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जलशक्ति विभाग में अब नहीं होगी आउटसोर्स भर्ती

हिम न्यूज़ शिमला-हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार जलशक्ति विभाग में प्रस्तावित 5 हजार भर्तियों को आउटसोर्स पर नहीं करेगी।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंगलवार को विधानसभा में जलशक्ति विभाग को लेकर विपक्ष द्वारा लाए गए कटौती प्रस्तावों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने जलशक्ति विभाग में आधा दर्जन बंद किए गए कार्यालयों को खोल दिया है और शेष कार्यालयों को बंद करने के निर्णय की पुनःसमीक्षा कर इस संबंध में एक कार्ययोजना मंत्रिमंडल में ले जाई जाएगी और सभी जरूरी कार्यालयों को फिर से खोलने का प्रयास होगा।
बाद में सदन ने विपक्ष द्वारा अपने कटौती प्रस्तावों को वापस नहीं लिए जाने पर इन्हें ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया।
अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार एक नीति के तहत विभाग में 5 हजार पदों की भर्ती करेगी ताकि भविष्य में ये लोग सरकारी कर्मचारी बन सकें। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विभाग में पहले से आउटसोर्स में लगे लोगों का क्या करना है, बाद में देखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जलशक्ति विभाग में ये भर्तियां पूर्व सरकार द्वारा घोषित 8370 भर्तियों के अलावा होगी, क्योंकि इन भर्तियों को सरकार ने अभी रद्द नहीं किया हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार क्लीनवेज कंपनी को भर्तियां करने का कोई ठेका नहीं देगी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जलशक्ति विभाग ने 1439 पेयजल योजनाएं प्रगति पर हैं और उन्हें तेजी से पूरा करने के प्रयास किए जाएंगे ताकि पीने के पानी की कमी को दूर किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में स्रोत पर पानी कमी है और विभाग इस पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि चंबा जिला के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल डलहौजी में प्रदेश सरकार जल्द चौबीसों घंटे पेयजल सुविधा प्रदान करने जा रही है और इस सुविधा वाला डलहौजी प्रदेश का पहला शहर होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नलके लगाने का कार्य अब बहुत हो गया, अब सरकार सिंचाई पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया बदली है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग में न कोई टेंडर प्रक्रिया बंद की है और ही कोई भुगतान रोका गया है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने विभाग में चुनावी वर्ष में जो इरीगेशन विंग बनाया है, उसे मौजूदा सरकार ने मई माह तक जारी रखने को मंजूरी दी है।
अग्निहोत्री ने कहा कि वाटर सेस के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा का विरोध पूरी तरह से राजनीतिक है। उन्होंने इस विरोध को पंजाब और हरियाणा की अपने अधिकारों के लिए मजबूरी भी करार दिया और कहा कि हिमाचल को पंजाब पुनर्गठन कानून में मिला 7.19 फीसदी हिस्सा हिमाचल का हक है, कोई खैरात नहीं। उन्होंने कहा कि हमने हिमाचल की सीमा के भीतर वाटर सेस लगाया है।
उन्होंने वाटर सेस की लड़ाई को लंबी लड़ाई करार दिया और कहा कि हम इसके लिए लड़ेंगे और विपक्ष का भी सहयोग लेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पंजाब पुनर्गठन के समय हुए बंटवारे में हिमाचल के साथ अन्याय हुआ है।
इससे पहले कटौती प्रस्तावों में चर्चा में हिस्सा लेते हुए विधायक इंद्र सिंह गांधी ने सुकेती खड्ड के चैनेलाइजेशन की मांग की और कहा कि उनके क्षेत्र में खनन माफिया सक्रिय है और अवैध खनन से पेयजल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं, इसका असर सिंचाई योजनाओं पर भी पड़ना शुरू हो गया है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार के सिंचाई विंग के गठन को लेकर लिए गए निर्णय को भी बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सिंचाई विंग अलग होगा तो सिंचाई स्कीमों की डीपीआर ज्यादा बनेगी। उन्होंने कहा कि तबादलों पर जब प्रतिबंध है तो बिना मंत्री की मंजूरी के तबादले न हो।
सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र ऊना में ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं है। वहां बरसात आने पर पानी भर जाता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के मसाधान के लिए पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने  22.48 करोड़ रुपए दिलवाया था। उन्होंने कहा कि ऊना शहर के साथ लगते इलाकों में सीवरेज का काम आगे बढ़ाया जाए।
जेआर कटवाल ने कहा कि पेयजल योजनाओं की लीकेज रोकने और उनकी रिपेयर पर ध्यान देने की मांग की। साथ ही सीर खड्ड से आने वाले पेयजल को प्यूरीफाई करने की मांग की।
बलबीर सिंह वर्मा ने चौपाल विधानसभा हलके के नेरवा बाजार के साथ लगती खड्ड में प्रोटेक्शन दीवार लगाने की मांग की। उन्होंने अपने हलके में हैंडपंप लगाने और खराब पड़े हैंडपंप की ठीक करने की भी मांग की।
प्रकाश राणा, विनोद कुमार, रणवीर सिंह निक्का, डीएस ठाकुर, त्रिलोक ठाकुर ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।