हिम न्यूज़ धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पंजाबी एवं डोगरी विभाग की ओर से पद्मश्री प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी की आत्मकथा ‘लेखे आवे भाग’ पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी करवाई गई । इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने की । कार्यक्रम में पद्मश्री हरमोहिंदर सिंह बेदी मुख्य अत्तिथि के तौर पर उपस्थित रहे ।
इसके अतिरिक्त डॉ. गुरनाम कौर बेदी जो की कुलाधिपति की धर्मपत्नी हैं, वे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के गुरु नानक अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष प्रो. गुरपाल सिंह संधू एवं पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ नीतू कौशल, पंजाबी कवि एवं चिंतक डॉ दविंदर सैफी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल रहे । इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो सुमन शर्मा तथा डीन अकादमिक प्रो प्रदीप कुमार ने भी कार्यक्रम में शिरकत की ।

इस कार्यक्रम की शुरुआत ज्योति प्रज्जवलन और मंगलाचरण के साथ हुई । इसके बाद डॉ. नरेश कुमार ने सभी अतिथियों विद्यार्थियों का स्वागत किया । इसके उपरांत दविंदर सैफी ने डॉ. हरमोहिंदर सिंह बेदी की आत्मकथा ‘लेखे आवे भाग’ के बारे में अपना खोज पत्र पढ़ा । अपने पत्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि आत्मकथा हरमिंदर सिंह बेदी के अक्स अस्तित्व के बारे में बहुत कुछ बताती है । हरमिंदर सिंह बेदी का जीवन हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है । इस आत्म कथा के बारे में डॉक्टर गुरपाल सिंह संधु ने कहा कि आत्म कथा पंजाब और हिमाचल की भावनात्मक साँच की बात करती है साथ ही उन्होंने कहा के हरमिंदर सिंह बेदी का जीवन सफ़र बहुत ही शानदार रहा है । इस कार्यक्रम में डॉ गुरनाम कौर बेदी ने आत्मकथा के बारे में बोलते हुए कहा कि इस आत्म कथा में जो भी लिखा गया है बिलकुल सच है और मैं उसकी साक्षी हूँ। इस आत्म कथा के बारे में डॉ नीतू कौशल जी ने भी अपना शोध पत्र पढ़ा ।
अंत में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सत प्रकाश बंसल ने सबके साथ अपने विचार साझा किए और इस अवसर पर उन्होंने पंजाबी एवं डोगरी विभाग के सहायक आचार्य एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ नरेश कुमार से कहा कि आत्म कथा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाये । इस कार्यक्रम में पंजाबी एवं डोगरी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर खेमराज शर्मा, अधिष्ठाता भाषा स्कूल प्रो. रोशन लाल शर्मा और डॉ. हरजिंदर सिंह का प्रमुख योगदान रहा । इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, अधिष्ठाता, शोधार्थी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे । कार्यक्रम में कुल 300 प्रतिभागी शामिल रहे ।