हिम न्यूज़, शिमला :भारतीय जनता पार्टी के नेता चेतन सिंह बरागटा ने आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार बागवानों की समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है। प्रदेश का बागवान आज उत्पादन में गिरावट, बढ़ती लागत, कृषि सामग्री की कमी और लंबित भुगतानों जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सरकार केवल नई-नई गाइडलाइन जारी कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।
चेतन बरागटा ने कहा कि एंटी हेलनेट सब्सिडी का लाभ बागवानों तक नहीं पहुंच रहा है, जबकि पूर्व भाजपा सरकार के समय मात्र 20 प्रतिशत अंशदान पर यह सुविधा आसानी से उपलब्ध थी। केंद्र सरकार द्वारा बागवानों की सब्सिडी की राशि प्रदेश को जारी की जा चुकी है, लेकिन कांग्रेस सरकार उसे समय पर बागवानों तक पहुंचाने में विफल रही है। यदि केंद्र से धनराशि प्राप्त हो चुकी है, तो प्रदेश सरकार स्पष्ट करे कि वह राशि आज तक बागवानों को क्यों नहीं दी गई।
चेतन ने कहा कि पीपी सेंटरों में फफूंदनाशक और कीटनाशक जैसी आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। एचपीएमसी खाद, स्प्रे ऑयल और अन्य कृषि सामग्री समय पर उपलब्ध करवाने में विफल रहा, जिसके कारण पहली बार बागवानों को रात 2 बजे से कतारों में खड़ा होना पड़ा।
भाजपा ने यह भी कहा कि एमआईएस के तहत खरीदी गई सेब बोरियों का भुगतान आज तक लंबित है। वहीं कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हजारों बोरियां सेब सड़कों पर सड़ गईं, जिससे बागवानों और एचपीएमसी दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
चेतन ने कहा कि कांग्रेस नेता बार-बार एफटीए (FTA) का मुद्दा उठाकर केंद्र सरकार को घेरने की बात करते हैं, जबकि उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि संघीय व्यवस्था में प्रदेश सरकार की अपनी जिम्मेदारियां क्या हैं और उन्हें निभाने में वह क्यों असफल रही है। बागवानों की समस्याओं का समाधान करना, समय पर सब्सिडी और भुगतान देना तथा आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध करवाना प्रदेश सरकार का दायित्व है।
चेतन बरागटा ने विश्वास व्यक्त किया कि एफटीए के माध्यम से यदि कोई सेब भारत में आता भी है, तो देश के किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। प्रदेश सरकार स्पष्ट करे कि वह वास्तव में बागवानों के साथ खड़ी है या केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है।
चेतन बरागटा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि लंबित भुगतान तुरंत जारी किए जाएं, कृषि सामग्री की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, एंटी हेलनेट सब्सिडी को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तथा बागवानों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस, पारदर्शी और व्यावहारिक नीति अपनाई जाए।