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कान्स फिल्म समारोह में प्रदर्शित होगी रॉकेट्री,गोदावरी,अल्फा बीटा गामा

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज कान्स फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की सूची जारी की है। सूची में रॉकेट्री का विश्व प्रीमियर भी शामिल हैजिसमें  आर माधवन ने मुख्य भूमिका निभायी है तथा इसका निर्देशन भी माधवन ने किया है। रॉकेट्री-द नांबी इफेक्ट का प्रीमियर जहां पलाइस के में होगा वहीं बाकी फिल्मों का प्रदर्शन ओलम्पिया थिएटर में किया जाएगा। 75वें फिल्म समारोह में प्रदर्शित होने वाली फिल्में निम्न हैं:
फिल्में निम्न हैं:

1.रॉकेट्री – द नांबी इफेक्ट

सारांश

रॉकेट्री- द नांबी इफेक्ट फिल्म में श्री नांबी नारायणन के जीवन की कहानी को चित्रित किया गया है, जिसे एक टीवी कार्यक्रम में लोकप्रिय सुपरस्टार और बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने एक साक्षात्कार में दर्शकों के सामने रखा था। कई महान व्यक्तियों की तरह, नांबी में भी कुछ कमियां हैं।

अपनी प्रतिभा और जुनून के कारण उन्हें दुश्मनों और विरोधियों का सामना करना पड़ा। इन सभी बातों ने उन्हें एक आकर्षक आधुनिक नायक बना दिया।

गोदावरी

सारांश

यह निशिकांत देशमुख की कहानी है- जो एक नदी के किनारे अपने परिवार के साथ एक पुरानी हवेली में रहते हैं। पीढ़ियों से निशि और उनका परिवार किराया वसूल करने वाला रहा है। उनके पास शहर के पुराने हिस्से के आसपास काफी संपत्ति है। उनके दादा, नरोपंत, डेमेंसिया से पीड़ित हैं, उनके पिता नीलकांत को भूलने की बीमारी है।

इस परिवार के वर्तमान वारिस के रूप में, निशिकांत अपने जीवन से निराश हैं। वे पुराने शहर के तरीकों से नफरत करते हैं, वे अपने जीवन की तुच्छता से नफरत करते हैं, वे इस बात से भी नफरत करते हैं कि वे अक्षम रहे हैं- लेकिन अधिकांश भारतीय पुरुषों की तरह, वे अपनी नफरत को अपने अन्दर समाहित करते हैं और सारा दोष किरायेदारों व शहर जैसे कारणों को देते हैं, जिन्हें पूरी तरह से दोषमुक्त भी नहीं कहा जा सकता है।

अल्फा बीटा गामा

सारांश

निर्देशन के क्षेत्र में जय का करियर निरंतर ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, जबकि उनका वैवाहिक जीवन संकट में है और वह अपनी प्रेमिका कायरा के साथ जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। उसकी पत्नी, मिताली- तलाक चाहती है ताकि वह अपने इंजीनियर प्रेमी रवि से शादी कर सके, जो कि उसके जल्द ही होने वाले पूर्व पति के उलट बेहद शांत और परवाह करने वाला है।

जब जय तलाक की बात करने के लिए आता है, तो रवि उस फ्लैट में मौजूद होता है जो कभी जय और मिताली का घर हुआ करता था। रवि यह महसूस करता है कि एक– दूसरे से विरक्त हो चुके दंपति के लिए उसके सामने तलाक पर चर्चा करना अजीब होगा। वह वहां से जाने का फैसला करता है।

  1. बूम्बा राइड

सारांश

गॉड ऑन द बालकनी के निर्देशक बिस्वजीत बोरा की बूम्बा राइड भारत की ग्रामीण शिक्षा प्रणाली में फैले व्यापक भ्रष्टाचार पर एक तीखा हास्य व्यंग्य है– और यह आठ साल के एक ऐसे लड़के (नवोदित इंद्रजीत पेगू, एक उल्लेखनीय भूमिका में) के बारे में है जो हेराफेरी करके खेल को अपने पक्ष में करना जानता है। एक सच्ची कहानी से प्रेरित, इस फिल्म को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर ज्यादातर गैर-पेशेवर कलाकारों के साथ शूट किया गया है।

इस फिल्म की कहानी एक साधनहीन स्कूल के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें केवल एक (अनिच्छुक) छात्र, बूम्बा है। अपनी नौकरी और फंडिंग को बनाए रखने के लिए बेताब उस स्कूल के सभी शिक्षक उदासीन एवं असहयोगी रवैया रखने वाले इस लड़के को कक्षा में आने के लिए रिश्वत देते हैं- जबकि बूम्बा की गुप्त इच्छा शहर के एक ऐसे बेहतर वित्त-पोषित स्कूल में जाने की है, जहां बस एक थोड़ी बड़ी और बहुत सुंदर लड़की पढ़ती हो।

  1. धुईं

सारांश

पकंज अभिनेता बनना चाहता है और स्थानीय नगर निकाय के लिये नुक्कड़ नाटक करता है, ताकि अपना भरण-पोषण कर सके। उसके सपने बहुत बड़े हैं। वह अपने मित्र प्रशांत के साथ महीने भर में मुम्बई जाना चाहता है, जिसके लिये वह पर्याप्त बचत कर रहा है। लॉकडाउन के बाद उसके घर पर वित्तीय संकट आ पड़ा है और उसके सेवानिवृत पिता किसी नौकरी की तलाश में हैं।

वह दिन भर शहर में घूमता रहता है, थियेटर के अपने साथियों से मिलता है और उसके सीनियर लोग उस पर रौब जमाते रहते हैं। वह भी अपने जूनियरों को सलाह देता रहता है। मुम्बई के एक फिल्म-निर्माता से उसकी मुलाकात होती है, जिसका अप्रत्याशित नतीजा निकलता है। उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है और वह तय कर लेता है कि वह अपनी सारी जमा-पूंजी दे देगा, ताकि उसके पिता को नौकरी न करनी पड़े। मुम्बई के एक

  1. ट्री फुल ऑफ पैरट्स

सारांश

आठ साल का लड़का पूजन कोई साधारण बालक नहीं था। वह झील में मछली पकड़ने जैसे छोटे-छोटे काम करके अपना पेट पालता है और अपने परिवार की देखभाल करता है। उसके परिवार में शराबी बाप, दादा और परदादा थे। उसकी मां कई वर्षों पहले किसी के साथ भाग गई थी।

एक दिन मछली पकड़ते समय पूजन ने एक अंधे व्यक्ति को देखा, जो अकेला नावों के ठिकाने पर बैठा था। ऐसा लगता था जैसे वह अपने घर का रास्ता भूल गया हो। उसे कुछ याद नहीं था। उसे बस इतना याद था कि उसके घर के सामने लगा पेड़ तोतों से भरा रहता था। पुलिस थाने में इस व्यक्ति के बारे में सूचना देने की कोशिश भी बेकार चली गई थी।