हिम न्यूज़ नई दिल्ली। राज्य सभा सांसद डॉ सिकंदर कुमार ने कहा कि कल लोकसभा का दिन भारतीय लोकतंत्र में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए ऐतिहासिक ‘महिला आरक्षण विधेयक 2026’ को विपक्ष के नकारात्मक रवैये और सदन में हंगामे के कारण अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। मोदी सरकार जहां देश की आधी आबादी को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध दिखी, वहीं विपक्ष ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनके लिए राजनीति महिला सम्मान से ऊपर है। सदन में विधेयक पेश करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक अनिवार्य कदम है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य था कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की 33% भागीदारी सुनिश्चित हो। दशकों से लंबित इस मुद्दे को मोदी सरकार ने धरातल पर उतारने का साहस दिखाया। मोदी सरकार का यह विकसित भारत का विजन है और सरकार का तर्क है कि बिना नारी शक्ति के पूर्ण सहयोग के भारत वैश्विक महाशक्ति नहीं बन सकता।
सिकंदर ने कहा कि विपक्ष ने आज महिलाओं के सपनों का गला घोंटा है। हम झुकेंगे नहीं, नारी शक्ति को उनका अधिकार दिलाना मोदी की गारंटी है। डॉ सिकंदर कुमार ने कहा कि विधेयक के गिर जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में विपक्ष की तीखी आलोचना हो रही है। उन्होंने ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ने तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों का बहाना बनाकर एक क्रांतिकारी बदलाव को रोक दिया। ये केवल विपक्ष की वोट बैंक की राजनीति है जो दल बाहर महिला सम्मान की बातें करते हैं, उन्होंने सदन के भीतर गुप्त रूप से एकजुट होकर नारी शक्ति के खिलाफ मतदान किया।मतदान के दौरान विपक्ष का व्यवहार अशोभनीय रहा, जिससे सदन की मर्यादा तार-तार हुई।
प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने कहा कि इस विधेयक के गिरने से उन करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है जो नीति निर्धारण में अपनी भूमिका देख रही थीं। विपक्ष के इस कदम को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए भाजपा और सहयोगी दलों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। उन्होंने ने कहा कि
मोदी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इससे पीछे नहीं हटेगी। प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार इस विधेयक को पुनः लाने और पारित कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। अब गेंद जनता के पाले में है, जिसे तय करना है कि वह ‘विकासवाद’ के साथ है या विपक्ष के ‘नकारात्मकतावाद’ के साथ।