हिमाचल में चल रही “एफआईआर की सरकार

हिम न्यूज़, शिमला। भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने हमीरपुर सदर से भाजपा विधायक आशीष शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सरकार जनता और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का राजनीतिक एवं तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सहारा ले रही है। कपूर ने इसे कांग्रेस सरकार की “एफआईआर की राजनीति” करार दिया।

 

24 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हमीरपुर सदर थाना में विधायक आशीष शर्मा के खिलाफ एपीएमसी हमीरपुर के चेयरमैन अजय शर्मा की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ है। शिकायत में गांधी चौक पर भाजपा के प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री और सरकार को लेकर दिए गए बयानों का उल्लेख किया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

 

त्रिलोक कपूर ने कहा कि आशीष शर्मा ने सार्वजनिक मंच से जमीन की खरीद-फरोख्त, हमीरपुर बस अड्डे और रोबोटिक सर्जरी उपकरणों की खरीद सहित कई विषयों पर सरकार से जवाब मांगा था। प्रदर्शन की रिपोर्ट में आशीष शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री के परिवार से संबंधित लगभग 750 कनाल जमीन की खरीद, हस्तांतरण और बाद में उसके मूल्यांकन को लेकर गंभीर आरोप लगाए जाने का उल्लेख है। कपूर ने कहा कि ये विधायक द्वारा लगाए गए आरोप हैं और यदि सरकार इन्हें गलत मानती है तो उसे दस्तावेजों और तथ्यों के साथ जनता के सामने जवाब रखना चाहिए।

 

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में किसी विधायक द्वारा सरकार से सवाल पूछना अपराध नहीं हो सकता। आरोपों का जवाब एफआईआर नहीं, तथ्यों से दिया जाना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि जमीन से जुड़े आरोपों में तथ्य क्या हैं, बस अड्डे और रोबोटिक सर्जरी से जुड़े सवालों पर उसका पक्ष क्या है। एफआईआर दर्ज होने से ये सवाल समाप्त नहीं हो जाते।”

 

कपूर ने कहा कि यह पहली घटना नहीं है। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता राजेंद्र राणा के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस के अनुसार वे मामले शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए और उनकी जांच की जा रही थी। भाजपा नेताओं ने उस समय इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया था।

 

उन्होंने कहा कि इससे पहले जुलाई 2026 में विजिलेंस ने विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर 2013 से 2023 के बीच अर्जित संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की थी। सुधीर शर्मा ने उस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था।

 

कपूर ने यह भी कहा कि दिसंबर 2025 में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भाजपा में शामिल हुए वर्तमान एवं पूर्व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों को लेकर सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया था। उस समय आशीष शर्मा के खिलाफ खनन सामग्री से जुड़े चोरी और धोखाधड़ी के एक मामले का भी उल्लेख सामने आया था।

 

त्रिलोक कपूर ने कहा, “एक के बाद एक विपक्षी नेताओं पर एफआईआर दर्ज होने से गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या असहमति व्यक्त करना, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और सार्वजनिक मंच से जांच की मांग करना अब एफआईआर का आधार बनेगा?”

 

उन्होंने कहा कि भाजपा इन मामलों में कानून की प्रक्रिया का सम्मान करती है, लेकिन निष्पक्ष जांच और पुलिस-प्रशासन की स्वतंत्र कार्यप्रणाली भी उतनी ही आवश्यक है। “यदि किसी के पास किसी आरोप के विरुद्ध तथ्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए और कानून अपना काम निष्पक्षता से करे। लेकिन पुलिस व्यवस्था को राजनीतिक बहस का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए।”

 

कपूर ने कहा कि भाजपा सरकार से उठाए गए मुद्दों पर तथ्यात्मक जवाब मांगती रहेगी और लोकतांत्रिक तरीके से जनता के मुद्दे उठाती रहेगी।