हिम न्यूज़, शिमला। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की लोकतंत्र की परिभाषा बड़ी विचित्र है—जिस चुनाव में कांग्रेस जीत जाए, वहां चुनाव आयोग, चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र सब ठीक हैं; लेकिन जहां जनता कांग्रेस को नकार दे, वहां चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की रक्षा नहीं, बल्कि लगातार मिल रही चुनावी हार की जिम्मेदारी संवैधानिक संस्थाओं पर डालने का प्रयास है।
कश्यप ने कहा कि 6 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी व अन्य विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी सहित नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में कई घंटे धरना दिया और बाद में उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर लगातार राजनीतिक प्रहार करना अलग विषय है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सबसे पहले हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देखना चाहिए। प्रदेश में कांग्रेस की अपनी सरकार और मुख्यमंत्री होने के बावजूद मई 2026 में हुए चार नगर निगम चुनावों में भाजपा ने मंडी, धर्मशाला और सोलन—चार में से तीन नगर निगमों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस केवल पालमपुर जीत सकी। उन्होंने सवाल किया कि क्या इन चुनावों में भी कांग्रेस अपनी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराएगी?
कश्यप ने कहा कि प्रदेश के स्थानीय निकाय और जिला परिषद के चुनाव कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में और प्रदेश की अपनी प्रशासनिक व्यवस्था के बीच हुए। जहां चुनाव बैलेट पेपर से हुए, वहां भी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को कई स्थानों पर जनता ने नकारा। इसलिए बार-बार EVM या चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करके कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को नहीं छिपा सकती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और कांग्रेस को जनता के निर्णय का सम्मान करना सीखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस से एक सीधा सवाल है—हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस जीती तो क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष था? कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस जीती तो क्या व्यवस्था ठीक थी? और जब कांग्रेस हारती है तभी चुनाव आयोग संदिग्ध कैसे हो जाता है? हाल में भाजपा ने भी इसी आधार पर कांग्रेस से पूछा है कि जिन राज्यों में वह चुनाव जीतकर सत्ता में है, क्या वहां के चुनाव परिणामों पर भी उसे अविश्वास है।
सुरेश कश्यप ने SIR पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी आवश्यकता है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह मतदाता सूची के सत्यापन और उसमें पात्र मतदाताओं की सही जानकारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रही है। यदि किसी पात्र मतदाता के अधिकार से जुड़ा कोई ठोस विषय है तो उसे प्रमाणों के साथ चुनाव आयोग के सामने रखा जाना चाहिए, लेकिन पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देकर संवैधानिक संस्था को बदनाम करना उचित नहीं है।
कश्यप ने कांग्रेस के चुनाव आयोग से संबंधों के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जिस संस्था पर कांग्रेस सवाल उठा रही है, उसके पूर्व पदाधिकारियों को राजनीति में अवसर देने का उसका अपना इतिहास रहा है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एम.एस. गिल 1996 से 2001 तक CEC रहे और बाद में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य बने तथा यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में गिल का CEC कार्यकाल 12 दिसंबर 1996 से 13 जून 2001 दर्ज है। उन्होंने कहा कि पूर्व CEC टी.एन. शेषन ने भी बाद में कांग्रेस के समर्थन से राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था।
उन्होंने कहा कि इसलिए कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले अपना इतिहास भी देखना चाहिए। “जब चुनाव आयोग का पूर्व मुखिया बाद में कांग्रेस से राज्यसभा पहुंचकर केंद्रीय मंत्री बनता है, तब संस्था की स्वतंत्रता पर कांग्रेस को चिंता नहीं होती; लेकिन जनता कांग्रेस को चुनाव में हरा दे तो उसी चुनाव आयोग पर सवाल खड़े होने लगते हैं।”
कश्यप ने कहा कि हिमाचल की जनता भी कांग्रेस की इस राजनीति को देख रही है। प्रदेश में सत्ता और सरकारी तंत्र होने के बावजूद कांग्रेस को स्थानीय चुनावों में झटके लगे हैं। जनता की नाराजगी का उत्तर चुनाव आयोग पर हमला नहीं, बल्कि अपने शासन और नीतियों का आत्ममंथन होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस का नया सिद्धांत बन गया है—जीते तो जनादेश, हारे तो चुनाव आयोग दोषी। लोकतंत्र ऐसे नहीं चलता। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। कांग्रेस को SIR के नाम पर भ्रम और भय फैलाने के बजाय जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए।”