हिम न्यूज़ धर्मशाला। पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा दिए गए बयानों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के पास न तो कोई ठोस उद्योग नीति है और न ही प्रदेश के औद्योगिक भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट विज़न। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े मंचों से भाषण देकर, उत्सव और मेले आयोजित कर सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि आज हिमाचल का उद्योग क्षेत्र गहरे संकट से गुजर रहा है।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी नीति लागू की गई थी। उद्योगों को करों में राहत, सब्सिडी, सस्ती बिजली, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और समयबद्ध स्वीकृतियों जैसी सुविधाएं दी गईं, जिसके कारण प्रदेश में निवेश बढ़ा और हजारों युवाओं को रोजगार मिला। लेकिन सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही उन सभी उद्योग-हितैषी प्रावधानों को या तो समाप्त कर दिया या उन्हें निष्क्रिय बना दिया, जिसके चलते आज उद्योग हिमाचल से पलायन करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि पिछले तीन वर्षों में कितने उद्योग बंद हुए, कितने निवेश प्रस्ताव वापस लिए गए और कितने उद्यमी दूसरे राज्यों की ओर चले गए। यदि सरकार वास्तव में एमएसएमई और स्टार्टअप को लेकर गंभीर होती, तो सबसे पहले एक नई, स्थिर और भरोसेमंद उद्योग नीति लागू की जाती। केवल ‘हिम’ ब्रांड या ‘मेड इन हिमाचल’ जैसे नारों से उद्योग नहीं चलते, उद्योग सरकार की नीयत, नीति और निरंतर सहयोग से चलते हैं, जो इस सरकार में पूरी तरह गायब है।
पूर्व उद्योग मंत्री ने कहा कि सुक्खू सरकार स्वावलंबन और स्वरोजगार की योजनाओं की बात तो खूब करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इन योजनाओं के अंतर्गत आवेदन करने वाले हजारों युवाओं को आज तक कोई ठोस आर्थिक सहायता नहीं मिली। न समय पर सब्सिडी दी गई, न ऋण सहायता सुनिश्चित की गई और न ही मार्गदर्शन की कोई प्रभावी व्यवस्था है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए वास्तविक मदद नहीं मिल रही, तो फिर ऐसे भव्य मेलों और फेस्टिवलों से सरकार किसे आकर्षित करना चाहती है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री पंचायत चुनावों को आपदा और धनाभाव का हवाला देकर टालने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर मेलों, कार्निवाल और फेस्टिवलों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। एक कार्निवाल समाप्त होता है और रातों-रात दूसरा भव्य ढांचा खड़ा कर दिया जाता है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन आयोजनों से लाभ किसे हो रहा है और उद्योगपतियों से की जा रही उगाही का वास्तविक उद्देश्य क्या है।
उन्होंने सुक्खू सरकार की कथनी और करनी में फर्क को उजागर करते हुए कहा कि जो सरकार हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करती है, वही सरकार प्रदेश के सांस्कृतिक आयोजनों में बाहरी, विशेषकर पंजाबी कलाकारों पर लाखों रुपये खर्च कर रही है। हिमाचल के अपने लोक कलाकार, गायक और सांस्कृतिक दलों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। यह प्रदेश की संस्कृति के साथ अन्याय है और स्थानीय कलाकारों का खुला अपमान भी।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि जिन लाखों रुपयों से बाहरी कलाकारों को बुलाया जा रहा है, उसी धन से स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को मजबूत किया जा सकता था। सरकार को यह बताना चाहिए कि जब प्रदेश के पास सड़कों, विकास कार्यों और चुनावों के लिए पैसा नहीं है, तो फिर इस तरह के आयोजनों पर धन लुटाने का औचित्य क्या है। अंत में पूर्व उद्योग मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को आज दिखावे वाले आयोजनों की नहीं, बल्कि मजबूत उद्योग नीति, पारदर्शी प्रशासन और रोजगारोन्मुखी सोच की आवश्यकता है। भाजपा यह स्पष्ट करती है कि यदि सुक्खू सरकार ने समय रहते उद्योग, निवेश और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाए, तो हिमाचल का औद्योगिक पतन और तेज़ होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वर्तमान कांग्रेस सरकार की होगी।