गारंटियां पूरी कर सरकार ने निभाया चुनावी वायदा : मुख्यमंत्री

हिम न्यूज़, शिमला : मात्र साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में वर्तमान प्रदेश सरकार ने अपनी सभी चुनावी गारंटियों को पूरा कर लोगों से किए वादे को निभा दिया है। मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में वर्तमान सरकार ने 1.36 लाख कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की। इस निर्णय से कांग्रेस ने अपनी पहली गारंटी को पूरा किया। मात्र 2-3 हजार रुपये प्रति माह पेंशन पाने वाले रिटायर्ड एनपीएस कर्मचारियों को अब 20 से 40 हजार रुपये की पेंशन मिल रही है जिससे वह सम्मानजनक तरीके से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

दूसरी गारंटी के तहत इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह प्रदान किये जा रहे हैं। योजना के पहले चरण में प्रदेश की 35,687 महिलाओं को सम्मान निधि के रूप में 29.12 करोड़ रुपये जारी किए गए और अब दूसरे चरण में एक लाख अति गरीब परिवारों की महिलाओं को 1500 रुपये पेंशन मिलने जा रही है। यही नहीं, युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश में 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना आरम्भ की गई है। राजीव गांधी ई-टैक्सी योजना के तहत युवाओं को टैक्सी खरीद के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा निजी भूमि पर 100 किलोवाट से 2 मेगावाट तक सोलर पैनल लगाने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में 5 प्रतिशत और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्ट-अप योजना लागू की गई है। इस वित्त वर्ष से प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये, मक्की का 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये, पांगी घाटी के जौ का मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया। इसके अलावा हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90 से बढ़ाकर 150 रुपये और पहली बार अदरक के लिए समर्थन मूल्य 30 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अपने वादे को निभाते हुए शिक्षा प्रदान करने के लिए सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से इंग्लिश मीडियम शुरू किया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोले जा रहे है। 42 विधानसभा क्षेत्रों में डे-बोर्डिंग स्कूल के निर्माण को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है तथा 10 स्कूलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये तथा भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया है। इसके अलावा वर्तमान सरकार ने एक और गारंटी को पूरा करते हुए पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिए 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट की खरीद की जा रही है।

रोजगार देने के वादे को पूरा करते हुए केवल सरकारी क्षेत्र में ही पिछले तीन वर्षों में 23,200 से अधिक युवाओं को नौकरी दी गई है। हजारों की संख्या में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है, जिनमें से अकेले 9535 अध्यापकों के पद भरे जा रहे हैं। निजी क्षेत्र में भी 51,400 युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास भत्ता योजना एवं औद्योगिक कौशल भत्ता योजना के अन्तर्गत 82,515 नए लाभार्थियों को जोड़ा गया है। एक लाख युवाओं को आजीविका परामर्श एवं मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया गया। सरकार ने 14 रोजगार मेले एवं 1107 कैम्पस इंटरव्यू आयोजित कर 18,013 युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान किए।

वर्तमान कांग्रेस सरकार ने बागवानों को उनके उत्पादों की कीमत तय करने का अधिकार सुनिश्चित किया है तथा उन्हें उत्पादों के बेहतर दाम मिल रहे हैं। इसके अतिरिक्त यूनिवर्सल कार्टन प्रणाली लागू होने से बागवानों की आय बढ़ी है। हिमाचल प्रदेश बागवानी नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य है तथा मंडी मध्यस्थता योजना में सेब, किन्नू, माल्टा, संतरा और गलगल जैसे फलों के समर्थन मूल्य में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा के साथ-साथ पेट स्कैन, थ्री टेस्ला एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आधुनिक मशीनें स्थापित की, ताकि प्रदेश में ही मरीजों को सस्ता और सुलभ इलाज मिल सके।

प्रदेश सरकार ने ‘अपना परिवार-सुखी परिवार’ योजना के तहत अति गरीब परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली प्रति माह देने का निर्णय लिया है। इस योजना से एक लाख परिवार लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने न केवल सभी चुनावी वादों को निभाया बल्कि उससे भी बढ़कर समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं आरम्भ कीं ताकि ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती मिलने के साथ-साथ उपेक्षित वर्ग का कल्याण सुनिश्चित हो सके।