Breaking
पदमश्री विद्यानंद सरैक होंगे सिरमौर के जिला आईकन         अतिरिक्त व्यय पर्यवेक्षकों के लिए कार्यशाला आयोजित         राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विजेताओं को कुलपति डाक्टर डी.के.वत्स ने किया पुरस्कृत         विद्यार्थियों ने बनाए चंद्रयान व सौर मंडल के मॉडल         परोल स्कूल में ‘स्वीप’ के तहत आयोजित किया गया जागरुकता कार्यक्रम         बालासुंदरी चैत्र नवरात्र मेला 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2024 तक अयोजित होगा-एल.आर.वर्मा         मतदान फीसद बढ़ाने के लिए योजना पूर्वक करें प्रयास : अपूर्व देवगन         कांगड़ा जिला में मतदाता जारूकता अभियान पर करेंगे विशेष फोक्स: डीसी         मेधा प्रोत्साहन योजना के अभ्यर्थियों की अस्थाई सूची जारी         राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खल्याणी में जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन         कुल्लू में विद्यालय मृदा स्वास्थय कार्यक्रम पर जागरूकता शिविर का आयोजन         हिमतरु प्रकाशन समिति तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित         निर्वाचन के दृष्टिगत गठित टीमों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित         नवोदय विद्यालय में बताया मिट्टी के परीक्षण का महत्व         निर्वाचन प्रक्रिया के सुचारू निर्वहन में नोडल अधिकारियों की अहम भूमिका: डीसी         9 अप्रैल को आयोजित होंगी लोक अदालतें         31 मार्च 2024 तक निर्धारित लक्ष्य पूरा करें सभी विभाग-सुमित खिमटा         जीत से बड़ा मनोबल, इतिहास बदला : बिंदल         प्लांट एवं मशीनरी में 721.78 करोड़ रुपये का निवेश         राज्यपाल ने किया मातृवन्दना पत्रिका के विशेषांक का विमोचन

राज्यपाल ने बच्चों से किया संवाद

हिम न्यूज शिमला-राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज शिमला के निकट मशोबरा विकास खंड के अन्तर्गत बल्देयां स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का दौरा किया। उन्होंने स्कूल की नौंवीं कक्षा के विद्यार्थियों से संवाद किया।

राज्यपाल ने प्रदेश में नई पहल की है। वह किसी भी सरकारी स्कूल में जाकर विद्यार्थियों से बातचीत करते हैं और उन्हें पुस्तकें भेंट कर पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। गत दिनों उन्होंने सोलन के राजकीय दलीप वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दौरा कर वहां भी नौंवी कक्षा के विद्यार्थियों से संवाद किया था।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर आज प्रातः 11 बजे स्कूल पहुंचे। उन्होंने केवल कक्षा अध्यापक की उपस्थिति में विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों से सामान्य प्रश्न किए, जो उनकी पढ़ाई की आदत से जुड़े थे। 41 विद्यार्थियों की कक्षा में दो-तीन बच्चों को छोड़कर पाठ्य पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकें पढ़ने का शौक न होने पर राज्यपाल ने चिंता जाहिर की।

देश की आजादी और स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के नाम तो विद्यार्थी जानते थे, लेकिन उनकी जीवनी किसी ने नहीं पढ़ी। राज्यपाल ने कहा कि पुस्तकें हमारी दोस्त, चिंतक और मार्गदर्शक होती हैं। उन्होंने कहा कि घर पर अच्छी पुस्तकें रहेंगी तो पढ़ने की आदत बनेगी।

उन्होंने कहा कि अकसर अभिभावक कहते हैं कि उनके बच्चे मोबाईल व टेलीविजन देखते हैं लेकिन कितने अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए अच्छी पुस्तकें लाते हैं। पुस्तकों का चयन भी अभिभावकों को ही करना है। उन्होंने कहा कि समाज की अधिकांश समस्याएं पढ़ाई की आदत न होने से है।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कक्षा के सभी 41 विद्यार्थियों को महापुरूषों की पुस्तकें भेंट की। उन्होंने विद्यार्थियों से आश्वासन लिया कि वे इन पुस्तकों को पढ़ेंगे और इस पर अपनी प्रतिक्रिया के रूप में उन्हें 15 दिनों में पत्र लिखेंगेे।

उन्होंने कहा कि विद्याथियों को पढ़ने के प्रति प्रोत्साहित करने का यह छोटा सा प्रयास है, जिसे वह भविष्य में भी जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूल के पुस्तकालय के माध्यम से भी बच्चों को पढ़ने के लिए पुस्तकें दी जानी चाहिए। इसके उपरान्त, राज्यपाल ने स्कूल के अध्यापकों से भी बातचीत की और स्कूल परिसर में पौधारोपण भी किया।