नीट परीक्षा लीक करने के विरोध में चक्का जाम

हिम न्यूज़, शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय समर हिल (लाल चौक ) शिमला में आज एन टी ए(NTA)के द्वारा नीट की परीक्षा को लीक करने के के विरोध में एन टी ए का पुतला जलाया गया और चक्का जाम किया गया !

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश अखिल भारतीय कमेटी के आह्वान पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां कार्यकर्ताओं ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विश्वविद्यालय के लाल चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया और जिसमें एस एफ आई (SFI) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सचिव मुकेश ने साफ तौर पर यह संदेश दिया कि देश की शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी संस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसएफआई कार्यकर्ताओं ने लाल चौक पर एकत्रित होकर केंद्र सरकार और एनटीए(NTA)के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस दौरान एनटीए का पुतला जलाकर अपना रोष प्रकट किया, जिसके बाद आक्रोशित छात्रों ने सड़क पर चक्का जाम कर दिया जिससे समर हिल और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। संगठन के नेताओं ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में नीट (NEET)और नेट(N ET)जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में जिस तरह की धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार की खबरें सामने आई हैं, उसने देश की साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरा दिया है और मेहनती छात्रों के वर्षों के संघर्ष पर पानी फेर दिया है। एसएफआई का मानना है कि एनटीए जैसी सेंट्रलाइज्ड एजेंसियां शिक्षा के भगवाकरण और निजीकरण को बढ़ावा देने का एक हथियार बन चुकी हैं, जहां पारदर्शिता नाम की कोई चीज नहीं बची है और पेपर लीक माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हो रहा है। छात्रों ने मांग की कि एनटीए को तुरंत भंग किया जाए और इन सभी घोटालों की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एक उच्च स्तरीय समिति से करवाई जाए ताकि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके, तथा इसी घटना पहली बार नहीं हुई है 2024 के अंदर भी नेट की परीक्षा इसी प्रकार लेकरहुई थी इसलिए एस एफ आई का मान न है कि केंद्र सरकार परीक्षा करवाने में असफल रही है तथा एस एफ आई मांग करती है कि शिक्षा मंत्री जल्द अपने पद से इस्तीफा दे क्योंकि बह अपनी जिम्मेदार खरा नहीं उतर पा रहे है साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए और प्रभावित छात्रों को न्याय नहीं दिया, तो एसएफआई इस आंदोलन को प्रदेश के हर कॉलेज और गांव तक ले जाएगी और संसद का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेगी। और अंत में संगठन ने यह स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और गरीब-मध्यम वर्गीय छात्रों के शिक्षा के अधिकार को बचाने की लड़ाई है जो आगे भी जारी रहेगी।