हिम न्यूज़, हमीरपुर, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता राजिंदर राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग और प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश सरकार के हेलीकॉप्टर को साइकिल समझ लिया है और उसका इस्तेमाल इस प्रकार कर रहे हैं, जैसे कोई व्यक्ति साइकिल पर सवार होकर अपने पड़ोस में आता-जाता हो। राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी हेलीकॉप्टर प्रदेश के प्रशासनिक एवं विकास संबंधी कार्यों के लिए उपलब्ध है या कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों और रैलियों में शामिल होने के लिए।
राजिंदर राणा ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्राओं और सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल ने अनेक गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच मुख्यमंत्री के बार-बार दिल्ली आने-जाने की जानकारी सामने आई है। उनके अनुसार, कुछ अवसरों पर मुख्यमंत्री दिल्ली में राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद शिमला लौटे और फिर दोबारा दिल्ली गए। राणा ने कहा कि सरकार को इन सभी यात्राओं का उद्देश्य, उड़ानों की संख्या, यात्रियों का विवरण और सरकारी खजाने पर आए वास्तविक खर्च की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
राणा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री एक अवसर पर रात लगभग साढ़े नौ बजे दिल्ली से शिमला लौटे, अपने सरकारी निवास ओकओवर में ठहरे और अगले दिन दोपहर से पहले फिर दिल्ली पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह यात्रा दिल्ली में आयोजित एक हाई-टी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए की गई थी। राणा ने कहा कि इस यात्रा पर लगभग 11 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है और यदि यह आंकड़ा सही है तो सरकार को बताना चाहिए कि आखिर किस आधार पर सरकारी संसाधनों का उपयोग किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत हो गई है कि राजनीतिक या सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा सकते हैं।
भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री को सरकारी हेलीकॉप्टर इस्तेमाल करने का अधिकार है और आवश्यक सरकारी कार्यों, प्रशासनिक बैठकों, आपात परिस्थितियों तथा प्रदेश के विकास से जुड़े कार्यों के लिए उसका उपयोग पूरी तरह उचित है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के मंत्रियों से हिमाचल के लिए आर्थिक सहायता मांगते हैं, विकास परियोजनाओं की पैरवी करते हैं या प्रदेशहित के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बैठक करते हैं, तो उस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि सरकारी हेलीकॉप्टर का उपयोग कांग्रेस पार्टी की रैलियों, आंदोलनों और राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए किया गया है, तो सरकार को उसका औचित्य स्पष्ट करना होगा।
राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं और उन्हें अपने पद की गरिमा तथा सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शनों में मुख्यमंत्री की भागीदारी पर भी सवाल उठाए। राणा ने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था के निर्णयों से असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में सरकारी संसाधनों के उपयोग और पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
राजिंदर राणा ने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार लगातार आर्थिक संकट और संसाधनों की कमी का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री की यात्राओं तथा सरकारी सुविधाओं पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के अनेक सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके तीमारदारों को टांके लगाने का सामान, ग्लूकोज की बोतलें और यहां तक कि ग्लव्स जैसी आवश्यक वस्तुएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो सरकार को सबसे पहले स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधारने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राणा ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों की आर्थिक मांगों तथा लंबित देनदारियों को लेकर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को अपने ही सामान्य भविष्य निधि अर्थात जीपीएफ से धन निकालने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दीपावली का त्योहार नजदीक है और अनेक कर्मचारी अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं, घर के निर्माण, मरम्मत तथा अन्य जरूरी कार्यों के लिए अपनी बचत पर निर्भर रहते हैं। ऐसे समय में यदि जीपीएफ निकासी पर प्रतिबंध या प्रशासनिक बाधाएं हैं, तो सरकार को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और कर्मचारियों को राहत प्रदान करनी चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रदेश की अनेक सड़कों की स्थिति चिंताजनक है और जनता सड़क मरम्मत, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा बुनियादी सेवाओं को लेकर लगातार सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्राथमिकता तय करनी होगी कि सीमित संसाधनों का उपयोग जनता की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए किया जाए या अनावश्यक खर्चों पर। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय पर हुए खर्च को लेकर भी सवाल उठाए और मांग की कि सरकार कार्यालयों के नवीनीकरण, सजावट तथा अन्य सुविधाओं पर हुए व्यय का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करे।
राजिंदर राणा ने मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्राओं के दौरान ठहरने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में सरकारी अतिथि गृहों के बजाय महंगे होटलों में ठहरने को लेकर विवाद सामने आए थे। उन्होंने कहा कि सरकार को मुख्यमंत्री एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की यात्राओं, आवास और संबंधित खर्चों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकारी हेलीकॉप्टर, सरकारी आवास, सरकारी वाहन और अन्य सभी सुविधाएं जनता के धन से संचालित होती हैं। इनका उपयोग नियमों के अनुसार और सार्वजनिक हित में होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक मुख्यमंत्री की सभी हेलीकॉप्टर यात्राओं की लॉगबुक, उड़ान का उद्देश्य, प्रत्येक यात्रा का वास्तविक खर्च, यात्रियों की सूची और संबंधित स्वीकृतियों का विवरण सार्वजनिक करे।
राजिंदर राणा ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि राजनीतिक कार्यक्रमों से संबंधित यात्राओं का खर्च किस मद से वहन किया गया और क्या किसी खर्च की प्रतिपूर्ति संबंधित राजनीतिक दल द्वारा की गई है। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाना चाहिए।
भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके टैक्स का पैसा कहां और किस उद्देश्य से खर्च किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार की खर्च संबंधी प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सरकारी खर्चों में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं, कर्मचारी हितों तथा सड़क अधोसंरचना को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राजिंदर राणा ने अंत में कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू को सरकारी हेलीकॉप्टर को व्यक्तिगत या राजनीतिक सुविधा का साधन समझने के बजाय प्रदेशहित के कार्यों तक उसका उपयोग सीमित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर सरकार से जवाब मांगती रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित खर्चों तथा यात्राओं का आधिकारिक रिकॉर्ड भी मांगेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता सरकार के प्रत्येक निर्णय और खर्च पर नजर रख रही है तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सरकार से जवाबदेही की अपेक्षा करती है।