दिल्ली पब्लिक स्कूल, शिमला में आईआईएमयू यूथ कनेक्ट सीरीज के तहत राज्यपाल ने विद्यार्थियों से किया संवाद

हिम न्यूज़ शिमला। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि देश को विकसित भारत बनाने की यात्रा में युवाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, शिमला में आयोजित आईआईएमयू यूथ कनेक्ट सीरीज के तहत शिमला के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं में अपार प्रतिभा, कौशल और संस्कार हैं, लेकिन उन्हें उचित अवसर प्रदान करने तथा उनकी क्षमता को रचनात्मक और सकारात्मक दिशा में ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवा राष्ट्र की शक्ति हैं और इस शक्ति को सही दिशा देना तथा आगे बढ़ाना सामूहिक प्रयास होना चाहिए।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद किया, उनके प्रश्नों के उत्तर दिए तथा शिक्षा, देशभक्ति, संस्कृति, अवसरों और जिम्मेदारियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहने और समाज तथा राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री या व्यावसायिक योग्यता प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इससे चरित्र, आत्मविश्वास, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की भावना भी विकसित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी की सोच और व्यक्तित्व को आकार देने तथा उनमें संस्कार एवं देशभक्ति की भावना विकसित करने में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्यों से विचलित न होने और अपने चुने हुए मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश ने नागरिकों को अनेक अवसर प्रदान किए हैं और युवा पीढ़ी के लिए राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।

भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को देश की सभ्यतागत परंपराओं की गहरी समझ विकसित करनी चाहिए और अपनी समृद्ध विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के कुछ पहलुओं को कभी-कभी इस प्रकार प्रस्तुत किया गया, जिससे निम्न भावना पैदा हुई। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भारत के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के प्रति आत्मविश्वास विकसित करना चाहिए।

उन्होंने उस मानसिकता से उबरने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसे अक्सर औपनिवेशिक मानसिकता कहा जाता है, और कहा कि भारत के संवैधानिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान युवा पीढ़ी की मूल्य-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। वंदे मातरम और स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देशभक्ति की भावना ने भारतीयों की पीढ़ियों को राष्ट्र के लिए बलिदान देने की प्रेरणा दी।

उन्होंने विद्यार्थियों से भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस और चंद्रशेखर आजाद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से विशेष रूप से उनके साहस, समर्पण और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को राष्ट्र सर्वाेपरि की भावना को ध्यान में रखते हुए अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार नागरिकता, ईमानदारी, परिश्रम और समाज सेवा के माध्यम से देशभक्ति की अभिव्यक्ति होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश हमें बहुत कुछ देता है; हमें भी देश को कुछ देने की भावना सीखनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को सेवा, करुणा, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने तथा अपनी शिक्षा और कौशल का रचनात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की भावना और आत्मनिर्भरता पर दिया गया बल भारत की अधिक आत्मनिर्भरता की निरंतर यात्रा में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि युवा नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों के सृजन के माध्यम से इस प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि भारत का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के निर्णयों, मूल्यों और कार्यों से आकार लेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास विकसित करने, अपनी विरासत का सम्मान करने, अपनी जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध रहने तथा अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।