हिम न्यूज़, करसोग : अभियान के दौरान लगभग 1000 से अधिक लोगों व विद्यार्थियों को किया जा चुका है जागरूक
एचआईवी एड्स जागरूकता व स्वास्थ जांच के दृष्टिगत करसोग में व्यापक स्तर पर एचआईवी/एड्स जागरूकता एवं एकीकृत स्वास्थ जांच अभियान चलाया जा रहा है। 12 अगस्त से शुरू हुए इस अभियान को 12 अक्टूबर, 2024 तक चलाया जाएगा। राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी के दिशा निर्देश में संचालित किए जा रहे इस अभियान के दौरान आईसीटीसी परामर्शदाता व स्वास्थ्य कार्यकर्ता गांव-गांव में पहुंच कर लोगांे को जागरूक कर रहे है।
आईसीटीसी परामर्शदाता नागरिक अस्पताल करसोग नंदा शर्मा ने बताया कि इस अभियान के लिए करसोग उपमंडल में 9 गांव माहंूनाग, तत्तापानी, शाकरा, चुराग, भनेरा, ग्वालपुर, भंथल, चैरीधार व कांडा सोरता को चिन्हित किया गया है। उन्होंने बताया कि गांव में पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से जागरूकता शिविर आयोजित कर, लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी एचआईवी/एड्स, हैपेटाइट्स-बी, हैपेटाइट्स-सी, सिफली और क्षय रोग (टीबी) के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत अब तक चार गांव में लगभग एक हजार से अधिक लोगों व विद्यार्थियों को इस संबंध में जागरूक किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में यह पाया गया है कि युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आकर अपना भविष्य बर्वाद कर रही है। नशे का सेवन करने वाले युवा एचआईवी एड्स जैसी बीमारी की चपेट में आ रहे है। जिससे बचाव व जागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य जांच में अनेक मामलों में यह सामने आया है कि नशे की चपेट में आ चुके अनेक युवा अपनी नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीरिंज या नीडल का प्रयोग करते है। एक से अधिक युवाओं द्वारा अपनी नशे की डोज की पूर्ति के लिए एक ही नीडल का उपयोग करने से एचआईवी एड्स जैसी घातक बीमारी फैल रही है। इससे केवल जागरूकता से ही बचा जा सकता है।
परामर्शदाता नंदा शर्मा ने लोगों को इससे बचाव व जागरूक रहने की सलाह देते हुए बताया कि एचआईवी का वायरस एक ऐसा वायरस है जिसकी चपेट में आने के पशचात, उसका पता 10-12 साल के बाद चलता है। उन्होंने बताया कि एचआईवी एड्स जैसी बीमारी की चपेट में आने के अनेक कारण हो सकते है। उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों का आइसीटीसी केंद्रों में निःशुल्क उपचार किया जाता है और नियमित दवाई का सेवन करने से ऐसे लोग आम व्यक्ति की तरह ही लंबा जीवन व्यतीत कर सकते है। उन्होंने समाज के लोगों से आग्रह किया है कि ऐसे लोगों से किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए और प्रभावित व्यक्ति को भी आमजन के समान ही जीवन व्यतीत करने का पूर्ण अधिकार है।
गौरतलब है कि राज्य में एचआईवी पाॅजिटिव के 600 से अधिक मामले है। जिनमें अधिकतर ऐसे मामले है जो नशे की पूर्ति के लिए एक ही नीडल का प्रयोग करने के कारण इस घातक बीमारी की चपेट में आए है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों, विशेषकर युवाओं से आह्वान किया है कि वे नशे जैसी बुराई से अपने-आप को दूर रखे और समाज को एचआइवी मुक्त बनाने में अपना सहयोग प्रदान करे।
जागरूकता अभियान में लोगांे को अपने क्षेत्र व राज्य को एचआईवी/एड्स मुक्त बनाने की शपथ भी दिलाई जा रही है।
इस अभियान में अनेक चिकित्सक अपना योगदान दे रहे है। जबकि राकेश कुमार, भगवान दास व लवली ठाकुर आदि इसमें विशेष सहयोग कर रहे है।
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