राज्यपाल ने लोगों से घरों में अपनी स्थानीय बोलियां बोलने और युवा पीढ़ी को हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का किया आह्वान

हिम न्यूज़ शिमला। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने गत सांय शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित दो दिवसीय नाट्य महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक जीवनशैली के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने इस महोत्सव में प्रसिद्ध लेखक एस.आर. हरनोट के उपन्यास ‘हिडिंब’ पर आधारित नाटक ‘मुखौटासुर’ का मंचन किया। इस नाटक को रोहड़ू के चंद्रनाहन रंगमंच के कलाकारों ने प्रस्तुत किया।
यह नाटक पर्यावरण, लोक संस्कृति, पहाड़ों और नदियों को बढ़ते व्यावसायिक हितों से बचाने की आवश्यकता का सशक्त संदेश देता है।  

राज्यपाल ने लोगों से घरों में अपनी स्थानीय बोलियां बोलने और युवा पीढ़ी को हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी आह्वान किया  सामाजिक सरोकारों से जुड़े इस नाटक की प्रस्तुति के लिए कलाकारों और निर्देशक कृष भारती की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नाटक केवल माता हिडिंबा की कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि हिमालयी समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों को भी उजागर करता है। नाटक में पर्यावरण का क्षरण, सांस्कृतिक मूल्यों का पतन और युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या को भी उजागर किया गया।

राज्यपाल ने नाटक में हिमाचल के लोकगीतों, स्थानीय बोलियों और पारंपरिक संस्कृति के समावेश की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि ये तत्व नाटक को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। प्रदेश के जंगलों, पहाड़ों और नदियों का संरक्षण करने के साथ-साथ यहां की पारंपरिक बोलियों, लोक परंपराओं, त्योहारों और लोक वाद्ययंत्रों को संरक्षित करना भी आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘विकास भी, विरासत भी’ का संदेश विकास के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखने के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने के साथ-साथ इसे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने घरों में स्थानीय बोलियों का प्रयोग करें, पारंपरिक त्योहारों को गर्व के साथ मनाएं और युवा पीढ़ी को हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयत्न करें। उन्होंने जंगलों, नदियों और पहाड़ों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने तथा युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का भी आह्वान किया।

राज्यपाल ने एस.आर. हरनोट के उपन्यास ‘हिडिंब’ के प्रति बढ़ती शैक्षणिक रुचि की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास को हिमाचल प्रदेश से बाहर भी पहचान मिली है और देश-विदेश के विश्वविद्यालयों में इस पर शोध कार्य किए जा रहे हैं। राज्यपाल ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए चंद्रनाहन रंगमंच, नाटक के समस्त कलाकारों एवं तकनीकी दल तथा हिमालयन लिटरेचर, कल्चर एंड एनवायरनमेंट फोरम, शिमला को बधाई दी और पूरी टीम के उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर सफलता की कामना की।