शिक्षण कला में परांगत होंगे केंद्रीय विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य

हिम न्यूज़ धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के धौलाधार परिसर एक में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) का शुभारंभ माननीय कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने किया। इस मौके पर केंद्र ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों (आईकेएस) पर अपने पहले अल्पकालिक कार्यक्रम (एसटीपी) के उद्घाटन के साथ अपनी गतिविधियाँ प्रारंभ कीं। यह कार्यशाला मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा संचालित हो रही है , उक्त कार्यशाला में देश भर से 100 से अधिक शिक्षकों ने पंजीकृत होकर भारतीय ज्ञान परम्परा विषय को कैसे प्रमाण सहित रखा जाये अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

उक्त कार्यक्रम के विधिवत शुभारंभ के बाद MMTTC के निदेशक प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने इस केंद्र के शुभारंभ को लेकर कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल के मार्गदर्शन पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से आने वाले समय में यह केंद्र सुदृढ़ होगा। वहीं इसके बाद अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार और कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने अपने विचार रखे।
इस मौके पर कुलपति प्रो. बंसल ने इस अवसर पर कहा कि हमें भारत को भारत की दृष्टि से देखने की आवश्यकता है । जब तक हम भारत को भारतीय दृष्टिकोण से जानेंगे नहीं तब तक हमारी चिंतन धारा श्रेष्ठ नहीं हो सकती, इसलिए भारत , भारती , भारतवर्ष ,भाषा और भूषा में आत्मसात करने की आवश्यकता है । हमारे लिए कौटिल्य का अर्थशास्त्र जीवन का वह सार है जो हमें सामाजिकी ,आर्थिकी और राजनीति के सैद्धांतिक पक्ष को समक्ष रखती है ।

कुलपति ने अपने उद्बोद्धन में कहा कि आज हम खुली आँख से सपना देख रहे हैं, जिस सपने को मैंने एक वर्ष पहले देखा था आज MMTC केंद्र हमारे सामने मूर्त रूप रूप में आया है । जो टीम मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षक केंद्र की है, उन्हें मैं बधाई देता हूँ क्योंकि आगे जाकर यह केंद्र देश के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा ऐसा मेरा विश्वास है । इस अवसर पर अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार ,कुलसचिव प्रो. नरेन्द्र कुमार संख्यान ,MMTTC के निदेशक प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ,अतिरिक्त निदेशक प्रो. सुमन शर्मा ,संयुक्त सचिव प्रो.सूर्य रश्मि रावत ,प्रो. इन्द्रसिंह ठाकुर सहित वित्त अधिकारी ,परीक्षा नियंत्रक सहित विश्वविद्यालय के गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।

इस अवसर पर पहले सत्र में प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर अपने विचार स्रोत वक्ता के रूप में रखें इन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि शून्य यदि भारत ने दिया तो उसे सन्दर्भ के साथ हमें समाज के समक्ष रखने की आवश्यकता है । दूसरे सत्र में अरुण आनन्द ने अपने विचार रखे । प्रो. भागचन्द चौहान ने भी इस सत्र में सभी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया ,प्रो. सूर्य रश्मि रावत ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा ।