हिम न्यूज़ शिमला। तीन दिवसीय “लीडिंग एंड लर्निंग” क्षमता निर्माण कार्यक्रम में देशभर के 29 दिल्ली पब्लिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम जून के अंतिम सप्ताह में डीपीएस सोसाइटी–ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर, नोएडा में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शैक्षिक नेतृत्व को और अधिक प्रभावी एवं भविष्य के लिए तैयार बनाना था।
कार्यक्रम में 21वीं सदी की शिक्षा व्यवस्था में विद्यालय प्रमुखों की बदलती भूमिका, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, विद्यालय प्रशासन में भावनात्मक समझ, डिजिटल तकनीक के उपयोग, समावेशी विद्यालय संस्कृति और बेहतर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया कि प्रधानाचार्य की भूमिका केवल प्रशासनिक प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से शिक्षकों के विकास, नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को दिशा देते हैं। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित वक्ताओं ने दिल्ली पब्लिक स्कूल की विरासत और भविष्य की शिक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उद्घाटन सत्र में वी. के. शुंगलू, अध्यक्ष, द डीपीएस सोसाइटी, ने प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारियों, प्रभावी विद्यालय संचालन और वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया।
नीरज ग्रोवर, अधिवक्ता, नई दिल्ली, ने विद्यालय शिक्षा से जुड़े कानूनी पहलुओं पर जानकारी साझा की। वहीं संध्या अवस्थी, कार्यकारी निदेशक, एचआरडीसी एवं डीपीएसएस–एचआरडीसी, ने “मास्टरिंग द आर्ट ऑफ लेसन” और “एसेंशियल्स ऑफ लीडरशिप” जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए, जिनमें निरंतर सीखने, आत्ममंथन और नेतृत्व कौशल को मजबूत करने पर बल दिया गया।
डीपीएस शिमला की हेडमिस्ट्रेस वीणा चौहान ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई और संस्थान के समक्ष आने वाली चुनौतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि शिमला जैसे शहर में, जहाँ कई प्रतिष्ठित और लंबे समय से स्थापित विद्यालय कार्यरत हैं, डीपीएस शिमला ने अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए हैं। शहर के केंद्र से भौगोलिक दूरी के बावजूद विद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर अवसरों और मजबूत शैक्षणिक वातावरण के माध्यम से अपनी उपस्थिति को सशक्त बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निरंतर प्रयास, शैक्षणिक उत्कृष्टता और समुदाय से जुड़ाव के माध्यम से डीपीएस शिमला को क्षेत्र के अग्रणी विद्यालयों के समकक्ष स्थापित करने की दिशा में कार्य जारी है।
यह कार्यक्रम देशभर के विद्यालय प्रमुखों के लिए अनुभव साझा करने, चुनौतियों पर चर्चा करने और नवीन समाधानों को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच बना। डीपीएस शिमला के लिए यह सहभागिता इस विश्वास को और मजबूत करती है कि निरंतर क्षमता निर्माण, दूरदर्शी नेतृत्व और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है तथा डीपीएस की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा सकता है।