सतत विकास सुरक्षा और आधुनिक तकनीक से सड़क संरचना को सुदृढ़ कर रही प्रदेश सरकार

हिम न्यूज़ शिमला। राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश की सड़क संरचना को सुदृढ़ करने के लिए व्यवस्थित एवं समग्र दृष्टिकोण से निरंतर प्रयासरत है। सरकार द्वारा सड़कों में सुरक्षा, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण रखरखाव तथा सड़क परिसंपत्तियों के संरक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य एक ऐसा सुदृढ़, सुरक्षित और विश्वसनीय सड़क नेटवर्क तैयार करना है, जो राज्य के दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र और चुनौतीपूर्ण मौसम की परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

हिमाचल प्रदेश में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये गांवों और समुदायों को बाजारों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा तथा अन्य आवश्यक सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही, सड़कों का कृषि, बागवानी, उद्योग और वानिकी क्षेत्रों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान हैं। लगभग शून्य से शुरुआत करते हुए राज्य ने सड़क निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। 31 अगस्त, 2026 तक राज्य में 41,903 किलोमीटर मोटर योग्य सड़कें हैं, जो 15,608 गांवों को सड़क सुविधा प्रदान कर रही हैं। पहाड़ी भू-भाग में फैले इतने व्यापक सड़क नेटवर्क की मजबूती, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी अत्यंत आवश्यक है।

प्रदेश सरकार ने सड़कों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए फरवरी 2026 में सड़क जल निकासी नीति स्वीकृत की है। पहाड़ी क्षेत्रों में पानी को सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का एक प्रमुख कारण मानते हुए इस नीति में सड़क योजना एवं डिजाइन का अभिन्न हिस्सा जल निकासी व्यवस्था को बनाया गया है। वर्षा की तीव्रता और जलग्रहण क्षेत्र की विशेषताओं के आधार पर जल निकासी संरचनाओं की योजना बनाई जा रही है।

इसके साथ ही भूस्खलन और पानी के रिसाव की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में निवारक उपायों का प्रावधान किया गया है। सड़क नालियों में अवरोध उत्पन्न करने या उनके दुरुपयोग के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई को भी मजबूत किया जा रहा है, जिससे बेहतर योजना, रखरखाव और सड़क परिसंपत्तियों के संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। नियोजित बुनियादी ढांचे के साथ सरकार का बल अंतिम छोर तक सड़क संपर्क उपलब्ध करवाने पर भी है।

जीप योग्य एवं एंबुलेंस लिंक सड़कों के लिए दिशा-निर्देश अधिसूचित किए गए हैं ताकि इनके डिजाइन, निर्माण, प्रमाणन और रखरखाव में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके। इन दिशा-निर्देशों में सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट, जल निकासी, रिटेनिंग एवं ब्रेस्ट वॉल, ढलान संरक्षण तथा सड़क सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटी संपर्क सड़कें भी निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, बाजारों और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच के लिए यह महत्वपूर्ण है।

मौजूदा बुनियादी ढांचे का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। हिमाचल प्रदेश सड़क बुनियादी ढांचा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026, के तहत सड़क संरचना की डिजिटल और भू-समन्वित मैपिंग, त्वरित प्रवर्तन तथा क्षतिग्रस्त सड़क परिसंपत्तियों की शीघ्र बहाली का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों से सड़क बुनियादी ढांचे के संरक्षण और क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की समयबद्ध बहाली के लिए व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

दैनिक सड़क प्रबंधन में भी आधुनिक तकनीक को शामिल किया जा रहा है। इसके लिए एक केंद्रीकृत रोड स्टेटस इन्फॉर्मेशन सिस्टम विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जिसके माध्यम से विशेषकर मानसून और आपदा की स्थिति में सड़कों के बंद होने, बहाली और संपर्क की स्थिति से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाई जा सकेगी। वर्क्स एंड अकाउंट्स मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे माप पुस्तिका, बिलिंग तथा निर्माण कार्यों और लेखा संबंधी अन्य प्रक्रियाओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा सके। इससे कार्यों के अधिक प्रभावी प्रबंधन तथा सूचनाओं की बेहतर उपलब्धता में सहायता मिलेगी।

सड़क सुरक्षा भी वर्तमान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। जुलाई 2026 में स्वीकृत सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति के तहत सड़क परियोजनाओं के विभिन्न चरणों में सुरक्षा ऑडिट का प्रावधान किया गया है, ताकि डिजाइन, निर्माण तथा मौजूदा सड़कों में सुरक्षा संबंधी कमियों की समय रहते पहचान कर उनका समाधान किया जा सके। इसके साथ ही, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक समर्पित सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ स्थापित किया जा रहा है।

सड़कों के रखरखाव की व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। पैच वर्क के लिए मानक संचालन प्रक्रिया के माध्यम से गड्डों और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के लिए सामग्री, कार्य-विधि और समय-सीमा का एक समान ढांचा निर्धारित किया गया है। इससे कार्यों में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
प्रदेश सरकार साझा गलियारों में पानी, बिजली और दूरसंचार सेवाओं के लिए भूमिगत बहु-उपयोगिता डक्ट विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। इससे बार-बार सड़क काटने और खुदाई करने की आवश्यकता कम होगी तथा सड़क बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।

इन पहलों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सड़क प्रबंधन की एक अधिक रोकथाम-आधारित, समन्वित और आधुनिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। बेहतर सड़क संपर्क, प्रभावी जल निकासी, सड़क सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और आधुनिक रखरखाव की तकनीकों को एकीकृत करते हुए राज्य सरकार का लक्ष्य एक ऐसा सड़क नेटवर्क तैयार करना है, जो अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय, स्थायी और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक मजबूत हो।