प्रदेश संकट में, सरकार सैर-सपाटे में व्यस्त : संदीपनी भारद्वाज

हिम न्यूज़ शिमला। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा जम्मू-कश्मीर से सेब विषय पर की गई प्रेस वार्ता पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर हिमाचल के बागवानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि नई व्यापार व्यवस्था से हिमाचल के सेब उत्पादकों के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। देश में सेब का कुल उत्पादन लगभग 21 लाख टन है जबकि मांग 26 लाख टन है, इसलिए जो 5 लाख टन का अंतर है वह पहले भी आयात से ही पूरा होता रहा है।

भारद्वाज ने कहा कि पहले आयातित सेब का न्यूनतम मूल्य लगभग ₹50 प्रति किलो था, जिस पर शुल्क लगाकर कीमत लगभग ₹75 तक पहुंचती थी, जबकि नई व्यवस्था के बाद आयातित सेब ₹120 से अधिक लागत पर बाजार में पहुंचेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयातित सेब महंगा हो रहा है तो इससे हिमाचल के बागवानों को नुकसान कैसे होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही नीतियां बनाई हैं, लेकिन मुख्यमंत्री केवल राजनीतिक बयानबाज़ी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यदि वास्तव में बागवानों के हित चाहते थे तो उन्हें दिल्ली जाकर संबंधित केंद्रीय मंत्री से चर्चा करनी चाहिए थी, न कि प्रदेश का पैसा खर्च कर दूसरे राज्य से प्रेस वार्ता करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश पहले से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऐसे समय में मुख्यमंत्री का इस तरह यात्रा कर बयान देना जनता के धन का दुरुपयोग है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को बयानबाज़ी के बजाय बागवानी क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। आधुनिक तकनीक और मिशन आधारित योजनाओं के माध्यम से प्रति हेक्टेयर उत्पादन 10 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 40 मीट्रिक टन तक किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने हालिया बजट में बादाम और अखरोट जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं, जिनका लाभ हिमाचल को मिल सकता है यदि राज्य सरकार उन्हें लागू करे।

संदीपनी भारद्वाज ने राज्य सरकार से पूछा कि एचपीएमसी के माध्यम से किसानों से खरीदे गए उत्पादों का एमआईएस भुगतान अभी तक क्यों लंबित है और यह राशि कब तक जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को दूसरे राज्यों में बयान देने के बजाय प्रदेश के किसानों और बागवानों के लंबित भुगतानों और वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा हिमाचल के किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य सरकार से आग्रह करती है कि वह राजनीति छोड़कर ठोस कदम उठाए, ताकि प्रदेश के बागवानों को वास्तविक लाभ मिल सके।