हिम न्यूज़, शिमला । भाजपा प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता एवं नेता राकेश जामवाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर अनाथ और विधवा सेस के फैसले पर कड़ा प्रहार करती है, उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार की आर्थिक नीति का एक ही मूल मंत्र दिखाई दे रहा है- टैक्स बढ़ाओ, सेस लगाओ और जनता पर दबाव डालो।
राकेश जामवाल ने कहा कि जनवरी 2023 के कुछ ही समय बाद कांग्रेस सरकार ने डीजल पर वैट का बोझ लगभग ₹4.40 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹7.40 प्रति लीटर कर दिया था। यानी लगभग ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी। इसके केवल छह महीने बाद जुलाई 2023 में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स वैट में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि करते हुए इसे ₹7.40 से बढ़ाकर ₹10.40 प्रति लीटर कर दिया। इस प्रकार वर्ष 2023 में ही कांग्रेस सरकार ने दो स्टेज में डीजल पर लगभग ₹6 प्रति लीटर अतिरिक्त वैट डाला।
अब सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए 11 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि से पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल दोनों पर 60 पैसे प्रति लीटर नया अनाथ और विधवा सेस लागू किया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान विधानसभा में वैट संशोधन कानून सरकार को इस मद में अधिकतम ₹5 प्रति लीटर तक सेस की शक्ति मिलती है, हालांकि अधिसूचना में इसकी दर 60 पैसे प्रति लीटर निर्धारित की गई है। इससे संबंधित जनता पर अतिरिक्त आर्थिक लोड लगाया गया है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि सरकार की कर वृद्धि की नीति केवल डुप्लिकेट तक सीमित नहीं है। कांग्रेस सरकार ने निर्धारित पर लीची वाले अतिरिक्त माल कर को ₹11 से बढ़ाकर ₹16 प्रति बैग कर दिया था, यानी एक ही संकेत में ₹5 प्रति डेडिकेटेड बैग का अतिरिक्त बोझ।
उन्होंने कहा कि यह बात अलग है कि एक तरफ केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में राहत के बाद महंगाई दर कम होने की उम्मीद बनी हुई है, वहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने अपने लाभ हिमाचल की जनता तक पहुंच से राज्य स्तर का कर छूट का काम किया है।
राकेश जामवाल ने कहा, “जनवरी 2023 में डीजल करीब ₹3 प्रति लीटर वैट स्केल, जुलाई 2023 में फिर ₹3 प्रति लीटर पेट्रोल, टैक्स ₹11 से ₹16 प्रति बैग कर दिया और अब पेट्रोल-डीजल गठबंधन पर 60 पैसे प्रति लीटर वैट सेस लगा। नई हिमाचल की जनता पर कांग्रेस सरकार और कितना आर्थिक बोझ डालेगी?”
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की तरह पहाड़ी प्रदेश में भी डीजल की कीमत बढ़ने का प्रभाव केवल गाड़ी वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता है। प्रदेश में लगभग हर आवश्यक वस्तु सड़क मार्ग से चुनी जाती है। इसलिए किला महंगा होने से महंगाई, सरिया, रेत-बजरी, फल-सब्जी, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान किसान-बागवान, पैदल यात्री, ड्राइवर चालक, छोटे व्यापारी, मध्यम वर्ग और मकान बनाने वाले सामान्य परिवारों को हुआ है। पहले ₹5 प्रति बैग पर अतिरिक्त टैक्स और अब नए सेस पर मेरे पास वाले पार्टिकल्स के मॉडल हैं—यह आम आदमी पर द्वीप है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि अनाथ बच्चों और विधवाओं का कल्याण सरकार की जिम्मेदारी है और भाजपा ऐसे प्रत्येक छात्र प्रयास का समर्थन करती है, लेकिन इसके लिए संसाधन सरकार को बेहतर वित्तीय प्रबंधन और अपने बजट से उपलब्ध बजट बनाना चाहिए। अनाथ और विधवा कल्याण जैसे संदेश विषय के नाम पर पूरे प्रदेश की जनता पर नई सेस लगाने वाली सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस इसे ‘सुख की सरकार’ कहती है, लेकिन वास्तविकता में ‘बोझ की सरकार’ बनी हुई है। जनता को यह राहत देने के बदले कभी वैट, कभी सेस, कभी बिजली-पानी की आपूर्ति और कभी अन्य शुल्क अनुदान उसकी जेब पर लगातार हमला किया जा रहा है।”
राकेश जामवाल ने सरकार से पेट्रोल और डीजल प्लांट 60 पैसे प्रति लीटर नए सेस पर खरीदने की मांग करते हुए कहा कि सरकार अपने खर्चों और वित्तीय प्रबंधन में सुधार करे और हिमाचल की जनता की जेब में हर आर्थिक समस्या का समाधान करे।
उन्होंने कहा, “दो बार डीजल वैट में ₹3-₹3 की छूट, रियायती पर ₹5 प्रति बैग अतिरिक्त टैक्स और अब पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे का नया सेस- ये आंकड़े स्वयं बता रहे हैं कि कांग्रेस सरकार का मॉडल आर्थिक राहत का नहीं, जनता पर लगातार दबाव बढ़ाने का मॉडल है।”