हिम न्यूज़ दिल्ली। भाजपा के लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अनुरागठाकुर ने आज सोमवार को नई दिल्ली स्थित पाटी के केंद्रीय कार्यालय मेंप्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राहुल गांधी पर चुनाव आयोग, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगाकरअराजकता फैलाने का आरोप लगाया। श्री ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधीवोट चोरी के आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करें और बताएं कि किसमतदाता का अधिकार छीना गया।
उन्होंने कांग्रेस के आपातकाल, जबरननसबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का उल्लेख करते हुए विपक्ष केदोहरे रवैये पर सवाल उठाए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी से अमर्यादितभाषा छोड़कर तथ्यों, प्रमाणों और लोकतांत्रिक जवाबदेही के आधार परराजनीति करने का आग्रह किया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी कहने के लिए तो नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन उन्हें न तथ्यों का पता है, न तर्कों का और न ही नियम-कायदों व कानून का।

उन्हें बस यह पता है कि अराजकता कैसे फैलानी है, अस्थिरताकैसे लानी है, संवैधानिक पदों और संस्थाओं को नीचा कैसे दिखाना है तथादुनिया भर में भारत का नाम बदनाम करके देश की छवि को कमजोर कैसेकरना है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश को आज इतने अस्थिर, अराजक औरअगंभीर नेता प्रतिपक्ष के तमाशे और नखरे झेलने पड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लबों पर वोट चोरी का आरोप रहता है, जबकि दरअसल वे जनादेश सेसीनाजोरी कर रहे हैं। राहुल गांधी की राजनीति का पूरा पैटर्न ही हवा हवाई है। हम तो कहेंगे कि राहुल गांधी हवा हवाई नेता हैं। उनकी बातें, आरोप, हरकतें, प्रदर्शन, तथ्य, तर्क और आंकड़े, सब कुछ हवा हवाई है। जबकिधरातल और असलियत में शून्य बटे सन्नाटा है। राहुल गांधी बार-बार आरोपलगाते हैं और फिर अदालत में जाकर माफी मांगते हैं। यह उनका ट्रैक रिकॉर्डहै। हम इतना ही कहेंगे कि “धूल चेहरे पर थी और वे आईना साफ करते रहे।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 99 चुनाव हारने के बाद भी राहुल गांधी हर सीजनमें यही देखते हैं कि किस पर आरोप लगाना है और ठीकरा कहां फोड़ना है। कभी चुनाव आयोग, कभी ईवीएम, कभी मुख्य चुनाव आयुक्त, तो कभीकिसी और को निशाना बनाया जाता है। अब तो स्थिति यह हो गई है किराहुल गांधी सड़क छाप भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और निराधार आरोप लगारहे हैं। मगर राहुल गांधी, देश को शोर नहीं, सच चाहिए; आरोप नहीं, प्रमाण चाहिए और राजनीतिक बयान नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए।
ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी महामहिम राष्ट्रपति जी के पास गए, जहां उनसे शिकायत के साथ सबूत देनेको कहा गया। लेकिन राहुल गांधी वहां भी बगलें झांकने लगे, भाग गए और चुप्पी साध ली। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी से साफ-साफ कह दिया कि वे न्यायालय को अपनी राजनीति का रणक्षेत्र नहीं बना सकते।
ठाकुर ने कहा कि अब तो राहुल गांधी को यह भी सिखाना पड़ेगा कि किसी मामले की सुनवाई चल रही हो, तो अदालत और मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने की प्रक्रिया क्या होती है। अब राहुल गांधी मुख्य न्यायाधीश से मिलने की बात करने लगे हैं, जबकि मामला अदालत में विचाराधीन है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी देश की न्यायिक व्यवस्था कोधमकाने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि हमारी बात नहीं मानी गई, तो हमआपके खिलाफ भी सड़कों पर उतर आएंगे।
इस पर अदालत ने भी कहा कि उन्हें याचिका दायर करनी होगी। राहुल गांधी पहले भी कई बार अदालत मेंमाफी मांग चुके हैं। अब उन्हें लगता है कि वे सड़कों पर जाकर बार-बार झूठ बोलेंगे और उसे दोहराएंगे, तो लोग उसे सच मान लेंगे। राहुल गांधी औरकांग्रेस पार्टी का फंडा बिल्कुल स्पष्ट है – राज नहीं तो अराजकता फैला दो। देश की जनता को अदालत के सामने अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।
राहुल गांधी को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन राहुलगांधी और कांग्रेस पार्टी अपने आपको एक अतिरिक्त-संवैधानिक संस्थामानते हैं। नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी खुद को नियम, कानून औरसंविधान से ऊपर मानते हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह वही परिवार और पार्टी है, जिन्होंने देश कोअपनी जागीर मानकर रखा है। राहुल गांधी जिस संविधान को हाथ में लेकर चलते हैं, उस संविधान को आपातकाल के समय कांग्रेस के दमन से बचानेका प्रयास देश की जनता, भाजपा और कई अन्य दलों ने किया था।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने तो संविधान को कुचलने का काम किया। जिस पार्टी और परिवार ने संविधान जलाने का काम किया हो, जिस पार्टी और परिवार ने भारत के लाखों युवाओं की जबरन नसबंदी कराई हो और डेढ़ लाख से अधिक लोगोंको जेलों में डाल दिया हो, जहां जेलें कम पड़ गई हों और मीडिया के लोगों तक को जेल में डाल दिया गया हो, आज वही संविधान बचाने की बात कररहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिस पार्टी और परिवार के लोगों ने धांधली करके चुनाव जीते हों औरफिर देश में आपातकाल लगा दिया हो, वे आज चुनावों में धांधली की बात कैसे कर सकते हैं? हम राहुल गांधी को 1989 का चुनाव भी याद दिलाना चाहते हैं। नकली गांधी बनाम असली गांधी, यानी राजीव गांधी बनाम राजमोहन गांधी के बीच हुए चुनाव में कितने मतदान केंद्रों पर लूट हुई थी? राहुल गांधी को देश की आज की युवा पीढ़ी को यह भी बताना चाहिए। इंदिरा गांधी के समय जो कुछ हुआ, उसे भी आज की पीढ़ी को पाठ्यपुस्तकोंमें पढ़ाया जाना चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ईवीएम तथा चुनावआयोग पर सवाल इसलिए खड़े करते हैं, क्योंकि वे वापस मतपत्रों कीव्यवस्था लाना चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि मतपत्रों को लूटने काइतिहास कांग्रेस पार्टी का रहा है। 99 चुनाव हारने के बाद भी राहुल गांधी चुनाव आयोग पर आरोप लगाने पहुंच जाते हैं। देश की न्यायपालि का को धमकाना, संवैधानिक संस्थाओं को धमकी देना और उन्हें अपनी जागीर मानना, यही राहुल गांधी और कांग्रेस का इतिहास रहा है। अंग्रेजी में एककहावत है – “What you see, what you are”, यानी जो आपको दिखाई देता है, वही आपकी सोच को दर्शाता है। आप चुनाव जीतने के लिए जिस तरह के हथकंडों की कल्पना करते हैं, वही आरोप दूसरों पर लगाने लगते हैं। यही कांग्रेस पार्टी की राजनीति है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी चुनाव आयोग पर आरोप तोलगाते हैं, लेकिन सबूत कहां हैं? राहुल गांधी ने नवंबर में सबूत देने की बातकही थी। क्या उन्होंने अब तक कोई सबूत दिया है? क्या राहुल गांधी ने अपनेआरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत किया है? चुनाव आयोग के किसी फैसले से असहमति जताना लोकतंत्र में आपका अधिकार है, लेकिन किसी संवैधानिक पदाधिकारी पर आरोप लगाने और असहमति जताने में बहुत बड़ा अंतर है। यदि राहुल गांधी आरोप लगाते हैं, तो सबूत भी देने होंगे।
राहुल गांधी बताएं कि किस नियम या कानून का उल्लंघन हुआ? कौन-सा आदेशगलत था? किस मतदाता के अधिकार का हनन हुआ और उसके समर्थन में उन्होंने कौन-सा प्रमाण प्रस्तुत किया? ठाकुर ने कहा कि हम खुले मंच से, इस सभा से और आपकी सभी प्रेस कॉन्फ्रेंसों के माध्यम से पूछते हैं कि किस-किस का वोट काटा गया और किसे वोट डालने के अधिकार से वंचित किया गया? राहुल गांधी पूरे देश के आंकड़े सामने नहीं लाते हैं।
जिन क्षेत्रों में एसआईआर की प्रक्रिया चली, वहांचार से पांच महीने तक का समय दिया गया। यदि राहुल गांधी को विपक्ष केनेता के रूप में सवाल पूछने का अधिकार है, तो लगाए गए आरोपों के प्रमाण देना भी विपक्ष की जिम्मेदारी है। देश के सामने सबूत रखिए और अपने दावों की स्वतंत्र जांच का समर्थन कीजिए। यदि राहुल गांधी के आरोपों के समर्थनमें प्रमाण नहीं हैं, तो इस पर स्पष्टता दीजिए। लोकतंत्र में जवाबदेही केवल सरकार की नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष की भी होती है। इसलिए राहुल गांधीअपनी जिम्मेदारी समझते हुए जवाब दें और निराधार आरोप न लगाएं।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि जनादेश पसंद आए तो लोकतंत्र और चुनाव हार जाएं तो वोट चोरी, यहदोहरा रवैया नहीं चल सकता। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है, लेकिन जनादेश को बदनाम करने का लाइसेंस नहीं है। इसलिए हम राहुलगांधी और विपक्षी दलों से कहना चाहते हैं कि आरोपों की राजनीति बंद करेंऔर प्रमाणों के साथ बात करें। सबूत प्रस्तुत करें और निराधार आरोप लगाने, गंदे शब्दों तथा अमर्यादित भाषा का प्रयोग बंद करें। यह देश के नेताप्रतिपक्ष के पद के लिए उचित नहीं है। राहुल गांधी सड़क छाप राजनीति और हवा हवाई बातें करना बंद करें।