भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक ज्ञान का अद्वितीय मिश्रण : प्रो. बंसल

हिम न्यूज़ धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएचपी) के 16वें स्थापना दिवस एवं सप्ताह समारोह के द्वितीय दिवस पर भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विशेष व्याख्यान का आयोजन राजकीय महाविद्यालय, धर्मशाला के सभागार में आयोजित हुआ। केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल की अध्यक्षता में आयोजित इस व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता नरेंद्र कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय सह प्रचारक प्रमुख मौजूद रहे। वहीं कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पद्मश्री प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरूआत में प्रो. सूर्यरश्मि रावत ने सभी का स्वागत किया।

 

वहीं कुलपति प्रो. बंसल ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को लागू करने, भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र की स्थापना और विश्वविद्यालय में इसके शैक्षणिक एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक दृष्टिकोण से समृद्ध करने के साथ नवाचार और अनुसंधान में नई दिशा देगी। उन्होंने आगे कहा, “भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक ज्ञान का अद्वितीय मिश्रण है। इसे आधुनिक शिक्षा में समाहित करना विद्यार्थियों की सर्वांगीण प्रतिभा को निखारने का अवसर है।”

मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. बेदी ने भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्र की बौद्धिक विरासत बताते हुए कहा, “भारतीय संस्कृति को अपनाओ, वेदों की ओर लौटो। भारतीय ज्ञान परंपरा सबसे प्राचीन है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि शिक्षा केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह जीवन मूल्यों और समाज की समझ भी विकसित करे। मुख्य वक्ता नरेंद्र कुमार ने कहा, “सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भारत को “दोबारा” जगतगुरू कैसे बनाया जाए। विविधता में एकता, सभी का सम्मान यही हमारी संस्कृति रही है और भारत का समाज हमेशा राष्ट्र और समाज के अधीन रहा है, न कि केवल राज्य के अधीन।

भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित दृष्टिकोण आधुनिक चुनौतियों को सुलझाने में भी मार्गदर्शक है। यदि हम अपने सांस्कृतिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को संतुलित रूप से अपनाएं, तो भारत वैश्विक नेतृत्व में पुनः अग्रणी बन सकता है।” इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा एवं योग से संबंधित पुस्तकों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद भाषण अधिष्ठाता (अकादमिक) प्रो. प्रदीप कुमार ने दिया, जिसमें सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।

उन्होंने कहा, “इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल छात्रों को ज्ञान प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें अपने सांस्कृतिक और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक भी करते हैं।” इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. नरेंद्र सांख्यान भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।अंत में सभी अतिथियों के सम्मान में पारंपरिक कांगड़ी धाम का आयोजन किया गया।