हिम न्यूज़, शिमला : राज्य सरकार द्वारा मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत अब तक 8,000 मीट्रिक टन से अधिक सेब की खरीद की जा चुकी है, वहीं 17 हजार से अधिक बागवान एचपीएमआईएस पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके हैं। 1 अगस्त, 2026 से 213 सेब संग्रहण केंद्रों पर सेब खरीद प्रक्रिया जारी है। यह सेब संग्रहण केंद्र एचपीएमसी और हिमफेड द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। सेब खरीद प्रक्रिया 31 अक्तूबर, 2026 तक जारी रहेगी।
इस सेब सीजन में एक महत्त्वपूर्ण पहल करते हुए एमआईएस की पूरी प्रक्रिया को एचपीएमआईएस के माध्यम से डिजिटलाइज्ड किया गया है। इस प्रणाली के तहत बागवानों का पंजीकरण, सेब की खरीद, डिजिटल रसीद, परिवहन, प्रसंस्करण, निगरानी और भुगतान शामिल हैं, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। एचपीएमआईएस एंड्रॉयड और आईओएस एप्लीकेशन के माध्यम से उपलब्ध है। बागवानों के लिए एक बार पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। इस वर्ष पंजीकरण करवाने वाले बागवानों को आगामी वर्षों में दोबारा पंजीकरण करवाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन्हें केवल एचपीएमआईएस के माध्यम से संबंधित सेब संग्रहण केंद्र को सेब जमा करवाने की सूचना देनी होगी।
सेब हिमाचल प्रदेश की प्रमुख बागवानी फसल है, जो राज्य के कुल फल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत और फलदार फसलों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है, जो राष्ट्र स्तर पर सेब उत्पादन में लगभग 22 प्रतिशत और सेब बागवानी के क्षेत्रफल में लगभग 37 प्रतिशत का योगदान देता है। शिमला, प्रदेश का प्रमुख सेब उत्पादक जिला है, जिसका राज्य के कुल उत्पादन में लगभग 55 प्रतिशत योगदान है। इसके बाद कुल्लू, किन्नौर और मंडी जिले आते हैं।