अमृत सरोवर से 100 बीघा जमीन को मिली सिंचाई की सुविधा

हिम न्यूज़, करसोग:  करसोग के भंडारनू में बिमला खड्ड पर भू-संरक्षण विभाग द्वारा निर्मित अमृत सरोवर किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस अमृत सरोवर के निर्माण से जहां किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है वहीं यह सरोवर लुप्त हो रहे प्राकृतिक जल स्त्रोतों को रिचार्ज करने में भी सहायक सिद्व होगा।

जल से कृषि को बल वित्त पोषित योजना के तहत निर्मित किए गए इस सरोवर की लंबाई 16.20 मीटर और ऊंचाई 2.10 मीटर है। सरोवर को लगभग 4 लाख 30 हजार रुपए की धन-राशि व्यय कर बनाया गया है। अमृत सरोवर का कुल क्षेत्रफल लगभग 0.15 एकड़ है। इसका निर्माण अमृत सरोवर अभियान के अन्तर्गत किया गया है।

अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश में कुल 1,800 अमृत सरोवर बनाए जाने प्रस्तावित हैं, इनमें से लगभग 760 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया हैै। शेष बचे अमृत सरोवरों को 15 अगस्त, 2023 तक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके दृष्टिगत ही भू-संरक्षण विभाग द्वारा करसोग के भंडारनू में बिमला खड्ड पर इस अमृत सरोवर को बनाया गया है।

अमृत सरोवर से क्षेत्र की लगभग 100 बीघा जमीन को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है। अत्यधिक गर्मी अथवा सूखे की स्थिति में किसान इस सरोवर में एकत्रित पानी का प्रयोग खेतों को सिंचित करने के लिए कर सकेंगे। बिमला खड्ड पर बनाए गए इस सरोवर से बहाव के आधार पर खेतों को सिंचित करने वाली सिंचाई कूहल से जोड़ा गया है। कूहल के माध्यम से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए निरतंर पानी उपलब्ध होगा। किसान इस सरोवर के पानी का उपयोग कर अपने खेतों में नगदीं फसलें उगाकर, अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर सकते है।

सरोवर में सोलर वाटर लिफ्टिग इरिगेशन का भी प्रावधान है। सरोवर के साथ लगते क्षेत्र में किसान खेतों को सिंचित करने के लिए निजी तौर पर सोलर वाटर लिफ्टिग सिस्टम लगा खेतों की सिंचाई कर सकते है। इस सरोवर पर लगभग 5 सोलर वाटर लिफ्टिग सिस्टम स्थापित किए जा सकते है।

भू-संरक्षक विभाग द्वारा निर्मित इस अमृत सरोवर को बनाने का मूल उद्देश्य जल से कृषि को बल योजना के अन्तर्गत किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाकर अनाज के उत्पादन को बढ़ाना, जमीन के अंदर कम होते भू-जल स्तर को बनाए रखना और सूखते प्राकृतिक जल स्त्रोतों को रिचार्ज कर उन्हें मूल स्वरूप में वापस लाना आदि शामिल है। जिसके अन्तर्गत ही प्रदेश भर में इस तरह के अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है।

गौरतलव है कि वर्षा जल का अपवाह अत्यधिक होने से अधिकांश जल बहकर नदीं-नालों में चला जाता है। पानी के साथ-साथ मृदा कटाव भी होता है, जिससे उपजाऊ भूमि की उर्वरता कम होती है। लेकिन इस तरह के अमृत सरोवरों का निर्माण किए जाने से वर्षा जल को अधिक से अधिक मात्रा में संग्रहित किया जा सकता है। जिससे अधिकाधिक क्षेत्र की सिंचाई करते हुए किसानों व बागवानों द्वारा अधिक उत्पादन भी प्राप्त किया जा सकता है।

करसोग स्थित भू-संरक्षक विभाग के एडीओ युवराज के अनुसार बिमला खड्ड पर निर्मित किए गए अमृत सरोवर का निर्माण कृषि विकास संघ के सहयोग से किया गया है। इस सरोवर के बनने से जहां किसानों और बागवानों को सिंचाई की सुचारू सुविधा उपलब्ध हुई है, वहीं यह अमृत सरोवर भू-जल स्तर को रिचार्ज करने में भी सहायक सिद्व होगा।