समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों की शुरुआत है : अविनाश राय खन्ना

हिम न्यूज़, सोलन: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद एवं हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने बाहरा विश्वविद्यालय, वाकनाघाट में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना या अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनकर परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि आज डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है और आने वाला समय उनके संकल्प, मेहनत, सकारात्मक सोच तथा निर्णय लेने की क्षमता की परीक्षा लेगा।

 

अविनाश राय खन्ना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं होता। प्रत्येक विद्यार्थी को अपने शैक्षणिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं। नौवीं और दसवीं कक्षा के बाद विषयों का चयन, बारहवीं के बाद उच्च शिक्षा का निर्णय, फिर उचित पाठ्यक्रम, कॉलेज और विश्वविद्यालय का चयन करना अपने आप में एक चुनौती होती है। इन सभी चुनौतियों को पार करते हुए आज विद्यार्थी इस मुकाम तक पहुंचे हैं। इस उपलब्धि के पीछे विद्यार्थियों की मेहनत के साथ उनके माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का महत्वपूर्ण योगदान है।

 

उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि डिग्री प्राप्त करने के बाद जीवन में क्या करना है। **युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाला बनना चाहिए।** उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन का एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी निष्ठा एवं परिश्रम के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि यदि युवा दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे तो शिक्षण संस्थान, परिवार और सरकार की विभिन्न योजनाएं भी उनके प्रयासों में सहयोगी बन सकती हैं।

 

खन्ना ने महाभारत का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का दृष्टिकोण ही उसके व्यक्तित्व और भविष्य का निर्माण करता है। यदि हम प्रत्येक परिस्थिति में केवल कमियां खोजेंगे तो अवसर हमारे हाथ से निकल जाएंगे, लेकिन यदि हम सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो कठिन परिस्थितियों में भी सफलता का मार्ग खोज सकते हैं। उन्होंने कहा कि **सकारात्मक सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास जीवन में सफलता के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।**

 

उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता के संघर्ष और त्याग का स्मरण करवाते हुए कहा कि प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करता है। जब उनका बेटा या बेटी स्नातक, स्नातकोत्तर अथवा पीएचडी की डिग्री प्राप्त करता है, तो माता-पिता की अपेक्षाएं और बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके परिवार के सपनों और संघर्षों का परिणाम भी है। इसलिए युवाओं का दायित्व है कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।

 

अविनाश राय खन्ना ने कहा कि आज देश को ऐसे शिक्षित युवाओं की आवश्यकता है जो केवल अपने करियर तक सीमित न रहें, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान खोजने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में हमारे पूर्वजों ने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया, जबकि आज की युवा पीढ़ी के सामने **देश के लिए जीने और देश के विकास में योगदान देने का अवसर है।**

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार के प्रयासों से नहीं बनेगा, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपने स्तर पर योगदान देना होगा।

 

खन्ना ने अपने सार्वजनिक जीवन का एक प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि एक समय उनके क्षेत्र में लगभग 36 किलोमीटर लंबी सड़क की स्थिति अत्यंत खराब थी। सड़क निर्माण के लिए सरकार के पास धन की कमी बताई जा रही थी। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए अनोखा और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया तथा सड़क किनारे बैठकर लोगों के जूते पॉलिश कर धन एकत्रित करने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि उनका आंदोलन लगातार 13 दिनों तक चला और अंततः सड़क के निर्माण का कार्य शुरू हुआ।

 

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि रचनात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से जनसमस्या का समाधान करवाना था। **“समस्याओं को देखकर केवल शिकायत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके समाधान के लिए स्वयं आगे आना चाहिए। सकारात्मक सोच और रचनात्मक प्रयास से बड़े परिवर्तन लाए जा सकते हैं।”**

 

खन्ना ने विद्यार्थियों को एक प्रेरक कहानी सुनाते हुए कहा कि एक बार जंगल में आग लग गई और सभी पशु-पक्षी आग बुझाने का प्रयास करने लगे। एक छोटी चिड़िया भी अपनी चोंच में पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास कर रही थी। जब उससे पूछा गया कि इतने थोड़े पानी से क्या आग बुझ जाएगी, तो उसने उत्तर दिया कि आग बुझाने में उसका योगदान भले ही छोटा हो, लेकिन जब इतिहास लिखा जाएगा तो उसकी गिनती आग लगाने वालों में नहीं, बल्कि आग बुझाने वालों में होगी।

 

उन्होंने कहा कि इस कहानी से प्रत्येक विद्यार्थी को प्रेरणा लेनी चाहिए। **“कभी यह मत सोचिए कि आपके छोटे से प्रयास से इतने बड़े देश में क्या परिवर्तन आएगा। प्रत्येक छोटा प्रयास राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।”**

 

उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2047 में भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करेगा, तब आज के युवाओं को भी यह गर्व होना चाहिए कि उन्होंने अपने परिश्रम, ज्ञान और सामाजिक योगदान से इस ऐतिहासिक यात्रा में अपनी भूमिका निभाई।

 

कार्यक्रम के अंत में अविनाश राय खन्ना ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों के अभिभावकों, शिक्षकों, विश्वविद्यालय प्रबंधन तथा दीक्षांत समारोह के आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग मानवता, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करेंगे।