हिम न्यूज़ शिमला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला और मुख्यमंत्री से लेकर तमाम मंत्रियों के द्वारा लगाए जा रहे सभी बेबुनियाद आरोपों का जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि आपदा में प्रदेश के साथ खड़े रहने के लिए मुख्यमंत्री को दिल्ली जाकर आभार जताना चाहिए था और सारी स्थिति पर अपना पक्ष रखना चाहिए था लेकिन उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। समय से पहले मदद मिलने के बाद भी एक पाई न मिलने जैसी बातें करने लगे। राजनीति से प्रेरित होकर इस तरह के आरोप लगाना बहुत शर्मनाक हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री कह दें कि राहत और बचाव कार्य के लिए केंद्र ने एनडीआरएफ़ की टीमें नहीं भेजी, बीआरओ को काम पर नहीं लगाया, थल सेना और वायु सेना के जवानों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर हज़ारों लोगों के प्राणों की रक्षा नहीं की। वह कह दें कि वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने दुनिया के सबसे ख़तरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन को हिमाचल में अंजाम नहीं दिया या प्रधानमंत्री गृहमंत्री, समेत अन्य मंत्री और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कंधे से कंधा मिलाकर हिमाचल प्रदेश के साथ खड़े होने का भरोसा नहीं दिया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इतना सब कुछ करने के बाद भी यदि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री समेत कांग्रेस के बाक़ी नेता अगर कह रहे हैं कि केंद्र सरकार ने कोई मदद नहीं की तो इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने यह बातें शिमला में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने विक्रमादित्य को बात-बात पर पलट जाने वाले पलटू राम कहा। उन्होंने कहा कि कौल सिंह ठाकुर अपने ही चेले से चुनाव हार कर परेशान हैं, उम्र के इस पड़ाव पर राजनीति का इस तरह समाप्त हो जाने के कारण ऐसा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भारी बारिश की वार्निंग के बाद भी सरकार की तरफ़ से किसी तरह की तैयारी नहीं की गई और न ही आपदा से बचने और उसके जोखिम को कम करने का कोई प्रयास किया गया। सरकार की कोई तैयारी नहीं थी, हर सरकार में एक रवायत रही है कि गर्मी बरसात और बर्फ़बारी के पहले हमेशा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक हाई लेवल की मीटिंग होती हैं, जिसमें मौसम से होने वाले ख़तरों का आँकलन किया जाता है और उससे बचने की योजना बनाई जाती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने एक मीटिंग करने की भी ज़हमत नहीं उठाई। अगर सरकार की तैयारी होती तो इस आपदा में जनहानि कम की जा सकती थी। लोगों को सचेत किया जा सकता था। इसी कारण तबाही बहुत ज़्यादा हुई और बचाव एवं राहत कार्य में वह धार नहीं दिखी, जिसकी आपदा के समय आवश्यकता थी।
उन्होंने कहा कि यह सरकार आपदा राहत के मुद्दे पर भी पूरी तरह फेल रही। आपदा प्रभावितों को समय पर राहत नहीं पहुंच पाई। आज भी बहुत से प्रभावित ऐसे हैं जिन तक सरकार नहीं पहुंच पाई। सरकार के सभी विभागों में समन्वय की कमी दिखी। जिसकी वजह से राहत और पुनर्वास के कार्यक्रम प्रभारी तरह से नहीं हो पाये।
उन्होंने कहा कि आपदा के लिए केंद्र द्वारा भेजे गये हेलीकॉप्टर मंत्रियों और सरकार ने प्रभावी राहत कार्य में लगाने की बजाय, अपने पीआर में लगाने की कोशिश की। सेना के हेलीकॉप्टर पर नेता सेल्फ़ियाँ लेते नज़र आये। आपदा से बचाव की पूर्व योजना से लेकर राहत और बचाव के मामले में यह सरकार पूरी तरह से नाकाम रही।
जयराम ठाकुर ने कहा कि आज भी कई ऐसी जगहें हैं, जहां पर सड़कें बंद हैं। आपदा राहत में के नाम पर बाँटी जाने वाली राशि के मामले में जो हुआ वह आज तक कहीं नहीं हुआ। जो राहत देने का काम प्रशासन का था, वह कांग्रेसी नेताओं की पत्नियों और बच्चों ने किया। इस तरह की व्यवस्था कभी नहीं थी।
आपदा में बचाव कार्य के के दौरान सेना की क्षमताओं पर सवाल उठाए गये। सेना के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ की गई। आपदा में अपनी जान की बाज़ी लगा कर लोगों के जीवन की रक्षा करने वालों के लिए कांग्रेसी नेताओं का यह कहना ‘सेना ने भी हाथ खड़े कर दिये थे’, सेना के सामर्थ्य पर इससे दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी नहीं हो सकती है।
केंद्र से मिली मदद को लेकर झूठ बोला गया
नेता प्रतिपक्ष में कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समेत प्रमुख नेताओं ने मुख्यमंत्री से बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया। आपदा प्रभावित क्षेत्रों का मैंने दौरा किया और प्रदेश भर में हुए नुक़सान का जायज़ा लिया। मैं दिल्ली गया, प्रदेश को हुए नुक़सान के बारे में गृहमंत्री अमित शाह को अवगत करवाया और हर संभव मदद का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने तत्काल आपदा राहत के लिए एडवांस में 183 करोड़ की आपदा राहत राशि जारी की। राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के निर्देश दिये और कहा कि कल और राशि जारी करेंगे। अगले दिन राज्य सरकार के खाते में 181करोड़ रुपये और आ गये। कुल 364 करोड़ रुपये की तत्काल मदद की गई। यह धनराशि अग्रिम मदद के रूप में आई है।
केंद्र द्वारा बारिश के मौसम की समाप्ति के बाद ही टीमें आती हैं और नुक़सान का जायज़ा लेती हैं। इस बार आपदा के दो हफ़्ते के भीतर यह हो गया। केंद्र हर तरह से मदद कर रहा है। हर चीज की एक निर्धारित प्रक्रिया है।