हिम न्यूज़ शिमला। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने नव वर्ष के पहले दिन शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में 7 पुस्तकों का लोकार्पण किया। इनमें हिन्दी के प्रसिद्ध लेकर एस.आर. हरनोट की प्रसिद्ध पुस्तकें मंदिर और लोक श्रुतियां तथा कुन्जोम, सुदर्शन वशिष्ठ की पुस्तक किन्नर कैलाश से मणिमहेश, अजेय की पुस्तक रोहतांग आर-पार का तीसरा संस्करण, टाशी छेरिंग नेगी की किन्नौर, लाहुल के युवा लेखक छेप राम की संस्कृति के सात अध्याय और अखिलेश पाठक की देवभूमि की आत्मा शामिल थीं।

इस अवसर पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह पुस्तकें हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र किन्नौर, लाहौल और स्पीति तथा हिमाचल के मन्दिरों और लोक संस्कृति पर आधारित हैं। लोक निर्माण मंत्री नेे लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होते हैं और उनकी रचनाओं के माध्यम से लोक संस्कृति, लोक भाषा, बोलियां, परम्पराएं, रीति-रिवाज आदि धरोहर पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित होती हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास को उसके वास्तविक स्वरूप में समाज के समक्ष लाने का कार्य सच्चे व ईमानदार लेखक निडर होकर करते हैं।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन से युवाओं का किताबे पढ़ने के प्रति रुझान कम हुआ है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के नियंत्रित तथा रचनात्मक उपयोग के साथ ही युवाओं को किताबंे भी नियमित रूप से पढ़नी चाहिए क्योंकि जो ज्ञान और गंभीर चिंतन हमें किताबों से मिलता है वह कहीं और से उपलब्ध नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जयपुर और कसौली की तरह शिमला में भी लिटरेचर फेेस्टिवल का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि हिमाचल प्रदेश की साहित्य संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान सभी लेखकों ने अपनी रचनाओं की रचना-प्रक्रिया और उपयोगिता पर सारगर्भित बातें रखीं। यह कार्यक्रम हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच तथा आधार प्रकाशन प्राइवेट लिमेटिड के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गायक ओम प्रकाश जी द्वारा लोकगीत गाकर किया गया। मंच संचालन युवा कवि आलोचक सत्यनारायण स्नेही ने किया और धन्यवाद प्रस्ताव वरिष्ठ शिक्षाविद् लेखक जगदीश बाली ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर सचिव शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति राकेश कंवर, वरिष्ठ और युवा लेखक, साहित्य प्रेमी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।