हिमाचल ऑन सेल” की नीति पर चल रही सुक्खू सरकार – राकेश जम्वाल

हिम न्यूज़ मंडी। भाजपा विधायक एवं मुख्य प्रवक्ता राकेश जम्वाल ने शिमला के समीप स्थित विश्व प्रसिद्ध वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल को 30 वर्षों की लीज पर देने के प्रदेश सरकार के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाया है। उन्होंने सुक्खू सरकार से पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़कर इस प्रतिष्ठित संपत्ति पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करने के बाद अब इसे निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

जम्वाल ने कहा कि प्रदेश सरकार स्पष्ट करे कि आखिर किस विशेष व्यक्ति या किस चहेते को लाभ पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब अब इस संपत्ति पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण है तो इसे स्वयं संचालित करने के बजाय निजी कंपनी को सौंपने की आवश्यकता क्यों पड़ गई? यदि 30 वर्षों जैसी लंबी अवधि के लिए यह होटल लीज पर चला गया तो भविष्य में किसी भी सरकार को इसे वापस लेने के लिए फिर लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। क्या सरकार ने इस पहलू पर विचार किया है?

राकेश जम्वाल ने कहा कि यदि सरकार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक होटलों का संचालन भी नहीं कर सकती तो फिर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम का अस्तित्व ही खतरे में है। साथ ही कहा कि इस निगम का औचित्य क्या रह जाता है। क्या निगम केवल सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का माध्यम बनकर रह जाएगा?

उन्होंने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश में पर्यटन अपने स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है। प्रदेश के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पुलिस प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार प्रतिदिन हजारों वाहन प्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं। होटल, होमस्टे और पर्यटन गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में यदि हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम घाटे से नहीं उबर पा रहा है, तो यह सरकार की कार्यप्रणाली और निगम के प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार पहले यह बताए कि रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक आने के बावजूद पर्यटन निगम घाटे में क्यों है? क्या इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी या फिर अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए लाभकारी सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है?

राकेश जम्वाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कभी दावा करते हैं कि प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से मजबूत है और व्यवस्था पटरी पर आ गई है, तो कभी आर्थिक संकट का हवाला देकर सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने जैसे निर्णयों को उचित ठहराते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री से सवाल है कि आखिर प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है? मुख्यमंत्री जनता के सामने सही स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार लाभ में है तो सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है और यदि घाटे में है तो पहले किए गए दावे किस आधार पर किए गए थे?

भाजपा नेता ने कहा कि कुछ समय पहले राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रघुवीर सिंह बाली ने स्वयं कहा था कि पर्यटन निगम के सभी संस्थान लाभ में चल रहे हैं। जब विपक्ष ने आठ होटलों की नीलामी और लीज प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, तब उन्होंने दावा किया था कि निगम के होटल मुनाफे में हैं। यदि होटल वास्तव में लाभ में हैं तो फिर उन्हें निजी हाथों में देने की इतनी जल्दबाजी क्यों है? सरकार और पर्यटन निगम के अध्यक्ष इस विरोधाभास का जवाब दें।

लाभकारी पर्यटन होटलों को जानबूझकर घाटे का हवाला देकर अपने चहेतों को सौंपने की तैयारी कर रही सुक्खू सरकार

राकेश जम्वाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार प्रदेश के प्रसिद्ध और लाभकारी पर्यटन होटलों को जानबूझकर घाटे का हवाला देकर अपने चहेतों को सौंपने की तैयारी कर रही है। यह प्रदेश की जनता की संपत्ति है और इसे किसी भी कीमत पर निजी हितों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। जम्वाल ने कहा कि सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि एक ओर सरकार पर्यटन निगम के मौजूदा होटलों को लीज पर देने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री और पर्यटन निगम के अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में पर्यटन निगम के नए बड़े-बड़े होटल बनाने की घोषणाएं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब सरकार पुराने होटल नहीं चला सकती, तो नए होटल किस उद्देश्य से बनाए जा रहे हैं? क्या यह केवल ठेकेदार मित्रों को लाभ पहुंचाने का माध्यम है या फिर प्रदेश की जनता के पैसे से नए सफेद हाथी खड़े किए जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि वाइल्ड फ्लावर हॉल केवल एक होटल नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन पहचान का प्रतीक है। सरकार को इस पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी चाहिए तथा यह सार्वजनिक करना चाहिए कि 30 वर्षों की लीज का आधार क्या है और इससे प्रदेश को वास्तविक लाभ क्या होगा।

राकेश जम्वाल ने कहा कि भाजपा इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है। यदि प्रदेश की बहुमूल्य सरकारी संपत्तियों को चहेतों के हित में सौंपने का प्रयास किया गया तो भारतीय जनता पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इसका पुरजोर विरोध करेगी। हिमाचल की जनता की संपत्ति किसी भी कीमत पर निजी हितों की भेंट नहीं चढ़ने दी जाएगी।