वारा निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक का संचालन सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा कुल्लू अनिल शर्मा ने किया। उन्होंने जिला कुल्लू में खाद्य सुरक्षा की दिशा में किए जा रहे कार्यों और वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में जिला स्तरीय एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत जिले में खाद्य कारोबारियों के पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को लगातार प्रभावी बनाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक 1,082 खाद्य कारोबारियों का पंजीकरण किया गया है तथा 151 लाइसेंस जारी किए गए हैं। खाद्य कारोबारियों को अधिनियम के दायरे में लाने के लिए विशेष पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग की जा रही है। वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक 56 प्रवर्तन सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से 26 का विश्लेषण किया गया। इनमें छह सैंपल निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके अतिरिक्त 104 सर्विलांस सैंपल लिए गए, जिनमें से 22 का विश्लेषण किया गया और तीन सैंपल गैर-अनुरूप पाए गए। गैर-अनुरूप पाए जाने वाले सैंपलों के मामलों में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
बैठक में बताया गया कि खाद्य सुरक्षा से संबंधित मामलों में न्यायालयों में भी कार्रवाई जारी है। विभिन्न मामलों में अब तक कुल 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
जिले में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी के माध्यम से मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच के साथ-साथ उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब द्वारा 408 खाद्य सैंपलों का विश्लेषण किया गया। इनमें दूध एवं दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल, सॉस, पानी और मिठाइयां आदि शामिल हैं। इनमें चार सैंपल निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिनमें दो कुकिंग ऑयल, एक खोया बर्फी तथा एक हल्दी पाउडर का सैंपल शामिल है।
बैठक में फ़ूड सेफ्टी ट्रेंनिग एंड सर्टिफिकेशन के तहत खाद्य कारोबारियों और खाद्य संचालकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा स्वच्छता रेटिंग योजना, स्वस्थ भोजन परिसर पहल, स्वस्थ भोजन विद्यालय पहल, प्रयुक्त खाद्य तेल के पुनः उपयोग की पहल, उच्च जोखिम वाले खाद्य प्रतिष्ठानों का ऑडिट तथा खाद्य सुदृढ़ीकरण जैसी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की विभिन्न पहलों को जिले में बढ़ावा दिया जा रहा है।
ईट टू राइट कैंपस इनिशिएटिव के तहत राजकीय डिग्री कॉलेज ढालपुर कुल्लू, पॉलिटेक्निक कॉलेज सेओबाग, रमेश्वरी बी.एड. कॉलेज शराभाई, आईटीआई शमशी तथा आईटीआई पतलीकूहल को ऑडिट के लिए चिन्हित किया गया है। वहीं हाई रिस्क ऑडिट के लिए हिमाचल हिमालयन डेयरी गडौरी शमशी, हिमालयन डेयरी जगतसुख तथा थाउजेंड सिस्टर्स, मठियाना वशिष्ठ को चिन्हित किया गया है। ईट टू राइट कैंपस इनिशिएटिव के तहत विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वस्थ एवं पौष्टिक भोजन, खाद्य स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसी प्रकार खाद्य फोर्टिफिकेशन के तहत आयरन एवं आयोडीन युक्त नमक, आयरन, फोलिक एसिड एवं विटामिन बी-12 युक्त गेहूं का आटा व चावल तथा विटामिन ए एवं डी युक्त खाद्य तेल के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों, शिक्षा विभाग द्वारा मिड-डे मील योजना तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुरजीत सिंह राठौर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण एवं सैंपलिंग अभियान लगातार जारी रखा जाए। उन्होंने खाद्य कारोबारियों के पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने तथा बिना पंजीकरण अथवा लाइसेंस के खाद्य कारोबार करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा।
उन्होंने खाद्य कारोबारियों एवं खाद्य संचालकों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने, खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता एवं हाइजीन मानकों की नियमित निगरानी करने तथा गैर-अनुरूप पाए जाने वाले खाद्य सैंपलों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
एडीएम ने मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी की सेवाओं का अधिकतम उपयोग करने तथा सैंपलिंग के दौरान लैब के लिए निर्धारित एवं स्थायी पार्किंग स्थान उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए, ताकि मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच का कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।
उन्होंने संबंधित विभागों को खाद्य फोर्टिफिकेशन को बढ़ावा देने, आंगनवाड़ी केंद्रों, विद्यालयों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लोगों तक सुरक्षित एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी संबंधित विभागों, खाद्य कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को जागरूकता गतिविधियों, जागरूकता शिविरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और पंजीकरण शिविरों को नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि जिले में सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य संस्कृति को और मजबूत किया जा सके।.