हिम न्यूज़, शिमला : हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लगातार टालने की कांग्रेस सरकार की नीयत पर माननीय उच्च न्यायालय ने करारा प्रहार किया है। कई महीनों से सरकार किसी न किसी बहाने—कभी आपदा प्रबंधन अधिनियम, कभी प्रशासनिक अड़चनें—का सहारा लेकर पंचायत चुनावों से भाग रही थी। लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार की सभी दलीलों को खारिज करते हुए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया। यह फैसला हिमाचल की करीब 70 लाख जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत है और सरकार के तानाशाही रवैये पर करारा तमाचा है।
उन्होंने कहा कि यह जगजाहिर है कि कांग्रेस सरकार पंचायत चुनावों से इसलिए डर रही थी क्योंकि उसे अपनी नाकामियों का जवाब जनता को देना पड़ता। हाईकोर्ट में भी सरकार ने कमजोर और खोखली दलीलें पेश कीं, जिन्हें लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने विवेकपूर्ण ढंग से सभी पहलुओं पर विचार किया, यहां तक कि फरवरी-मार्च में स्कूल परीक्षाओं और मतदान केंद्रों के उपयोग जैसे मुद्दों को भी ध्यान में रखा, लेकिन इसके बावजूद लोकतंत्र को बंधक बनाने की सरकारी कोशिश को अस्वीकार कर दिया।
जमवाल ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बात यह है कि अब जब फैसला सरकार के खिलाफ आया है, तो कांग्रेस और मुख्यमंत्री की बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है। खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की कहावत सरकार पर पूरी तरह फिट बैठती है। पहले चुनाव टालने के बहाने, अब हाईकोर्ट के फैसले पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं। जब फैसले अपने पक्ष में आते हैं तो अदालतें सही, और जब फटकार लगती है तो न्यायपालिका की भूमिका पर संदेह—यह मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार की मानसिकता को उजागर करता है।
पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण भारत की रीढ़ हैं। इनके बिना न तो विकास संभव है और न ही जनभागीदारी। कांग्रेस सरकार चुनाव टालकर न सिर्फ लोकतंत्र का गला घोंट रही थी बल्कि ग्रामीण विकास को भी जानबूझकर रोक रही थी। हाईकोर्ट ने इस साजिश को नाकाम कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संविधान से ऊपर कोई सरकार नहीं हो सकती। अदालत ने जनता की आवाज को पूरी गंभीरता से सुना और उसी के अनुरूप फैसला सुनाया।
भारतीय जनता पार्टी माननीय उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक और साहसिक फैसले का स्वागत करती है। भाजपा पंचायत चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है और जनता के बीच जाकर कांग्रेस सरकार की विफलताओं का हिसाब लेगी। अब सरकार को चाहिए कि फैसले का सम्मान करे, न कि उस पर सवाल उठाकर अपनी कुंठा जाहिर करे। लोकतंत्र से भागने की आदत छोड़कर चुनावी मैदान में उतरना ही कांग्रेस के लिए एकमात्र रास्ता है क्योंकि जनता अब सब देख और समझ रही है।