हिम न्यूज़ शिमला। माननीय सदस्य विपिन सिंह परमार ने विधानसभा में पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सदन में अक्सर हत्या, लूट, नशा और अन्य अपराधों पर चर्चा होती है, लेकिन कई बड़े और संगठित अपराध ऐसे हैं जो कुछ समय तक मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद फाइलों में दबा दिए जाते हैं।

परमार ने पालमपुर के बनूरी क्षेत्र में करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 80 वर्ष पुरानी पुश्तैनी जमीन को फर्जी दस्तावेजों और बनावटी कानूनी वारिसों के माध्यम से अन्य लोगों के नाम कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल राजस्व विभाग के अधिकारियों और कुछ प्रॉपर्टी डीलरों की मिलीभगत से हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस महिला के नाम पर जमीन दिखाई गई, वह कभी उस क्षेत्र की निवासी ही नहीं थी, फिर भी फर्जी एफिडेविट और गवाही के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र तक जारी कर दिया गया। यह अत्यंत गंभीर मामला है और आज तक इस पर एफआईआर दर्ज न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
परमार ने “हिमाचल ऑन सेल” का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) के मामलों में बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में सैकड़ों मामलों में बिना सरकार की मंजूरी के भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति दे दी गई, जो कि नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खनन माफिया, शराब माफिया और अब जंगल माफिया सक्रिय हो चुके हैं, जिससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है बल्कि समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
परमार ने आरोप लगाया कि अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है और कुछ मामलों में पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नशा मुक्ति के लिए सामाजिक कार्य कर रहा है तो उसे प्रोत्साहन मिलना चाहिए, न कि प्रताड़ित किया जाना चाहिए। उन्होंने सुलह विधानसभा क्षेत्र में अवैध खनन और जल स्रोतों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रशासन को इस दिशा में तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
विपिन परमार ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को वीआईपी ड्यूटी और राजनीतिक दबाव से मुक्त कर अपने मूल दायित्व—कानून व्यवस्था बनाए रखने—पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि पालमपुर भूमि घोटाले में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। CLU मामलों की उच्च स्तरीय जांच हो खनन, शराब और जंगल माफिया पर कड़ी कार्रवाई हो। पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जाए।
अंत में परमार ने कहा कि यदि समय रहते इन मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह प्रदेश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती बन जाएगा।