मोदी सरकार ने 12 वर्षों में चिकित्सा क्षेत्र में स्थापित किए मील के पत्थर: अनुराग सिंह ठाकुर

हिम न्यूज़ हमीरपुर। भारतीय जनता पार्टी, जिला हमीरपुर के मीडिया प्रभारी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने विगत 12 वर्षों में जन-जन को सुलभ एवं उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि आज सस्ती और बेहतर चिकित्सा सेवाएं आमजन की पहुंच में हैं।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सबका साथ, सबका विकास के मूलमंत्र के साथ देश को विकास की नई दिशा दी है। वर्ष 2014 भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जब केंद्र में एनडीए सरकार बनी और स्वास्थ्य को प्राथमिक एजेंडे में शामिल किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि स्वास्थ्य का विषय एक जन-आंदोलन का रूप ले सका।

उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि यदि देश के नागरिक स्वस्थ रहेंगे तो देश भी स्वस्थ और समृद्ध बनेगा। गरीब एवं मध्यम वर्ग की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के आधारभूत ढांचे में व्यापक परिवर्तन किए गए। वर्ष 2014-15 के केंद्रीय बजट की तुलना में वित्तीय वर्ष 2026-27 तक स्वास्थ्य मंत्रालय के बजट में 194 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इस बार बजट 1,06,530.42 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2014-15 में प्रति व्यक्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय 1,108 रुपये था, जो बढ़कर 3,169 रुपये हो गया है।

उन्होंने बताया कि आजादी के सात दशकों बाद देश में केवल छह एम्स थे, जो अब बढ़कर 23 हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश, जम्मू और असम सहित विभिन्न राज्यों को नए एम्स की सौगात मिली है। वर्ष 2014 तक देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 818 हो गए हैं। वर्ष 2014 में कुल यूजी मेडिकल सीटें 51,348 थीं, जो अब बढ़कर 1,28,875 हो गई हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,18,137 तथा पीजी सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 82,059 हो गई है। एमडी सीटों की संख्या भी 31,185 से बढ़कर 60,202 तक पहुंच गई है।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि सितंबर 2018 में केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की, जो विश्व की सबसे बड़ी सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है। इसके अंतर्गत गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई है। अक्टूबर 2025 तक 42 करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं तथा 86 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक इस योजना में नामांकित हुए हैं। देश के 12 करोड़ परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से अब तक जरूरतमंदों के 1.52 लाख करोड़ रुपये से अधिक के व्यक्तिगत स्वास्थ्य व्यय की बचत हुई है, जिससे लोगों के जेब से होने वाले खर्च में 21 प्रतिशत की कमी आई है। योजना को और प्रभावी बनाने के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट्स की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत अब तक 79.9 करोड़ लोगों के खाते बनाए जा चुके हैं।

इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत 14,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 80 प्रतिशत तक की छूट पर दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पिछले एक दशक में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली ने बुनियादी डिजिटलीकरण से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एक सुदृढ़ और परस्पर जुड़ा डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।