हिम न्यूज़ शिमला। भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश की प्रदेश प्रवक्ता सांदीपनि भारद्वाज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा आरडीजी (Revenue Deficit Grant) को लेकर दिए गए बयान पर कड़ा और आक्रामक पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति के लिए केंद्र सरकार को दोष देने की नौटंकी कर रहे हैं, जबकि हिमाचल की वित्तीय बदहाली की असली वजह कांग्रेस सरकार की भ्रष्ट, निकम्मी और लूट आधारित नीतियां हैं।

भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू आरडीजी बंद होने का रोना रोकर जनता की सहानुभूति बटोरना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह जवाब देना चाहिए कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को जो हजारों करोड़ रुपये की सहायता विभिन्न योजनाओं के तहत भेजी, उसका उपयोग विकास कार्यों में क्यों नहीं हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में फंड्स का ऐसा खुला दुरुपयोग किया है, जिसकी मिसाल पूरे देश में नहीं मिलती। केंद्र से हिमाचल को भेजी गई राशि को योजनाओं पर खर्च करने के बजाय कांग्रेस सरकार ने अफसरशाही पर दबाव डालकर अनेक विभागों से झूठे और जबरदस्ती बनवाए गए यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC) प्राप्त किए और उस धन को सीधे प्रदेश की ट्रेजरी में डालकर केवल कर्मचारियों की सैलरी, सरकार की मौज-मस्ती और अपने राजनीतिक खर्चों में झोंक दिया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू प्रदेश के विकास की नहीं, बल्कि अपनी कुर्सी और कांग्रेस नेताओं के हितों की चिंता कर रहे हैं। हिमाचल को केंद्र से जो पैसा रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए मिला, उसे भी कांग्रेस सरकार ने नहीं छोड़ा। रेलवे और स्वास्थ्य के बड़े एमओयू प्रोजेक्ट्स में भी विभागों पर दबाव बनाकर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट हासिल किए गए और करोड़ों रुपये का फंड ट्रेजरी में ट्रांसफर कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का पुराना चरित्र है—जहां भी पैसा दिखता है वहां विकास नहीं, लूट शुरू हो जाती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता को यह बताएं कि आखिर क्यों केंद्रीय योजनाओं के पैसे अस्पतालों, रेल परियोजनाओं और जनकल्याण के कामों पर लगने के बजाय सरकारी खजाने में डालकर खर्च कर दिए गए?संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार इस स्तर तक बढ़ चुका है कि जिन भवनों और सरकारी निर्माण कार्यों के टेंडर पहले 30 करोड़ रुपये में लगने शुरू हुए थे, वही टेंडर आज कांग्रेस सरकार में बढ़कर 100 से 150 करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं। यह पैसा जनता का है, यह पैसा केंद्र से आया था, जिसे गलत यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट के आधार पर ट्रांसफर कर अब महंगे टेंडरों और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू को यह समझना चाहिए कि जनता अब कांग्रेस के बहाने और झूठे आरोपों को स्वीकार नहीं करेगी। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कांग्रेस ने खुद बर्बाद किया है और अब केंद्र पर आरोप लगाकर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रही है। प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करना चाहती है कि हिमाचल को विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के चलते सहायता की आवश्यकता रहती है, लेकिन सहायता के नाम पर कांग्रेस सरकार ने जिस प्रकार से भ्रष्टाचार और फंड दुरुपयोग किया है, उसने प्रदेश को कर्ज और आर्थिक संकट में धकेल दिया है
उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस सरकार में ईमानदारी है तो वह एक श्वेत पत्र जारी करे कि केंद्र से मिले फंड कहां-कहां खर्च किए गए और किन योजनाओं में वास्तविक काम हुआ।भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को हिमाचल प्रदेश के विकास की कोई चिंता नहीं है। उनका एकमात्र एजेंडा यही है कि केंद्र से पैसा कैसे आए और उसे किस प्रकार अपने राजनीतिक स्वार्थों और भ्रष्टाचार में इस्तेमाल किया जाए। यही कारण है कि आज प्रदेश की जनता त्रस्त है और कांग्रेस सरकार पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा प्रदेश की जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस सरकार की लूट, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।
कांग्रेस सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है, पंचायती राज चुनाव रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचना शर्मनाक
भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने पंचायती राज चुनावों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस सरकार लगातार लोकतंत्र का गला घोंटने का कार्य कर रही है और अब चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर एक बार फिर पंचायत चुनावों को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि एसएलपी में Petitioners और Respondents की सूची देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि यह मामला “सरकार बनाम सरकार” बन चुका है। एक तरफ सरकार के ही शीर्ष अधिकारी याचिकाकर्ता हैं और दूसरी तरफ चुनाव आयोग व जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिवादी बनाए गए हैं। यह कांग्रेस सरकार की अंदरूनी अव्यवस्था, प्रशासनिक अराजकता और लोकतांत्रिक प्रणाली के प्रति नकारात्मक सोच को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र की सबसे मजबूत आधारशिला होते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार जानबूझकर इन्हें रोकना चाहती है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि मुख्यमंत्री सुक्खू पंचायत चुनाव करवाने से डर रहे हैं? क्या कांग्रेस सरकार को जनता के बीच जाने का साहस नहीं है? प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार ने पंचायतों को कमजोर करने, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को समाप्त करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बनाने की नीति अपनाई है। अब सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर चुनावों को टालने की साजिश की जा रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करती है कि लोकतंत्र में चुनाव कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य प्रक्रिया है। जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है और कांग्रेस सरकार उस अधिकार को छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा पंचायत चुनावों में किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को स्वीकार नहीं करेगी और कांग्रेस सरकार के लोकतंत्र विरोधी षड्यंत्र के खिलाफ सड़कों से लेकर न्यायालय तक जनहित की लड़ाई लड़ेगी।
उन्होंने मांग की कि कांग्रेस सरकार तत्काल राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर पंचायत चुनाव समय पर करवाए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने का काम बंद करे।