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भारतीय हॉकी 2028 के ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ गौरव प्राप्त करने की ओर अग्रसर है- डेविड जॉन

 हिम न्यूज़, भारत के पूर्व हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर डेविड जॉन ने विश्वास जताया है कि भारतीय हॉकी टीम 2028 के ओलंपिक में अपने शिखर पर पहुंच जाएगी और कई वर्षों बाद स्वर्ण पदक के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी।

भारतीय टीम में अधिकांश हमारे वर्तमान जूनियर विश्व कप खिलाड़ी 2024 और 2028 के खेलों में शामिल होंगे। वे उस समय तक एक साथ करीब 300 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल चुके होंगे और प्रत्येक की आयु लगभग 30 वर्ष होगी। डेविड जॉन ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स मैच के अलग हटकर बात करते हुए कहा कि टीम के पास किसी भी तरह के दबाव को झेलने का सही अनुभव रहेगा।

हाल ही में टोक्यो खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी ने कांस्य पदक और महिलाओं ने चौथे स्थान पर रहने के साथ ही दिल को छू लेने वाले प्रदर्शन कर सुनहरे संकेत दिए हैं।

डेविड ने चेताया कि ये भारत के लिए रोमांचक समय है लेकिन जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम और हॉलैंड सहित कई अन्य टीमें भी बेहतर हो रही हैं।

इस्तीफा देने से पहले कई वर्षों तक टीम इंडिया के साथ रहे हाई-परफॉर्मेंस निदेशक डेविड अब ओडिशा हॉकी के निदेशक के रूप में देश में वापस आ गए हैं। वह अपने कार्यभार से उत्साहित हैं, खासकर जब उन्हें राज्य के खेल-प्रेमी मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है।  

डेविड ने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका है। लेकिन अगर ओडिशा मजबूत हो जाता है, तो भारतीय हॉकी पुरुष और महिला दोनों टीमें बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य और ध्यान अपनी टीम को देश में नंबर 1 बनाना था।

इस लक्ष्य की खोज में, ओडिशा पहले से ही हॉकी के लिए 20 और सिंथेटिक टर्फ का निर्माण कर रहा है। विशेषकर राज्य के सबसे भीतरी  इलाकों में जहां प्राकृतिक प्रतिभा की प्रचुरता के साथ अत्यधिक गरीबी सह-अस्तित्व में है।

जल्द ही, हमारे बच्चे सिंथेटिक टर्फ पर खेलेंगे

डेविड ने कहा कि जल्द ही, हमारे बच्चे सिंथेटिक टर्फ पर खेलेंगे और जमीनी स्तर से ही घास पर अभ्यास नहीं करेंगे। उन्होंने इस धारणा की पुष्टि करते हुए कहा कि भारतीय हॉकी को ऊंचाइयों पर ले जाने लिए यही एकमात्र रास्ता है।

हमारा अगला कदम इन नए मैदानों में से प्रत्येक में अच्छे कोचों को नियुक्त करना है, ताकि सभी को जमीनी स्तर पर ही सर्वश्रेष्ठ कोचिंग मिल सके। बीते 8 वर्षों में आप हॉकी के खेल में एक अलग ओडिशा को देखेंगे और उम्मीद है कि इससे एक अलग भारत भी सामने आएगा।

बेहद सम्मानित ऑस्ट्रेलियाई कोच ने भारतीय खिलाडियों के ड्रिब्लिंग कौशल पर आश्चर्य व्यक्त किया, लेकिन जोर देकर कहा कि भारतीय टीम को फिर से विश्व शक्ति बनने के लिए उन्हें कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता है। वे अपने विरोधियों को पीछे छोड़ने की कोशिश न करें। आधुनिक हॉकी 3डी और एरियल स्किल्स से संबंधित है। सौभाग्य से, युवाओं ने इन सभी कौशलों को आत्मसात कर लिया है। डेविड ने मैच के तेज प्रवाह की ओर इशारा करते हुए यह बात कही।

हमारे खिलाड़ी तेज और आक्रमण करने में माहिर हैं, लेकिन वे राइवल डी में गेंद को खो देते हैं क्योंकि वे डिफेंडर्स के बहुत करीब दौड़ते हैं। इससे यह समस्या होती है कि दूसरी टीम को डेवस्टेटिंग इफेक्ट से काउंटर अटैक करने का मौका मिल जाता है।

 ओडिशा के लड़कों ने केआईवाईजी में कांस्य पदक जीता है और उनकी लड़कियों की फाइनल में हरियाणा के साथ भिड़ंत होना तय है।