हिम न्यूज़ शिमला। आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में धर्मशाला के विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की वर्तमान सरकार ने चुनाव से पहले युवाओं, कर्मचारियों और आम जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाए और सत्ता में आने के बाद उन्हीं वादों से मुंह मोड़ लिया। जिस “व्यवस्था परिवर्तन” का ढोल चुनाव के दौरान पीटा गया था, आज वही व्यवस्था वादाखिलाफी, वित्तीय अव्यवस्था और कर्मचारियों की अनदेखी का पर्याय बनती जा रही है। उन्होंने कहा कोरोना वॉरियर्स को हटाना—व्यवस्था परिवर्तन का पहला तमाचा था।

सुधीर शर्मा ने कहा कि जिन कोरोना वॉरियर्स ने महामारी के सबसे कठिन दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेश की सेवा की, सरकार ने उन्हें ही नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिन लोगों ने संकट के समय सरकार और जनता का साथ दिया, उनके साथ ऐसा व्यवहार करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
सुधीर शर्मा ने कहा की चुनाव से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने युवाओं को सरकारी नौकरियों और 58 वर्ष तक रोजगार की बातें बताईं। लेकिन सत्ता में आने के बाद रोजगार के बड़े वादे कहां चले गए? उन्होंने कहा कि युवाओं के हाथ नौकरी की जगह निराशा आई और विभिन्न “मित्र” श्रेणियों में नियुक्तियों को लेकर सरकार पर भाई-भतीजावाद और राजनीतिक लाभ आम चर्चा में है।
यह रोजगार क्रांति है या युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़? उन्होंने कहा की आज कर्मचारी सवाल पूछे तो सरकार को इतना डर क्यों लगता है सरकार ?शर्मा ने कहा कि कर्मचारी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग उठाए तो उसके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई करना किस प्रकार का लोकतंत्र है? उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें डराने और दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को याद रखना चाहिए कि कर्मचारी किसी सरकार की निजी संपत्ति नहीं हैं। वे प्रदेश की व्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें अपनी समस्याएं उठाने का पूरा अधिकार है।जो सरकार अपने ही कर्मचारियों की आवाज से डर जाए, वह व्यवस्था परिवर्तन नहीं, व्यवस्था के पतन की निशानी होती है।
एचआरटीसी कर्मचारी काम करें, लेकिन वेतन के लिए तरसें?
सुधीर शर्मा ने कहा कि HRTC के कर्मचारी दिन-रात जनता को परिवहन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन समय पर वेतन न मिलना, ओवरटाइम का भुगतान अटकना और पेंशन में देरी उनकी आर्थिक परेशानियों को बढ़ा रही है। यह कैसी सरकार है जहां कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई के लिए भी इंतजार करने को मजबूर हैं? सरकार को यह बताना चाहिए कि कर्मचारियों की जेब खाली है तो सरकार के दावों में खजाना आखिर कहां भरा पड़ा है?
सुधीर शर्मा ने कहा कि OPS पर सरकार का जो दाव है उस पर श्वेत पत्र जारी करने की हिम्मत दिखाए सरकार
सुधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार OPS लागू करने का दावा करते हैं। यदि यह दावा पूरी तरह सच है तो सरकार को बिना देर किए श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश के सामने आंकड़े रखने चाहिए। कितने कर्मचारियों को OPS का लाभ मिला? कितने कर्मचारी अभी भी इससे बाहर हैं? वास्तविक वित्तीय लाभ कितना मिला?उन्होंने कहा कि बयानबाजी से OPS लागू नहीं होता, कर्मचारियों के खाते में उसका लाभ दिखाई देना चाहिए। सुधीर शर्मा ने पेंशनर्स की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि रिटायर्ड कर्मचारियों की जिंदगी भर की कमाई सरकार के पास क्यों अटकी है?
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जमा राशि और अन्य वित्तीय देनदारियों का लंबित रहना बेहद गंभीर विषय है। जिन कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन प्रदेश की सेवा में लगा दिया, उन्हें अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए सरकार के सामने हाथ फैलाने की स्थिति में क्यों लाया जा रहा है? शर्मा ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की ₹30–40 लाख की राशि लंबित है, तो उसके परिवार की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। कई बुजुर्ग कर्मचारी भुगतान का इंतजार करते-करते दुनिया से चले गए—लेकिन सरकार की संवेदनहीन व्यवस्था नहीं जागी।
DA और Pay Commission के एरियर पर चुप्पी क्यों?
कर्मचारियों के लंबित Pay Commission arrears और 15 प्रतिशत DA का मुद्दा लगातार उठता रहा है। सरकार के पास घोषणाओं के लिए शब्द हैं, लेकिन कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए पैसा नहीं?सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि मंत्रियों और विधायकों के इलाज से जुड़े भुगतान और कर्मचारियों के चिकित्सा दावों में क्या समान नीति लागू होती है। यदि नहीं, तो कर्मचारियों के साथ यह दोहरा मापदंड क्यों?
अब जनता को भाषण नहीं, हिसाब चाहिए
सरकार ने चुनाव से पहले रोजगार, OPS और कर्मचारियों के हितों को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे। अब जनता उन वादों का हिसाब मांग रही है। कोरोना वॉरियर्स का रोजगार, युवाओं की सरकारी नौकरी, HRTC कर्मचारियों का वेतन, पेंशनरों की परेशानी, रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा राशि, DA और Pay Commission arrears—हर मुद्दे पर सरकार को जवाब देना होगा। जिसे सरकार “व्यवस्था परिवर्तन” कह रही है, उसे जनता व्यवस्था की बदहाली के रूप में देख रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अब विज्ञापनों और राजनीतिक बयानों के पीछे छिपने के बजाय श्वेत पत्र जारी कर जनता के सामने पूरा हिसाब रखना चाहिए। आखिर सवाल हिमाचल के कर्मचारियों और युवाओं के भविष्य का है।