वैज्ञानिकों के लिए सीपीआरआई शिमला में प्रशिक्षण कार्यक्रम

हिम न्यूज़ शिमला। केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के तत्वाधान में 10 दिवसीय शॉर्ट कोर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम “कन्वेंशनल एण्ड मौलिक्यूलर टूल्स फॉर क्रॉप इम्प्रूवमेन्ट, प्रोटेक्शन, प्रोडक्शन एण्ड पोस्ट हार्वेस्ट  मैनेजमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर क्रॉपस”, विषय पर 02 से 11 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के 25 प्रशिक्षु भाग लेंगे।

संस्थान के निदेशक व प्रशिक्षण कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि संस्थान में विश्व स्तरीय आणविक जीव विज्ञान और जीनोमिक्स और ऑक्सफोर्ड नैनोपोर अनुक्रमण सुविधा, जीनोम संपादन के लिए उत्कृष्टता केंद्र, पादप ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला, जर्मप्लाज्म प्रयोगशाला, आणविक रोग विज्ञान प्रयोगशाला, बीज गुणन और परीक्षण प्रयोगशाला, एलसीएमएस /एमएस और एचपीएलसी से सुसज्जित जैव रसायन विश्लेषण प्रयोगशाला, मृदा-पादप पोषक तत्व विश्लेषण प्रयोगशाला की उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं। और संस्थान की बहु विषयक प्रशिक्षकों की टीम के द्वारा पूरे देश से आए प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के कोर्स डायरेक्टर डॉ. शैलेज सूद ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्देश्य बागवानी विज्ञान के क्षेत्र में दक्षता को बढ़ाना है, जिसमें पारंपरिक और आधुनिक आणविक उपकरणों का समन्वय किया जाएगा, और विशेष रूप से आलू पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशिक्षुओं को पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और उपयोग, पादप ऊतक संवर्धन, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, अनुक्रमण, जीनोम संपादन, रोग निदान, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और जैव रासायनिक विश्लेषण (LC-MS/MS, HPLC) में ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्राप्त होंगे।

प्रशिक्षण में सटीक कृषि, जलवायु-अनुकूल पद्धतियों, पोषक तत्व प्रबंधन और आकारिकी एवं आणविक निदान के माध्यम से सतत कीट प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रतिभागी लचीली और कुशल बागवानी उत्पादन प्रणालियों के लिए पारंपरिक और आणविक उपकरणों को एकीकृत करने में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे। इस कार्यक्रम के कोर्स कोऑर्डिनटोर डॉ. विकास मंगल, डॉ. पिनबीयांगलांग खारमुनिउड़, डॉ. कैलाश नागा  एवं डॉ. धर्मेन्द्र कुमार हैं।