महिला समिति ने महिलाओं के मुद्दों पर जोरदार धरना प्रदर्शन

हिम न्यूज़, शिमला : अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस बड़े जोश से मनाया।जिसमें महिला समिति ने महिलाओं के मुद्दों पर जोरदार धरना प्रदर्शन किया।
आज पथ परिवहन निगम द्वारा जो हिम बस कार्ड महिलाओं के लिए शुरू किया ।उसका पुरजोर विरोध किया गया। महिला समिति का मानना हैं जो हिम बस कार्ड महिलाओं का बनाया जा रहा हैं वो महिलाओं पर आर्थिक बोझ डालने वाला है।क्योंकि हर महिला रोज़ सफर नहीं कर रही है और दूसरी बात की सरकारी बसों की आवाजाही बहुत कम हैं।जिसके कारण भी कार्ड सिर्फ एक औपचारिकता बन कर रह जाएगा।महिला समिति की राज्य सचिव का कहना हैं कि महिलाओं पर इस तरह से हिम बस कार्ड बनाना कहीं भी उचित साबित नहीं होता है।जिन घरों में 3/4 महिलाएं हैं उन्हें ये कार्ड बनाना बहुत महंगा पड़ रहा है।दूसरा लोक मित्र केंद्र द्वारा भी भारी लूट का सामना करना पड़ता हैं।क्योंकि जो कार्ड अप्लाई करने के बाद रिजेक्ट हो रहे हैं उन्हें दोबारा से अप्लाई करने के लिए दोबारा लोक मित्र केंद्र को भुगतान करना पड़ेगा जो अत्यंत दुख की बात है। हिमाचल प्रदेश सरकार भी नवउदारिण की नीतियों का अनुसरण करके सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का निजीकरण तेजी से कर रही है।सरकार बार बार घाटे का बहाना लगाकर घाटे से उभरने के लिए महिलाओं और बच्चों के ऊपर इस तरह के कार्ड बनाकर आर्थिक बोझ डाल रही है।फालना चौहान ने अपने वक्तव्य में कहा कि सरकार सभी बंद पड़े रूटों को तुरंत बहाल करे और लोगो को परिवहन सुविधा का लाभ पहुंचाए।
उसी तरह जिला सचिव सोनिया शबरवाल ने कहा कि शिमला शहर में सरकारी बसों की आवाजाही इतनी कम हैं कि अगर महिलाओं को सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने जाना पड़ता हैं और दूसरी बार अपने बच्चों को लेने जाना पड़ता हैं। लेकिन सरकारी बसें न होने के कारण समय से स्कूल पहुंचने के लिए प्राइवेट बसों का उपयोग करना पड़ता हैं।जिसके कारण भी कार्ड का उपयोग नहीं हो पाएगा।उनका कहना हैं कि हम बस कार्ड सिर्फ महिलाओं से 50% की छूट को खत्म करना चाहती हैं।जो महिलाओं के उपर सरासर धोखा है।
उसी तरह हिम्मी ने भी कहा कि ग्रामीण इलाकों में वैसे भी बसों की आवाजाही बहुत कम होती हैं वहां के लिए समय समय से बसें आती जाती हैं।उन्हें अपना सफर आधा पैदल ओर कुछ छोटी गाड़ियों से करना पड़ता हैं।इसलिए हिम बस कार्ड ग्रामीण इलाकों के लिए भी उचित नहीं है।
महिला समिति की शहरी कोषाध्यक्ष रमा रावत ने कहा कि गांवों की तरफ खराब बसों को भेजा जाता हैं जो आधे रस्ते में ही रुक जाती हैं। और तो और कई हादसों का शिकार लोग हो रहे हैं। इसलिए हिम बस कार्ड अपनी जान जोखिम में डालकर और आर्थिक बोझ को लेकर ठीक साबित नहीं हो रहे है।
एस एफ आई के राज्य अध्यक्ष सनी सेकता ने भी कहां की छात्र दूर दराज के क्षेत्रों से पढ़ने शिमला आए हैं लेकिन एजुकेशन इंस्टीट्यूट तक बसों की कमी की वजह से पहुंचना मुश्किल हो रहा हैं।अगर बात hpu की करे तो वहां के लिए सभी बसें प्राइवेट चलती है जिसके कारण हम बस कार्ड बनाना व्यर्थ का बोझ छात्रों पर डाला जा रहा हैं।
महिला समिति का कहना है कि महिलाओं को अपने काम पर जाने के लिए,बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने के लिए,ध्यादीदार महिलाओं को जाने के लिए यहां तक कि स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए शिमला पहुंचना पड़ता हैं।लेकिन सरकारी बसों की कमी।की वजह से हिम बस कार्ड कहीं भी उचित साबित नहीं हो रहे हैं बल्कि महिलाओं पर आर्थिक बोझ डालने वाला है। महिला समिति का कहना हैं कि दूसरे राज्यों की तरह जैसे पंजाब जो हिमाचल के साथ लगता राज्य है वो आधार कार्ड पर पूरे राज्य में महिलाओं को मुफ्त यात्रा देता है।लेकिन हमारा हिमाचल प्रदेश महिलाओं से 50% भी बंद करने की कगार पर है।महिला समिति का एक प्रतिनिधि मंडल परिवहन निगम के निगम प्रबंधक को मिला और उन्होंने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि आपकी मांग जायज़ है और hm इसे सरकार से उठाएंगे ।
जनवादी महिला समिति मांग करती है कि सरकार बस कार्डो को बनाना तुरत बंद करे और महिलाओं को पहली की तरह किराए में छूट जारी रखे।अगर सरकार इस कार्य को नहीं करती है तो महिला समिति दोबारा से पथ परिवहन निगम का जगह जगह घेराव करेगी।