हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के कुलपति प्रो. महावीर सिंह द्वारा पुस्तक का विमोचन

हिम न्यूज़ शिमला। जेंडर अध्ययन और अर्थशास्त्र के बढ़ते साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में, Gender Economics: Issues and Challenges नामक पुस्तक, जिसे डॉ. धर्म पाल, डॉ. अजय सूद तथा श्री प्रेम प्रकाश ने संयुक्त रूप से लिखा है, का औपचारिक विमोचन आज दिनांक 31 मार्च, 2026 को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के कुलपति द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीन कॉलेज एंड डेवलपमेंट काउंसिल, प्रोफेसर हरि मोहन तथा सी.डी.ओ.ई. के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार भी उपस्थित रहे।

यह पुस्तक समकालीन समाज की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक—लैंगिक असमानता—पर केंद्रित है और समावेशी तथा सतत विकास नीतियों के निर्माण में जेंडर-संवेदनशील आर्थिक विश्लेषण की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। पिछले कुछ दशकों में जेंडर संबंधी मुद्दे विश्वभर में शैक्षणिक विमर्श, सार्वजनिक नीति तथा विकास योजनाओं के केंद्र में आ गए हैं। इस बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए, लेखकों ने जेंडर अर्थशास्त्र को व्यवस्थित, व्यापक तथा विद्यार्थियों के लिए सुगम रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

यह पुस्तक हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा द्वारा निर्धारित एम.ए. अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई है। यह अर्थशास्त्र तथा संबंधित विषयों के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करती है। पुस्तक न केवल परीक्षा-उन्मुख तैयारी में सहायक है, बल्कि जेंडर आधारित आर्थिक चुनौतियों के प्रति आलोचनात्मक सोच और विश्लेषणात्मक समझ को भी प्रोत्साहित करती है।

इस पुस्तक में अठारह सुव्यवस्थित अध्याय सम्मिलित हैं, जो जेंडर अर्थशास्त्र के सैद्धांतिक आधार से लेकर उसके व्यावहारिक पक्षों तक क्रमबद्ध रूप से विषय-वस्तु को प्रस्तुत करते हैं। इसकी शुरुआत अर्थशास्त्र में जेंडर दृष्टिकोण तथा महिलाओं के विकास संबंधी अवधारणाओं से होती है और आगे चलकर जेंडर समानता के साथ विकास, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, श्रम बाजार में असमानताएं तथा मुख्यधारा के आर्थिक सिद्धांतों की नारीवादी आलोचना जैसे जटिल विषयों को समाहित करती है। वैश्वीकरण, गरीबी का स्त्रीकरण, अवैतनिक कार्य, परिवार के भीतर निर्णय-निर्माण तथा कार्यबल में महिलाओं की बदलती भागीदारी जैसे समकालीन मुद्दों पर विशेष बल दिया गया है।

लेखकों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रायः शामिल महत्वपूर्ण विषयों—जैसे उत्पादक एवं प्रजनन कार्य, वेतन असमानता, मानव पूंजी निर्माण, समय-उपयोग विश्लेषण तथा परिवार अर्थशास्त्र—को भी विस्तार से प्रस्तुत किया है। अंतिम अध्यायों में नीतिगत विषयों जैसे जेंडर बजटिंग, जेंडर मेनस्ट्रीमिंग, जेंडर-संवेदनशील योजना, सामाजिक सुरक्षा उपाय तथा सार्वजनिक नीति में जेंडर दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान दिया गया है। विषय-वस्तु को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे अवधारणाओं की स्पष्टता बनी रहे और साथ ही शैक्षणिक गुणवत्ता भी कायम रहे।

इस अवसर पर कुलपति महोदय ने लेखकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक आर्थिक प्रक्रियाओं में लैंगिक असमानताओं को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह पुस्तक विद्यार्थियों और अध्यापकों के साथ-साथ शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, योजनाकारों तथा सामाजिक सुधारकों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी, जो लैंगिक समानता और समावेशी विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं।