कृषि विश्वविद्यालय में कृषि में नैनो उर्वरकों के उपयोग पर कार्यशाला आयोजित

हिम न्यूज़ पालमपुर। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा  भा.कृ.अनु.परि.-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-I, लुधियाना तथा भा.कृ.अनु.परि.-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल के सहयोग से तथा इफको, हिमाचल प्रदेश के समर्थन से ‘कृषि में नैनो उर्वरकों के उपयोग पर कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय के सभागार में आयोजित हुई। 

कार्यशाला में 150 से अधिक वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों, कृषि विज्ञान केंद्रों के कार्यक्रम समन्वयकों, प्रसार कार्यकर्ताओं, शोधार्थियों एवं किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कृषि में नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार, अपनाने एवं रणनीतिक उपयोग से संबंधित नवीनतम जानकारी साझा करना तथा वैज्ञानिकों, प्रसार कार्यकर्ताओं एवं किसानों के बीच ज्ञान एवं अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सोनिया सूद, सह निदेशक प्रसार शिक्षा, के स्वागत संबोधन से हुआ। इसके पश्चात डॉ. परविंदर श्योराण, निदेशक, भा. कृ. अनु. परि.-एटीएआरआई, जोन-I, लुधियाना, ने कार्यशाला का अवलोकन प्रस्तुत किया।  तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. एस. एस. कटियार, राज्य विपणन प्रबंधक, इफको, शिमला, ने “हिमाचल प्रदेश में टिकाऊ कृषि के लिए नैनो उर्वरकों का प्रचार एवं अपनाना: इफको की पहल एवं विपणन रणनीतियां” विषय पर प्रस्तुति दी।

उन्होंने नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार तथा किसानों द्वारा इनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इफको की पहलों एवं विपणन रणनीतियों पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत डॉ. अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भा. कृ. अनु. परि.-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल, ने फसल पौधों में नैनो उर्वरकों के रणनीतिक उपयोग पर व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. राज पाल शर्मा, इफको चेयर एवं विभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान विभाग, चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, ने कृषि में नैनो उर्वरकों के उपयोग से संबंधित अनुसंधान निष्कर्ष एवं भविष्य की दिशा पर जानकारी साझा की।

अपने संबोधन में डॉ. विनोद शर्मा, निदेशक अनुसंधान, चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, ने नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रमाण-आधारित जानकारी के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कृषि अनुसंधान से प्राप्त तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. जनार्दन सिंह, निदेशक प्रसार शिक्षा, चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों को कृषक समुदाय तक पहुंचाने में प्रसार शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यशाला के दौरान आयोजित संवाद सत्र में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों, कृषि विज्ञान केंद्रों के कार्यक्रम समन्वयकों एवं किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रतिभागियों ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से संबंधित अपने अनुभव साझा किए तथा इनके व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की।  कार्यशाला ने वैज्ञानिकों, प्रसार कार्यकर्ताओं, शोधार्थियों एवं किसानों के बीच ज्ञान-विनिमय और संवाद के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया। इस दौरान नैनो उर्वरकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा कृषि में इनके प्रभावी, जिम्मेदार एवं टिकाऊ उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यशाला के सफल आयोजन में प्रसार शिक्षा निदेशालय के वैज्ञानिकों  डॉ. बी. एन. सिन्हा, डॉ. सुमन कुमार एवं डॉ. बृज वनिता ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. पंकज सूद, कार्यक्रम समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र, मंडी, तथा डॉ. गौरव, एसएमएस (मृदा), कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर, ने कार्यक्रम के प्रतिवेदक के रूप में योगदान दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ. लव भूषण, द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।