अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में हमीरपुर ज़िले के कम क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का मुद्दा उठाया

हिम न्यूज़ हमीरपुर/नई दिल्ली। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान हमीरपुर जिले में बैंकों द्वारा कम ऋण वितरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने देश में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति, क्षेत्रीय असंतुलन और ऋण वसूली न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इस पर केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने विस्तृत उत्तर देते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने वक्तव्य की शुरुआत करते हुए केंद्र की एनडीए सरकार के कार्यकाल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति में आए ऐतिहासिक सुधार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगभग बारह वर्ष पहले जब एनडीए सरकार सत्ता में आई थी तब देश के बारह में से ग्यारह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन ढांचे के अंतर्गत थे, जो गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति को दर्शाता था। आज सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लाभ में हैं, जो सरकार की दूरदर्शी नीतियों और सशक्त नेतृत्व का परिणाम है।

राष्ट्रीय स्तर पर बैंकिंग क्षेत्र की इस सफलता का उल्लेख करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने हमीरपुर जिले की एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि हमीरपुर जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात मात्र 23.39 प्रतिशत है, जो देश में सबसे कम अनुपातों में से एक है। इसका अर्थ यह है कि जिले के लोग बैंकों में पर्याप्त जमा करते हैं, लेकिन उसी अनुपात में उन्हें ऋण उपलब्ध नहीं हो पाता। इससे स्थानीय किसानों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को वित्तीय अवसरों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

अनुराग सिंह ठाकुर ने वित्त मंत्री से यह जानना चाहा कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए केंद्र सरकार क्या कदम उठा रही है, विशेषकर हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए संस्थागत ऋण तक पहुंच को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने ऋण वसूली न्यायाधिकरणों में लंबित मामलों और देरी की समस्या का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने कॉरपोरेट ऋण समाधान के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाया है, लेकिन छोटे ऋण मामलों से जुड़े ऋण वसूली न्यायाधिकरणों में अभी भी मामलों के निस्तारण में अधिक समय लगता है। उन्होंने इन न्यायाधिकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने और प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए आवश्यक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में क्षेत्रीय असंतुलन एक वास्तविक चुनौती है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से केंद्र सरकार और बैंक मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। बैंकों को विभिन्न क्षेत्रों में जमा और ऋण वितरण के बीच संतुलन बनाने के लिए निरंतर मार्गदर्शन और निगरानी की जा रही है।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ राज्यों में स्थिति इसके विपरीत है, जहां जमा अधिक है लेकिन ऋण उठाव कम है। ऐसे क्षेत्रों में बैंकों को उद्योग संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं के साथ जोड़कर संवाद बढ़ाया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर ऋण वितरण को प्रोत्साहित किया जा सके और असंतुलन को दूर किया जा सके। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहां जमा की आवश्यकता है वहां पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों और जिन लोगों को ऋण की आवश्यकता है उन्हें समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।

ऋण वसूली न्यायाधिकरणों के संबंध में वित्त मंत्री ने कहा कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इनमें रिक्त पदों की शीघ्र नियुक्ति सहित आवश्यक प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि इन संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हमीरपुर जिले के लोगों को देश की मजबूत बैंकिंग व्यवस्था का समान लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वे लगातार विभिन्न मंचों पर इस विषय को उठाते रहे हैं, जिनमें जिला स्तरीय बैंकर्स समीक्षा समिति और जिला बैंकिंग परामर्श समिति की बैठकें भी शामिल हैं। उनका प्रयास है कि राष्ट्रीय स्तर पर बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती का लाभ हमीरपुर के किसानों, युवाओं और उद्यमियों तक पहुंचे और क्षेत्र में रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हों।