हिम न्यूज़। WhatsApp, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सर्विसेज़ देने में सबसे आगे है। इससे किसी भी तरह की जानकारी के गलत इस्तेमाल को रोकने और ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। WhatsApp के लिए यूज़र्स की सुरक्षा सबसे अहम है।
WhatsApp में सुरक्षा और प्राइवेसी बढ़ाने के लिए हमने कई ज़रूरी बदलाव किए हैं। WhatsApp को लगातार बेहतर बनाने के साथ ही, यूज़र्स की सुरक्षा के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंटिस्ट और एक्सपर्ट्स की भी मदद ली है।
WhatsApp पर प्राइवेसी से जुड़ी जानकारी
यूज़र्स की प्राइवेसी और सुरक्षा हमारे लिए सबसे बढ़कर है, इसलिए  2016 से ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फ़ीचर इस्तेमाल कर रहे हैं। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से आपके मैसेजेस, फ़ोटो, वीडियो, वॉइस मैसेजेस, डॉक्यूमेंट्स, स्टेटस और कॉल्स सुरक्षित रहते हैं और कोई भी इनका गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता।
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की मदद से आपके मैसेजेस और कॉल्स, सिर्फ़ आपके और उन लोगों के बीच रहते हैं जिनसे आप चैट करते हैं। कोई भी दूसरा व्यक्ति उन्हें पढ़ या सुन नहीं सकता, WhatsApp भी नहीं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन ऑन होने से आपके मैसेजेस पर डिजिटल लॉक लग जाता है और उस लॉक को खोलने की डिजिटल चाबी सिर्फ़ आपके और उन्हीं के पास होती है जिन्हें मैसेज मिला है। यह सब ऑटोमैटिकली होता है। अपने मैसेज सुरक्षित रखने के लिए आपको कोई स्पेशल सेटिंग ऑन करने की ज़रूरत नहीं होती।

आपकी ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े फ़ीचर्स के बारे में जानकारी

टू-स्टेप वेरिफ़िकेशन:
  • सुझाव है कि यूज़र्स अपना WhatsApp अकाउंट और ज़्यादा सुरक्षित बनाने के लिए टू-स्टेप वेरिफ़िकेशन फ़ीचर ऑन कर लें। इसे ऑन करने के लिए 6 अंकों का पिन डालना ज़रूरी होता है।अगर आपका SIM कार्ड चोरी हो जाता है या कोई आपके फ़ोन का गलत इस्तेमाल करता है, तो आप 6 अंकों का यह पिन डालकर अपना WhatsApp अकाउंट रीसेट या वेरिफ़ाई कर सकते हैं.
  • Touch ID या Face ID की मदद से WhatsApp लॉक करें: WhatsApp अपने यूज़र्स को अपना अकाउंट और ज़्यादा सुरक्षित बनाने की सुविधा देता है. इसके लिए iPhone यूज़र्स Touch ID और Face ID और Android यूज़र्स फ़िंगरप्रिंट लॉक इस्तेमाल कर सकते हैं.

मैसेज फ़ॉरवर्ड करने पर लिमिट:

  • WhatsApp ने मैसेज फ़ॉरवर्ड करने पर लिमिट लगा दी है। WhatsApp उन मैसेजिंग सर्विसेज़ में से एक है जिसने मैसेज शेयर करने पर लिमिट लगाई है। इस तरह के लेबल से यूज़र्स को फ़ॉरवर्ड किए गए मैसेजेस को पहचानने और यह जानने में मदद मिलती है कि वे किसी मैसेज को कितनी बार फ़ॉरवर्ड कर सकते हैं। आप पहले से फ़ॉरवर्ड किए गए मैसेज को पाँच चैट्स में ही भेज सकते हैं। जिन मैसेजेस पर “कई बार फ़ॉरवर्ड किया गया” का लेबल लगा होता है उन्हें एक बार में सिर्फ़ एक चैट पर ही फ़ॉरवर्ड किया जा सकता है। ग्रुप में मैसेज फ़ॉरवर्ड करने की नई लिमिट लगाई है।जिन मैसेजेस पर “कई बार फ़ॉरवर्ड किया गया” लेबल लगा होता है उन्हें अब एक बार में पाँच ग्रुप्स के बजाय सिर्फ़ एक ग्रुप में ही फ़ॉरवर्ड किया जा सकेगा

ऑनलाइन मौजूदगी को कंट्रोल करें:

  • अपनी ऑनलाइन मौजूदगी को प्राइवेट रखने के लिए यूज़र्स यह चुन सकते हैं कि उन्हें कौन ऑनलाइन देख सकता है और कौन नहीं।

ब्लॉक करके रिपोर्ट करें:

अगर WhatsApp पर यूज़र्स को किसी मैसेज से समस्या हो रही है, तो वे आसानी से अकाउंट ब्लॉक करके उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं। यह तरीका आमतौर पर किए जाने वाले SMS से अलग है। Whats App के अनुसार यूज़र्स उन्हें ऐसे कॉन्टैक्ट्स के बारे में बताएँ जिनसे किसी तरह की समस्या हो सकती है। साथ ही, यूज़र्स रिपोर्ट किए गए मैसेजेस को अपने फ़ोन में रख सकते हैं, ताकि अगर वे चाहें तो उन मैसेजेस को फ़ैक्ट चेकर्स या कानून प्रवर्तन अधिकारियों से शेयर कर सकें।

यूज़र्स अब इस तरह के मैसेजेस को फ़्लैग करके उन अकाउंट्स की रिपोर्ट WhatsApp को भेज सकते हैं जिनसे समस्या हो सकती है। मैसेज पर टैप करके दबाए रखने से किसी यूज़र की रिपोर्ट की जा सकती है या उसे ब्लॉक किया जा सकता है।

गायब होने वाले मैसेज:

यूज़र्स के लिए ‘गायब होने वाले मैसेज’ फ़ीचर लॉन्च किया है, जिससे WhatsApp पर भेजे गए मैसेजेस गायब हो जाते हैं। ‘गायब होने वाले मैसेज’ मोड को ऑन करने पर चैट या ग्रुप चैट में भेजे गए मैसेजेस 24 घंटे, 7 या 90 दिन बाद गायब हो जाते हैं। यूज़र्स यह चुन सकते हैं कि मैसेजेस कितने समय बाद गायब हों।

यूज़र्स की प्राइवेसी को और ज़्यादा सुरक्षित बनाने के लिए WhatsApp ने ‘एक बार देखें‘ – मोड लॉन्च किया है। इसकी मदद से, फ़ोटो और वीडियो एक बार देखने के बाद गायब हो जाते हैं। ‘एक बार देखे जा सकने वाले मैसेजेस’ को और ज़्यादा सुरक्षित बनाने के लिए स्क्रीनशॉट न ले पाने का फ़ीचर लॉन्च किया है

ग्रुप की प्राइवेसी सेटिंग्स:

WhatsApp की प्राइवेसी सेटिंग्स और ग्रुप आमंत्रण सिस्टम की मदद से यूज़र्स यह चुन सकते हैं कि उन्हें ग्रुप में कौन शामिल कर सकता है। यह फ़ीचर, यूज़र की प्राइवेसी को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखता है।साथ ही, इससे उन्हें उनकी मर्ज़ी के बिना किसी ग्रुप में शामिल नहीं किया जा सकता।

अन्य सदस्यों को बताए बिना ग्रुप छोड़ें:

यूज़र्स जब चाहें ग्रुप छोड़ सकते हैं, इस बारे में किसी भी सदस्य को नोटिफ़िकेशन नहीं भेजा जाएगा। आपके ग्रुप छोड़ने का नोटिफ़िकेशन सिर्फ़ एडमिन को मिलेगा।
एडमिन कंट्रोल: WhatsApp ग्रुप्स की सेटिंग्स में कई तरह के बदलाव किए हैं, जिनसे ग्रुप्स और बेहतर तरीके से मैनेज किए जा सकते हैं। एक ऐसी सेटिंग लॉन्च की है, जिससे एडमिन यह चुन सकते हैं कि किसी ग्रुप में कौन मैसेज भेज सकता है और कौन नहीं।

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड बैकअप:

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की मदद से यूज़र्स iCloud या Google Drive पर लिए गए बैकअप को WhatsApp चैट्स जितना सुरक्षित बना सकते हैं। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड बैकअप ऑन करने पर आपके मैसेजेस और मीडिया क्लाउड पर सेव हो जाते हैं, जो पासवर्ड या 64 अंकों वाली एन्क्रिप्शन कुंजी से सुरक्षित रहते हैं।

भारत में WhatsApp का गलत इस्तेमाल रोकने के बारे में जानकारी

WhatsApp अपने प्लेटफ़ॉर्म पर भेजे जाने वाले पर्सनल मैसेजेस नहीं देख सकता। WhatsApp के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए, अकाउंट्स पर होने वाली एक्टिविटीज़ और बिना एन्क्रिप्शन वाली जानकारी, जैसे कि यूज़र द्वारा की गई रिपोर्ट्स, प्रोफ़ाइल फ़ोटो, ग्रुप फ़ोटो और विवरण की मदद लेते हैं। अपने यूज़र्स को सुरक्षित रखने के लिए कई सुरक्षा उपाय और प्रोसेस अपनाए हैं।
संदेहजनक एक्टिविटीज़ करने वाले अकाउंट्स को पहचानने और उन पर कार्रवाई करने के लिए स्पैम डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं, ताकि स्पैम को रोका जा सके।  खासतौर पर भारत में WhatsApp के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।
शिकायत अधिकारी:  भारत में रहने वाले एक शिकायत अधिकारीको नियुक्त किया है, ताकि अगर यूज़र WhatsApp इस्तेमाल करने से जुड़ी कोई शिकायत करना चाहते हैं और वे किसी दूसरे चैनल के ज़रिए इसकी रिपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं, तो वे सीधे इनसे संपर्क कर सकते हैं।
यूज़र्स की सुरक्षा के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार किया जा रहा है। साथ ही, सरकार और कानून प्रवर्तन अधिकारियों को एक अनुरोध चैनल उपलब्ध कराते हैं, ताकि वे यहाँ जाकर आसानी से अनुरोध कर सकें और तुरंत उनकी मदद कि जा सके।

मासिक रिपोर्ट्स:

आईटी नियम 2021 का पालन करते हुए, WhatsApp भारत में नियमित तौर पर मासिक रिपोर्ट रिलीज़ करता है। इसमें बताया जाता है कि WhatsApp इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स की सुरक्षा के लिए हमने क्या कदम उठाए हैं। रिपोर्ट में, यूज़र्स की शिकायतों और WhatsApp की तरफ़ से की गई कार्रवाई से जुड़ी जानकारी दी जाती है। साथ ही, इस प्लेटफ़ॉर्म का गलत इस्तेमाल करने से रोकने के लिए WhatsApp के नियमों के बारे में भी बताया जाता है।
भारत में WhatsApp के सुरक्षा उपायों की मासिक रिपोर्ट्स यहाँ देख सकते हैं।
WhatsApp बच्चों के यौन शोषण (CSAM) और किसी भी अन्य यौन शोषण से संबंधित कंटेंट शेयर करने के सख्त खिलाफ़ है। इस तरह के कंटेंट का पता लगाने के लिए WhatsApp ऐसी जानकारी की मदद लेता है जो एन्क्रिप्टेड नहीं है, जिसमें यूज़र्स द्वारा की गई रिपोर्ट्स भी शामिल हैं। इससे बुरे बर्ताव वाले कंटेंट का पता लगाने और उसे रोकने में मदद मिलती है। साथ ही, बच्चों के यौन शोषण और उनके साथ बुरा बर्ताव दिखाने वाले कंटेंट का पता लगाने की तकनीक में लगातार सुधार किया जा रहा है।  नियमों और शर्तों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट और अकाउंट्स की रिपोर्ट नेशनल सेंटर फ़ॉर मिसिंग ऐंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) को दी जाती है। यह संगठन ऐसी जानकारी (CyberTips) दुनियाभर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और भारत में खासतौर पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (“NCRB”) को देता है।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम करने का  WhatsApp का तरीका

WhatsApp, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार काम करता है। साथ ही, ऐप में
लागू होने वाले सभी कानूनों और पॉलिसी के आधार पर किए जाने वाले अनुरोधों की सावधानीपूर्वक जाँच की जाती है। भारत सरकार के सहयोग से कानून प्रवर्तन एजेंसियों को WhatsApp का सही तरीके से इस्तेमाल करने के बारे में ट्रेनिंग दी है। इसमें उन्हें बताया गया है कि WhatsApp पर लोगों के मैसेजेस का जवाब कैसे दें और किसी अपराध की जाँच करने के लिए WhatsApp से कानूनी अनुरोध कैसे करें।

इस प्रोसेस के बारे में ज़्यादा जानने के लिए यह लेख पढ़ें.

गलत जानकारी की पहचान करना
WhatsApp का मानना है कि गलत जानकारी देना व्यावहारिक और सामाजिक समस्या है। इस समस्या को हल करने के लिए हम अपने प्रोडक्ट में नए फ़ीचर्स जोड़ते हैं और यूज़र्स को उनके बारे में बताते हैं, ताकि वे इनका इस्तेमाल करके जानकारी वेरिफ़ाई कर सकें।

WhatsApp में ही फ़ैक्ट चेकिंग:

भारत में अभी (अप्रैल, 2023 तक) 10 फ़ैक्ट चेकिंग संस्थाएँ हैं, जो यूज़र्स को WhatsApp बॉट की मदद से जानकारी वेरिफ़ाई करने की सुविधा देती है। ये संस्थाएँ, WhatsApp API-प्लेटफ़ॉर्म सॉल्यूशन के साथ मिलकर काम करती हैं और इन्हें अंतर्राष्ट्रीय फ़ैक्ट-चेकिंग नेटवर्क की मान्यता प्राप्त है।
आई.एफ़.सी.एन (IFCN) बॉट एक मुफ़्त सर्विस है।यूज़र्स +1 (727) 2912606 को कॉन्टैक्ट नंबर के तौर पर सेव कर सकते हैं और उस पर ”नमस्ते” लिखकर भेज सकते हैं, ताकि आपको एक मैसेज मिल सके या जानकारी वेरिफ़ाई हो सके। इसके अलावा, हमारे यूज़र्स http://poy.nu/ifcnbot पर क्लिक करके फ़ैक्ट चेकिंग संस्थाओं की ग्लोबल डायरेक्ट्री ऐक्सेस कर सकते हैं।

जागरूकता कैंपेन:

व्हाट्सप्प के अनुसार यूज़र्स उन्हें मिलने वाले मैसेजेस के बारे में सोचें और भरोसेमंद ऑफ़िशियल सोर्स से फ़ैक्ट्स वेरिफ़ाई करें। WhatsApp ने कई देशों में बड़े स्तर पर जागरूकता कैंपेन शरू किए हैं, ताकि गलत जानकारी की पहचान की जा सके। WhatsApp का कैंपेन ‘खुशियाँ बाँटिए, अफ़वाहें नहीं’ इसी मुहिम का हिस्सा है। कई सालों तक चलने वाले इस कैंपेन के तहत दूसरा कैंपेन शुरू किया है, जिसका नाम है – ‘चेक करें फिर शेयर करें’। इसमें यूज़र्स को बताते हैं कि वे मैसेज फ़ॉरवर्ड करने से पहले उससे जुड़े फ़ैक्ट्स को अच्छी तरह चेक कर लें।

सुरक्षित तरीके से चुनाव कराने में मदद करना:

स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए, WhatsApp ने स्वैच्छिक आचार संहिता का पालन करने के उद्देश्य से इंडस्ट्री इनिशिएटिव के तौर पर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के साथ मिलकर हाई प्रायोरिटी चैनल तैयार किया। WhatsApp, भारतीय चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करता है और उन्हें चुनाव से जुड़े अपडेट देता है। साथ ही, इस बात पर भी चर्चा करता है कि साथ मिलकर बेहतर तरीके से काम कैसे किया जाए।
इसके अलावा, चुनावों से पहले राजनीतिक पार्टियों को WhatsApp का सही तरीके से इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी दी जाती है। इस ट्रेनिंग में पार्टी के कार्यकर्ताओं को बताया जाता है कि अगर वे यूज़र्स की अनुमति के बिना उन्हें WhatsApp पर मैसेज भेजते हैं, तो उनका अकाउंट बैन किया जा सकता है।

साइबर सिक्युरिटी और सुरक्षा के बेहतर तरीकों की बारे में जानकारी

वेरिफ़िकेशन कोड शेयर करना: WhatsApp का सुझाव है कि अपनी प्राइवेसी सुरक्षित रखने के लिए किसी भी अनजान थर्ड पार्टी के साथ वेरिफ़िकेशन कोड शेयर न करें। उदाहरण के लिए, अगर यूज़र्स को SMS या किसी और तरीके से इनाम या खास ऑफ़र के बदले वेरिफ़िकेशन कोड शेयर करने का मैसेज मिलता है, तो ध्यान रखें कि यह मैसेज धोखाधड़ी वाला हो सकता है। साथ ही, इससे आपके अकाउंट का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे कि आपकी पहचान चुराई जा सकती है या किसी धोखाधड़ी के ज़रिए आपको नुकसान पहुँचाया जा सकता है।

कोई अन्य व्यक्ति होने का दिखावा करना:

अगर धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति किसी यूज़र का अकाउंट ऐक्सेस कर लेता है, तो वह उसका गलत इस्तेमाल कर सकता है, जैसे कि यूज़र की प्रोफ़ाइल फ़ोटो का गलत इस्तेमाल करना, उनके कॉन्टैक्ट्स को मैसेज भेजना या पैसों का अनुरोध करना। साथ ही, यूज़र के कॉन्टैक्ट्स का ऐक्सेस मिलने पर धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति, यूज़र की जानकारी का इस्तेमाल करके कॉन्टैक्ट्स को मैसेज भेज सकता है और कोई जानकारी या मदद पाने के लिए अनुरोध कर सकता है।
WhatsApp का सुझाव है कि किसी संवेदनशील जानकारी, पैसे या किसी अन्य सहायता का अनुरोध करने वाले मैसेज की जाँच करें या उन्हें अनदेखा कर दें। भले ही, उन मैसेजेस को देखकर ऐसा लगे कि उन्हें आपके किसी कॉन्टैक्ट ने भेजा है। इस तरह के मामलों में मैसेज वेरिफ़ाई करना ज़रूरी है, भले ही वह मैसेज आपके पहचान वाले किसी कॉन्टैक्ट ने ही क्यों न भेजा हो। उदाहरण के लिए, कॉन्टैक्ट को कॉल करके पूछें कि क्या यह मैसेज उन्होंने ही भेजा है? टू-स्टेप वेरिफ़िकेशन एक्टिवेट करके आप अपने अकाउंट को फ़िशिंग और धोखाधड़ी से बचा सकते हैं।

अन्य धोखाधड़ी:

यूज़र्स को किसी ऐप पर ऐसे मैसेज मिल सकते हैं, जिनमें नौकरी के ऑफ़र, जल्दी पैसा कमाने से जुड़ी स्कीम या अन्य लुभावने ऑफ़र दिए गए हों। इस तरह के मैसेज मिलने पर उन्हें अच्छी तरह से चेक कर लें क्योंकि ये धोखाधड़ी वाले मैसेज भी हो सकते हैं। इस तरह के मैसेज भेजने वालों से बात न करें और उन्हें ब्लॉक करके उनकी रिपोर्ट करें।
यूज़र्स के लिए ज़रूरी जानकारी
चैट स्टोरेज:
  • WhatsApp पर मैसेज भेजने और पाने वाले के बीच की बातचीत को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी की मदद से प्राइवेट रखा जाता है। इन मैसेजेस को WhatsApp और थर्ड पार्टीज़ भी नहीं पढ़ सकतीं।
  • मैसेज डिलीवर किए जाने के बाद, WhatsApp उन मैसेजेस को या उनके ट्रांज़ेक्शन लॉग्स को स्टोर नहीं करता। जो मैसेज डिलीवर नहीं हो पाते, उन्हें हमारे सर्वर से 30 दिन बाद डिलीट कर दिया जाता है।
  • अगर किसी यूज़र के डिवाइस में डिफ़ॉल्ट स्टोरेज का ऑप्शन होता है, तो मैसेज मिलने पर यूज़र का डेटा ऑटोमैटिकली सेव हो सकता है।
  • WhatsApp का सुझाव है कि यूज़र्स अपने डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) में मौजूद सभी सुरक्षा फ़ीचर्स इस्तेमाल करें, जैसे कि मजबूत पासवर्ड बनाएँ या अन्य सुरक्षा फ़ीचर्स की मदद से धोखाधड़ी करने वाले ऐसे व्यक्ति से बचें जो आपके डिवाइस पर मौजूद कंटेंट ऐक्सेस करना चाहता हो।
  • हो सकता है कि यूज़र्स अपने डेटा का बैकअप लेने के लिए थर्ड-पार्टी, जैसे कि iCloud या Google डिस्क की सर्विसेज़ लेते हों। इससे यूज़र्स के SMS, ईमेल या मैसेजेस वगैरह सेव हो जाते हैं। यूज़र्स को इन सर्विसेज़ का इस्तेमाल करने के लिए थर्ड पार्टी की शर्तें और प्राइवेसी पॉलिसी स्वीकार करनी पड़ती हैं। इन सर्विसेज़ में थर्ड पार्टी द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले ऐप्स और प्रोडक्ट्स शामिल हो सकते हैं।
  • ऐसे में, किसी यूज़र को ऐसी स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है, जब उन्हें थर्ड पार्टीज़ को अपने डिवाइस का ऐक्सेस देना पड़े। ऐसा करने पर, यूज़र के डेटा का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, चैट्स देखना या उनका स्क्रीनशॉट लेना, कॉल्स सुनना या उनकी रिकॉर्डिंग करना।

चैट्स ट्रेस करना:

कुछ लोगों का मानना है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होने के बावजूद WhatsApp, मैसेज भेजने वाले की पहचान कर सकता है, ऐसा संभव नहीं है।
चैट्स “ट्रेस” करने के लिए मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करना बिल्कुल वैसा ही है जैसे WhatsApp पर भेजे गए हर मैसेज की एक कॉपी सेव करना। इससे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं रहेगा और WhatsApp पर यूज़र्स की पर्सनल बातचीत की प्राइवेसी बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

चैट्स ट्रेस करने से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर किस तरह असर पड़ता है, इस बारे में जानने के लिए यह लेख पढ़ें.

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर WhatsApp किसी मैसेज पर फ़ॉरवर्ड करने की लिमिट लगाता है, तो WhatsApp को उस मैसेज के कंटेंट और मैसेज भेजने वाले के बारे में पता होता है, यह सच नहीं है।
मैसेज कितनी बार फ़ॉरवर्ड किया गया है, यह जानकारी WhatsApp के सर्वर पर नहीं,बल्कि यूज़र के डिवाइस पर दिखती है जो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित होती है। इसे सिर्फ़ मैसेज भेजने वाले या पाने वाले के डिवाइस पर देखा जा सकता है।