₹1000 करोड़ की केंद्रीय सहायता से बन रहे बल्क ड्रग पार्क की प्रगति तेज करने के निर्देश

हिम न्यूज़ शिमला। हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन द्वारा राज्यसभा में हिमाचल प्रदेश के बहुप्रतीक्षित बल्क ड्रग पार्क की प्रगति को लेकर उठाए गए महत्वपूर्ण प्रश्न पर केंद्र सरकार ने विस्तृत जानकारी देते हुए परियोजना की वर्तमान स्थिति, वित्तीय प्रगति, निर्माण कार्यों की स्थिति, देरी के कारणों तथा आगामी कार्ययोजना से सदन को अवगत कराया।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लिखित उत्तर में बताया कि हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क में साझा आधारभूत संरचना (Common Infrastructure Facilities) के निर्माण का कार्य विभिन्न चरणों में चल रहा है।

इसमें जलापूर्ति प्रणाली, विद्युत अवसंरचना, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) विद ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD), स्टीम जनरेशन सिस्टम, कॉमन वेयरहाउस, सॉल्वेंट रिकवरी सिस्टम, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

केंद्र सरकार ने बताया कि 11 अक्टूबर 2022 को इस परियोजना के लिए ₹1000 करोड़ की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई थी, जिसमें से ₹225 करोड़ की पहली किस्त 20 फरवरी 2023 को जारी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी अपने हिस्से के रूप में ₹118.46 करोड़ स्वीकृत किए हैं तथा ₹35.53 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

राज्यसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार परियोजना के अनेक महत्वपूर्ण घटकों पर कार्य प्रगति पर है। स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क का लगभग 12 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि आंतरिक सड़क नेटवर्क एवं कंपाउंड वॉल का 10 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। रॉ, पोटेबल एवं डिमिनरलाइज्ड वाटर सिस्टम का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

वहीं कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP), सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्टीम जनरेशन सिस्टम, कॉमन वेयरहाउस, सॉल्वेंट रिकवरी सिस्टम, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर, एडवांस्ड लेबोरेटरी टेस्टिंग सेंटर, सेफ्टी एवं हैजार्डस ऑपरेशन ऑडिट सेंटर तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सहित कई अन्य अवसंरचना परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं या निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना में देरी का प्रमुख कारण पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance), पेड़ों की कटाई के लिए आवश्यक अनुमतियां तथा विभिन्न प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं थीं। हालांकि 25 सितंबर 2025 को पर्यावरण स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना में उल्लेखनीय तेजी आई है तथा अधिकांश महत्वपूर्ण अवसंरचना पैकेज अब क्रियान्वयन अथवा उन्नत खरीद (Procurement) चरण में पहुंच चुके हैं।

केंद्र सरकार ने राज्यसभा को यह भी बताया कि परियोजना की प्रगति की नियमित समीक्षा योजना संचालन समिति (Scheme Steering Committee), रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों तथा हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड कमेटी द्वारा लगातार की जा रही है, ताकि बल्क ड्रग पार्क का निर्माण निर्धारित समय में पूरा कर इसे शीघ्र संचालित किया जा सके। राज्यों से प्राप्त अनुरोधों और परियोजनाओं की प्रगति को देखते हुए ‘Promotion of Bulk Drug Parks’ योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ा दी गई है।

राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि बल्क ड्रग पार्क हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक परियोजना है। इसके पूर्ण होने से प्रदेश में फार्मास्यूटिकल उद्योग को नई गति मिलेगी, हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे, निवेश आकर्षित होगा तथा हिमाचल प्रदेश देश के फार्मा सेक्टर में अपनी अग्रणी भूमिका को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि वे लगातार संसद के माध्यम से हिमाचल प्रदेश से जुड़े विकासात्मक विषयों को मजबूती से उठा रहे हैं ताकि प्रदेश को केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।