क्या मुख्यमंत्री का व्यवहार “क्रेडिट पिपासु” : अनुराग सिंह ठाकुर 

हिम न्यूज़, शिमला : पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर पिछले छह दशकों से चले आ रहे गतिरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश और प्रदेश में कांग्रेस की अनेक सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन किशाऊ बांध परियोजना की समस्या का समाधान नहीं हो सका मगर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने संवाद और सहमति के माध्यम से इस लंबे समय से लंबित विषय को समाधान तक पहुंचाया है।

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के निर्देश पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल की पहल पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर किशाऊ परियोजना को लेकर वर्षों से लंबित मतभेदों का समाधान किया गया। मैं सर्वसम्मति से लिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए आदरणीय प्रश्नमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर धामी जी, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी का आभार प्रकट करता हूँ। 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे परियोजना के आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इतने वर्षों में केंद्र और प्रदेश में कांग्रेस की अनेक सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इस महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हो पाया मगर मोदी सरकार ने इस समस्या का समाधान करने का काम किया है”

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है और इसके लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार का वहन केंद्र सरकार करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत भार सहभागी राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना के संबंध में हिमाचल प्रदेश के हिस्से की विद्युत लागत को लेकर भी अन्य सहभागी राज्यों द्वारा वित्तीय भार साझा करने की व्यवस्था बनी है, जिससे हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा। किशाऊ परियोजना केवल एक बांध अथवा बिजली परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत की जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल और पर्यावरणीय संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना से 97,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और लगभग 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य है”

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “ यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस ऐतिहासिक समझौते से छह राज्यों के हित जुड़े हैं और जिसका समाधान केंद्र सरकार के नेतृत्व में हुआ है, उसे हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री द्वारा “क्रेडिट पिपासु” बनकर व्यक्तिगत राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब परियोजना पर छह दशकों से समाधान नहीं निकल पाया और केंद्र सरकार ने सभी संबंधित राज्यों को साथ लेकर सहमति बनाई, तब इसका श्रेय लेने की होड़ उचित नहीं है। किशाऊ परियोजना पर हुआ समझौता सहकारी संघवाद और संवाद के माध्यम से समाधान का उदाहरण है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्षों से लंबित विषय को आगे बढ़ाया है। ऐसे में राजनीतिक श्रेय की बजाय हिमाचल प्रदेश सहित सभी सहभागी राज्यों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इतने महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर संकीर्ण राजनीति करने के बजाय सभी पक्षों के योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए”

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जिस दृढ़ता और संवाद की भावना के साथ किशाऊ परियोजना का समाधान सुनिश्चित किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित जल, ऊर्जा और विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।