हिम न्यूज़,कुल्लू :हिमाचल दिवस की 78वीं वर्षगांठ के अवसर पर विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और भव्य परेड की सलामी ली।
समारोह में पुलिस, आईटीबीपी, महिला पुलिस टुकड़ी, होमगार्ड, जूनियर रेड क्रॉस तथा होमगार्ड बैंड्स की टुकड़ियों ने भव्य एवं आकर्षक मार्च-पास्ट प्रस्तुत किया।
लोगों को संबोधित करते हुए, सुंदर सिंह ठाकुर ने प्रदेशवासियों एवं जिला वासियों को हिमाचल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं, जो प्रदेश के समग्र विकास और समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण को समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनसेवा को अपना मूल मंत्र बनाया है और इसी भावना के साथ हिमाचल को आत्मनिर्भर व समृद्ध बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश हित में कई कड़े लेकिन आवश्यक फैसले लिए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि पहली ही कैबिनेट बैठक में 1 लाख 36 हजार कर्मचारियों को ओपीएस प्रदान कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान दिया गया। विधायक ने कहा कि सरकार द्वारा राजस्व वृद्धि पर बल देते हुए पिछले तीन वर्षों में 49 हज़ार 500 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है।। आगामी दो वर्षों में प्रदेश में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। ग्रीन पंचायत कार्यक्रम के तहत सभी ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाॅट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा रही है । युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्वरोज़गार स्टार्ट-अप योजना शुरू कि गई है। इसके अंतर्गत पहले चरण में ई-टैक्सी खरीद के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी और निश्चित आय का प्रावधान, दूसरे चरण में राज्य सरकार निजी भूमि पर 100 किलोवाट से 2 मेगावाट के सौर पैनल स्थापित करने के लिए ब्याज पर सब्सिडी तथा जनजातीय क्षेत्रों में 5 प्रतिशत सब्सिडी और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में 4 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि तीसरे चरण में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वन संपदा पर सभी का समान अधिकार है और इसके के संरक्षण के लिए ‘मिशन 32 प्रतिशत’ शुरू करने का निर्णय लिया है जिसके तहत वर्ष 2030 तक वन आवरण को बढ़ाकर 32 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि गांव का पैसा गांव में ही रहे और युवाओं को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। इसके लिए मनरेगा, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, होम-स्टे योजना, राजीव गांधी वन संवर्धन योजना सहित अनेक योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। दूध उत्पादकों को बड़ी राहत देते हुए गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 से बढ़ाकर 61 रुपये तथा भैंस के दूध का मूल्य 47 से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जिससे हिमाचल देश का सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाला राज्य बना है।हमारी सरकार ने गद्दी, गुज्जर, किन्नौरा और अन्य संबंधित समुदायों के 40 हजार से अधिक परिवारों के लिए एक सशक्त नीति बनाने हेतु 300 करोड़ रुपये की योजना शुरू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि गेहूं पर 80 रुपये, मक्का पर 50 रुपये और हल्दी पर 150 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। राज्य में पहली बार अदरक की खरीद पर 30 रुपये प्रति किलो के समर्थन मूल्य पर करने का निर्णय लिया गया है। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हमारी सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग के गठन का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना के तहत पात्र महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा देकर उनकी शिक्षा, आवास और रोजगार की जिम्मेदारी सरकार उठा रही है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन में ऐतिहासिक पहल
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये से पुराने उपकरणों को बदलने का निर्णय लिया गया है। शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है,राज्य में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत एक क्रांतिकारी पहल है। शिमला के चमियाणा, आईजीएमसी, टांडा और नेरचौक चिकित्सा महाविद्यालय में यह सुविधा उपलब्ध करवाई जा चुकी है जबकि हमीरपुर को जल्दी ही प्रदान की जाएगी
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में हमारे प्रयास रंग लाए हैं और हमने पूर्णसाक्षर राज्य बनने का मील पत्थर हासिल किया है। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के अनुसार हिमाचल को देश में 5वां स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि 2021 में हिमाचल 21वें स्थान पर था। बच्चों के पढ़ने और सीखने के स्तर में हिमाचल प्रथम आंका गया है। शिक्षा क्षेत्र में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम, सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने और राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना जैसे कदम उठाए गए हैं। हमारी सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों को चरणबद्ध माध्यम से सीबीएसई से संबद्ध करने का निर्णय लिया है