हिमाचल विधानसभा में आपदा पर चर्चा, विपक्ष ने लगाया राहत राशि बांटने में भेदभाव का आरोप

हिम न्यूज़ शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को प्राकृतिक आपदा और इससे हुए भारी नुकसान का मामला गूंजा। सदन में इस मुद्दे पर हुई चर्चा में सदस्यों ने अपने-अपने हलकों में भारी बारिश से हुए नुकसान का जिक्र किया और कैसे आपदा से नुकसान को कम किया जा सकता है, उसे लेकर सुझाव भी दिए। यही नहीं, विपक्षी सदस्यों ने राहत राशि के आवंटन में भाई-भतीजावाद का भी आरोप लगाया।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नियम 130 के तहत प्रदेश में भारी बरसात व आपदा के कारण जनमानस, सड़कों, पुलों, घरों, फसलों, सरकारी भवनोंए निजी भूमि, पेयजल व सिंचाई योजनाओं को हुए नुकसान को लेकर सदन में प्रस्ताव सदन में पेश करते हुए आपदा पर चर्चा शुरू की। उन्होंने कहा कि राज्य में हर वर्ष प्राकृतिक आपदा से तबाही होती है। ऐसे में सरकार को इससे निपटने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। आपदा के समय असुरक्षित गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की बात होती है, लेकिन इसके स्थान पर सरकार को प्राकृतिक आपदा को लेकर सर्वेक्षण करना चाहिए, ताकि सभी लोग सुरक्षित रह सके।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि गत वर्ष आपदा राहत राशि बांटने व राहत कार्य करने में पारदर्शिता नहीं रखी। राशि बांटने में भाई-भतीजावाद किया गया तथा अपने करीबियों को राहत राशि दी गई, चाहे उनका नुकसान भी नहीं हुआ हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने गत वर्ष आपदा में मकान के पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने पर 7 लाख रुपए देने की घोषणा की थी, लेकिन अधिकांश लोगों को 1-1 लाख रुपए मिला है। इसके अलावा 1 भी व्यक्ति को 3 बिस्वा भूमि नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जो 18 हजार मकान प्रदेश को दिए हैं, उसे भी आपदा पैकेज का हिस्सा बना दिया।

जयराम ठाकुर कहा कि आपदा से निपटने के लिए सरकार को जो प्रयास किए हैं वह नाकाफी है। बरसात से पहले जो कदम उठाए जाने चाहिए थे, वह नहीं उठाए गए। आपदा के समय संचार, बिजली, पानी आदि ठप हो गए थे। पिछले वर्ष का बरसात में 500 लोगों की जान गई। 2933 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, 420 दुकानें, 7205 गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई, 500 लोगों की मौत हुई, 515 लोग घायल हुए तथा 10140 पशुओं की मौत हुई है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बार बरसात में 70 से अधिक लोगों की जिंदगी चली गई। दर्जनों लोगों के घर गए। सरकार ने पिछली बार 7 लाख देने की घोषणा की थी, लेकिन इस बार केवल डेढ़ लाख रुपए देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि त्रासदी एक बराबर है। ऐसे में इस वर्ष भी उन आपदा प्रभावितों को 7 लाख रुपए दिए जाएं, जिनके घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने ब्यास नदी को मोड़ने को लेकर बड़े घोटाले का आरोप लगाया तथा कहा कि नदी उसी रूट पर आ गई है, जिससे नुकसान हुआ है।

विधायक चंद्रशेखर ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हिमाचल में इस बार भी आई आपदा से काफी लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि आपदा के बावजूद भी सीएम ने मजबूती के साथ लोगों का साथ दिया है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण विषय है तथा इसपर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, ताकि इसके सार्थक नतीजे निकले व मौतें कम हो सके।

विधायक सुरेंद्र शौरी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आपदा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कई जगह ऐसी है, जहां पर एक साल पहले क्षतिग्रस्त हुए पुल नहीं बन पाए हैं। बच्चे बूढ़े, महिलाएं जान जोखिम में डाल कर उफनते नालों को पार कर रहे हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़के बंद है। उनके बिहार गांव तक सड़क एक साल से बंद है। क्योंकि यहां पर एक डंगा लगाना था, वह नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा कि नदी नालों के वाटर लेवल की जांच करके एक नीति बनानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि बरसात में पानी का लेवल कितना बढ़ता है तथा इस लेवल तक निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए।

विधायक अनुराधा राणा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन एक गंभीर विषय है तथा इस पर नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के जिस्पा, जंसकार, छिछलिंग आदि गांवों का जिक्र करते हुए कहा कि यह समाप्त होने के कगार पर है तथा इनके पुनर्स्थापन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आपदा को लेकर आने वाले समय में गंभीर नीति बनाने की जरूरत है। क्योंकि आने वाले समय में आपदाएं और बढ़ेगी तथा यह मानव निर्मित है। इसे सीधे तौर पर गलोबल वार्मिंग से जोड़ कर भी देखा जा सकात है। उन्होंने कहा कि इस बापदा से उनके हलके में 22 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। विधायक विपिन परमार, किशोरी लाल और पूर्ण चंद ठाकुर ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।