मंडी मध्यस्थता योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की संभावनाएं तलाशी जाएं: मुख्यमंत्री

हिम न्यूज़, शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार शाम यहां बागवानी विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दिए कि मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खरीद पर बागवानों को भुगतान के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की संभावनाएं तलाश की जाएं। मौजूदा भुगतान प्रणाली के तहत बागवानों को मंडी मध्यस्थता योजना के तहत की गई खरीद पर नकद राशि के स्थान पर उन्हें विभाग द्वारा अन्य सामग्री प्रदान कर भुगतान किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस कदम से छोटे और सीमांत सेब उत्पादकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिए कि मौजूदा सीजन में सेब उत्पादन का अनुमान तैयार किया जाए और बागवानों की सुविधा के लिए अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित की जाएं।

इस वर्ष मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब खरीद के लिए लगभग 132 संग्रह केंद्र स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेब की खरीद के लिए पर्याप्त संख्या में संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएं और बागवानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री ने उत्पादों के बेहतर प्रबंधन पर बल देते हुए निर्देश दिए कि एचपीएमसी के एप्पल जूस कंसंट्रेट तथा अन्य उत्पादों का प्रभावी विपणन किया जाए ताकि संस्थान को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने उत्पाद की शीघ्र बिक्री के लिए नीलामी केंद्रों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी खरीद प्रक्रिया को डिजिटल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पिछले साढ़े तीन वर्षों में किसानों और बागवानों के कल्याण के लिए अनेक पहल की गई हैं।

बैठक में एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव बागवानी सी. पॉलरासु, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस डॉ. निपुण जिंदल, एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, निदेशक बागवानी सतीश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।